{"_id":"699742cdc9d10f7adb086dc9","slug":"health-gift-from-the-camp-smiles-return-to-disappointed-faces-balrampur-news-c-99-1-slko1029-143111-2026-02-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: शिविर से सेहत की सौगात, निराश चेहरों पर लौटी मुस्कान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: शिविर से सेहत की सौगात, निराश चेहरों पर लौटी मुस्कान
विज्ञापन
पचपेड़वा क्षेत्र के थारू गांव में आयोजित शिविर में दवा लेते लोग। स्रोत विभाग
बलरामपुर।
जिले के तुलसीपुर तहसील के सदूर और पिछड़े गांवों में 6 से 8 फरवरी तक गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा के तहत स्वास्थ्य शिविर आयोजित हुए। जिले के 68 गांवों और तुलसीपुर स्थित देवीपाटन मंदिर परिसर में मेगा स्वास्थ्य कैंप लगाकर स्वास्थ्य सेवा की मिसाल पेश किया। तीन दिनों में कुल 55 हजार लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। तीन दिनों का यह अभियान ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में बेहतर कदम साबित हुआ। जहां हजारों चेहरों पर राहत और उम्मीद की मुस्कान लौट आई।
शिविर आयोजन के बाद जारी रिपोर्ट के अनुसार 4 हजार मरीज बीपी और शुगर से पीड़ित पाए गए। 31 हजार लोगों को सर्दी, जुकाम और बुखार की शिकायत थी। 1670 मरीज रक्त अल्पता (एनीमिया) से प्रभावित मिले। जिनमें अधिकांश महिलाओं और किशोरियों में खून की कमी का कारण खराब खानपान रहा। पांच मरीज न्यूरोलॉजिकल समस्या (कमर दर्द, झुनझुनी) से जूझते मिले। तीन पुराने कुष्ठ (लिप्रोसी) के केस भी चिह्नित हुए, जिनका उपचार हुआ। आयोजन के सहयोगी नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन के जिला सचिव व तुलसीपुर सीएचसी के अधीक्षक डॉ. विकल्प मिश्र ने बताया कि यह स्वास्थ्य सेवा यात्रा सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों को जागरूक करने का भी माध्यम बनी। खानपान में सुधार, नियमित जांच और साफ-सफाई के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। बताया कि बांझपन को छोड़कर अन्य मरीजों का इलाज सीएचसी पर किया जा रहा है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
बांझपन के चार मरीजों को मेडिकल कॉलेज किया रेफर
-- शिविर में चार गंभीर मामले सामने आए। जिसमें बांझपन और जटिल स्त्री रोग से जुड़े मरीजों को चिह्नित किया गया। जरवा व बघेलखंड क्षेत्र के इन मरीजाें का इलाज मेडिकल कॉलेज में शुरू हो गया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मौके पर ही परामर्श और दवाएं उपलब्ध कराईं।
विज्ञापन
जरवा क्षेत्र की 32 वर्षीय महिला ने बताया कि पिछले कई वर्षों से संतान सुख से वंचित थीं। आर्थिक तंगी के कारण बड़े अस्पताल तक पहुंच पाना संभव नहीं था। मेगा कैंप में जांच के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उनकी समस्या की गंभीरता को समझा और तुरंत मेडिकल कॉलेज में रेफर किया। पहली बार लगा कि कोई हमारी तकलीफ समझने वाला भी है। मुफ्त जांच और सही सलाह ने नई उम्मीद दी है। इसी तरह एनीमिया से पीड़ित कई किशोरियों को आयरन की दवाएं और पोषण संबंधी परामर्श दिया गया। न्यूरोलॉजिकल दर्द से जूझ रहे मरीजों को विशेषज्ञ सलाह और आगे की जांच की सुविधा मिली।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
विज्ञापन
जिले के तुलसीपुर तहसील के सदूर और पिछड़े गांवों में 6 से 8 फरवरी तक गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा के तहत स्वास्थ्य शिविर आयोजित हुए। जिले के 68 गांवों और तुलसीपुर स्थित देवीपाटन मंदिर परिसर में मेगा स्वास्थ्य कैंप लगाकर स्वास्थ्य सेवा की मिसाल पेश किया। तीन दिनों में कुल 55 हजार लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। तीन दिनों का यह अभियान ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में बेहतर कदम साबित हुआ। जहां हजारों चेहरों पर राहत और उम्मीद की मुस्कान लौट आई।
शिविर आयोजन के बाद जारी रिपोर्ट के अनुसार 4 हजार मरीज बीपी और शुगर से पीड़ित पाए गए। 31 हजार लोगों को सर्दी, जुकाम और बुखार की शिकायत थी। 1670 मरीज रक्त अल्पता (एनीमिया) से प्रभावित मिले। जिनमें अधिकांश महिलाओं और किशोरियों में खून की कमी का कारण खराब खानपान रहा। पांच मरीज न्यूरोलॉजिकल समस्या (कमर दर्द, झुनझुनी) से जूझते मिले। तीन पुराने कुष्ठ (लिप्रोसी) के केस भी चिह्नित हुए, जिनका उपचार हुआ। आयोजन के सहयोगी नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन के जिला सचिव व तुलसीपुर सीएचसी के अधीक्षक डॉ. विकल्प मिश्र ने बताया कि यह स्वास्थ्य सेवा यात्रा सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों को जागरूक करने का भी माध्यम बनी। खानपान में सुधार, नियमित जांच और साफ-सफाई के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। बताया कि बांझपन को छोड़कर अन्य मरीजों का इलाज सीएचसी पर किया जा रहा है।
विज्ञापन
बांझपन के चार मरीजों को मेडिकल कॉलेज किया रेफर
विज्ञापन
जरवा क्षेत्र की 32 वर्षीय महिला ने बताया कि पिछले कई वर्षों से संतान सुख से वंचित थीं। आर्थिक तंगी के कारण बड़े अस्पताल तक पहुंच पाना संभव नहीं था। मेगा कैंप में जांच के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उनकी समस्या की गंभीरता को समझा और तुरंत मेडिकल कॉलेज में रेफर किया। पहली बार लगा कि कोई हमारी तकलीफ समझने वाला भी है। मुफ्त जांच और सही सलाह ने नई उम्मीद दी है। इसी तरह एनीमिया से पीड़ित कई किशोरियों को आयरन की दवाएं और पोषण संबंधी परामर्श दिया गया। न्यूरोलॉजिकल दर्द से जूझ रहे मरीजों को विशेषज्ञ सलाह और आगे की जांच की सुविधा मिली।