{"_id":"69dfcda3d6eb4712420ecb0f","slug":"geeta-became-self-reliant-through-nutrition-garden-balrampur-news-c-99-1-brp1010-146374-2026-04-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: पोषण वाटिका से गीता बनीं आत्मनिर्भर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: पोषण वाटिका से गीता बनीं आत्मनिर्भर
Wed, 15 Apr 2026 11:10 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 15 Apr 2026 11:10 PM IST
विज्ञापन
फोटो-23-बलरामपुर के शिवानगर में सब्जी की खेती दिखाती गीता ।-संवाद
पिपरहवा चौराहा। जहां एक ओर लोग पारंपरिक खेती से दूरी बना रहे हैं, वहीं तुलसीपुर ब्लॉक के शिवानगर गांव की आजीविका सखी गीता ने पोषण वाटिका लगाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। गीता ने घर की खाली जमीन को उपयोग में लाकर न केवल अपने परिवार के लिए ताजा और पौष्टिक सब्जियों की व्यवस्था की, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है।
गीता वर्ष 2021 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और विभागीय प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें जैविक खेती और पोषण वाटिका की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने अपने घर पर किचन गार्डन तैयार करने का निर्णय लिया। उनकी पोषण वाटिका में पालक, मेथी, टमाटर, बैंगन, लौकी, हरी धनिया सहित कई मौसमी सब्जियां जैविक खाद के माध्यम से उगाई जा रही हैं।
पोषण वाटिका से उनके परिवार को ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल रही हैं, जिससे बाजार पर निर्भरता कम हुई है और घरेलू खर्च में भी कमी आई है।
गीता ने बताया कि अब उनकी दैनिक जरूरतों की अधिकांश पूर्ति इसी वाटिका से हो रही है। जरूरत से अधिक सब्जियां वह आसपास के लोगों को देकर बचत भी कर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
गीता वर्ष 2021 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और विभागीय प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें जैविक खेती और पोषण वाटिका की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने अपने घर पर किचन गार्डन तैयार करने का निर्णय लिया। उनकी पोषण वाटिका में पालक, मेथी, टमाटर, बैंगन, लौकी, हरी धनिया सहित कई मौसमी सब्जियां जैविक खाद के माध्यम से उगाई जा रही हैं।
विज्ञापन
पोषण वाटिका से उनके परिवार को ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल रही हैं, जिससे बाजार पर निर्भरता कम हुई है और घरेलू खर्च में भी कमी आई है।
गीता ने बताया कि अब उनकी दैनिक जरूरतों की अधिकांश पूर्ति इसी वाटिका से हो रही है। जरूरत से अधिक सब्जियां वह आसपास के लोगों को देकर बचत भी कर रही हैं।
विज्ञापन