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Balrampur News: आत्महत्या का प्रयास करने के आरोप से पूर्व सांसद दोषमुक्त
Mon, 17 Jul 2023 11:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 17 Jul 2023 11:58 PM IST
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रिजवान जहीर, पूर्व सांसद
बलरामपुर। अपर सीजेएम सिविल जज सीनियर डिवीजन एफटीसी ने आत्महत्या का प्रयास करने के आरोपों से पूर्व सांसद रिजवान जहीर को दोषमुक्त कर दिया है। यह मुकदमा 28 अगस्त 2000 को उतरौला कोतवाली में दर्ज हुआ था। 23 साल बाद इस मुकदमे का फैसला सोमवार को सुनाया गया।
वर्ष 2000 में तत्कालीन सांसद बलरामपुर रिजवान जहीर ने पुलिसिया उत्पीड़न के खिलाफ उतरौला कोतवाली के सामने भूख हड़ताल किया था। पुलिस प्रशासन द्वारा भूख हड़ताल को अवैध करार देते हुए उन्हें हटा दिया गया था। पुलिस का आरोप था कि तत्कालीन सांसद ने भूख हड़ताल के बहाने आत्महत्या करने का प्रयास किया। इसी मामले में कोतवाली उतरौला के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक हीरा सिंह ने 28 अगस्त 2000 को पूर्व सांसद के खिलाफ आईपीसी की धारा 309 के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया था।
मुकदमे की विवेचना उपनिरीक्षक सीबी उपाध्याय, उपनिरीक्षक अशोक कुमार व उपनिरीक्षक चंद्रशेखर सिंह भदौरिया ने की। विवेचना पूर्ण कर उपनिरीक्षक चंद्रशेखर सिंह ने रिजवान जहीर को धारा 309 आईपीसी का दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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मुकदमे का परीक्षण सिविल जज उतरौला न्यायालय में शुरू हुआ। शासन द्वारा सांसद व विधायक के मुकदमों के लिए एमपी-एमएलए कोर्ट को अधिकृत किए जाने के कारण मुकदमा सीजेएम बलरामपुर न्यायालय में स्थानांतरित हुआ। न्यायालय में गवाहों को सरकारी अधिवक्ता द्वारा पेश किया गया। सीजेएम न्यायालय से मुकदमा सिविल जज सीनियर डिवीजन एफटीसी/ अपर सीजेएम न्यायालय में स्थानांतरित हुआ। पत्रावली का अवलोकन करने व दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपर सीजेएम अतुल कुमार नायक ने रिजवान जहीर के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य न मिलने के कारण उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
हालांकि पूर्व सांसद अन्य कई मामलों में भी अभियुक्त होने के कारण जिला कारागार ललितपुर में बंद हैं।
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वर्ष 2000 में तत्कालीन सांसद बलरामपुर रिजवान जहीर ने पुलिसिया उत्पीड़न के खिलाफ उतरौला कोतवाली के सामने भूख हड़ताल किया था। पुलिस प्रशासन द्वारा भूख हड़ताल को अवैध करार देते हुए उन्हें हटा दिया गया था। पुलिस का आरोप था कि तत्कालीन सांसद ने भूख हड़ताल के बहाने आत्महत्या करने का प्रयास किया। इसी मामले में कोतवाली उतरौला के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक हीरा सिंह ने 28 अगस्त 2000 को पूर्व सांसद के खिलाफ आईपीसी की धारा 309 के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया था।
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मुकदमे की विवेचना उपनिरीक्षक सीबी उपाध्याय, उपनिरीक्षक अशोक कुमार व उपनिरीक्षक चंद्रशेखर सिंह भदौरिया ने की। विवेचना पूर्ण कर उपनिरीक्षक चंद्रशेखर सिंह ने रिजवान जहीर को धारा 309 आईपीसी का दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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मुकदमे का परीक्षण सिविल जज उतरौला न्यायालय में शुरू हुआ। शासन द्वारा सांसद व विधायक के मुकदमों के लिए एमपी-एमएलए कोर्ट को अधिकृत किए जाने के कारण मुकदमा सीजेएम बलरामपुर न्यायालय में स्थानांतरित हुआ। न्यायालय में गवाहों को सरकारी अधिवक्ता द्वारा पेश किया गया। सीजेएम न्यायालय से मुकदमा सिविल जज सीनियर डिवीजन एफटीसी/ अपर सीजेएम न्यायालय में स्थानांतरित हुआ। पत्रावली का अवलोकन करने व दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपर सीजेएम अतुल कुमार नायक ने रिजवान जहीर के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य न मिलने के कारण उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
हालांकि पूर्व सांसद अन्य कई मामलों में भी अभियुक्त होने के कारण जिला कारागार ललितपुर में बंद हैं।