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Balrampur News: सरयू के जल से लिया था संकल्प, पूरा होता देख गदगद मन

Sun, 14 Jan 2024 01:08 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Sun, 14 Jan 2024 01:08 PM IST
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Had taken a resolution with the water of Saryu, felt happy after seeing it fulfilled.
-बलरामपुर। अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर में जिले से भी तमाम लोग कारसेवा के लिए अयोध्या पहुंचे थे। अब जब अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है तो कारसेवक अपनी पुरानी यादों को बड़े ही उत्साह के साथ साझा कर रहे हैं। हर कोई अपने हिसाब से इस उत्सव को मनाने की तैयारी में जुटा है।
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नव्य और भव्य मंदिर में अपने आराध्य के विराजमान होने को लेकर रामभक्तों में खासा उत्साह है। वर्ष 1989, 1990 व 1992 में कारसेवा करने वाले अपने प्रभु का मंदिर देखकर गदगद होने के साथ उस पल को याद कर गौरवान्वित हो रहे हैं।
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तुलसीपुर नगर के नई बाज़ार निवासी व संघ की शाखा आरंभ करने वाले रामजी आर्य का कहना है कि 1984 में अयोध्या में प्रभू श्रीराम का मंदिर बनवाने का संकल्प सरयू का जल हथेलियों में भरकर लिया था। इसके बाद आंदोलन में महंथ अवैद्यनाथ, साध्वी ऋतंभरा व स्वामी चिन्मयानंद के साथ रथयात्रा में भी शामिल हुआ। चार अक्टूबर 1990 को जब शिलापूजन कराया गया, उसी दौरान मुझे राम गोपाल खंडेलवाल, आनंद कसौधन, सुरेश मित्तल, राजेंद्र गोयल, अंग्रेज बहादुर व रामदीन गुप्त के साथ गिरफ्तार कर गोंडा जेल भेज दिया गया। फिर वहां से बाराबंकी जेल भेजा गया। 30 दिन जेल में रहने के बाद रिहाई हुई। पुनः 1992 में चार दिसंबर को तुलसीपुर में हुई लालकृष्ण आडवाणी की सभा में भी साथ रहा। आज संकल्प पूरा होने पर अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने से बहुत खुशी हो रही है।
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-नगर निवासी उपेंद्र त्रिपाठी कारसेवा के दिनों की बात को ताजा करते हुए बताते हैं कि कारसेवा में जनता को ले जाने के लिए संघ की ओर से दायित्व सौंपा गया था। जब हम लोग सरयू पुल के नीचे नदी किनारे बैठे थे, तभी आइटीबीपी के जवानों ने आंसू गैस का गोले दागना शुरू कर दिए। एक गोला हम लोगों के करीब आकर गिरा तो हिम्मत कर उस गोले को रुमाल से पकड़ कर पानी में फेंक दिया।

-नगर के मोहल्ला तुलसीपार्क निवासी विनय कुमार शुक्ल ने बताया कि 30 अक्टूबर 1990 की सुबह से दो नवंबर की शाम तक हम लोग सरयू पुल पर डटे थे। वहां से साथियों के साथ गिरफ्तार कर गोंडा में लालबहादुर शास्त्री डिग्री कालेज में बने अस्थाई जेल में तीन दिन रखा गया। छूटने पर पैदल चलते हुए गोंडा से रेलवे लाइन के किनारे होता हुए कटरा में निकलकर सरजू पुल पर पहुंचा। ढांचा गिराने के दौरान हुए गोलीकांड के दौरान भी हम लोग मौके पर मौजूद रहे। संवाद
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