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बाढ़ पीड़ितों ने वाणिज्य कर कार्यालय में डाला डेरा
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बलरामपुर। बड़ा परेड ग्राउंड के पास वाणिज्य कार्यालय के नीचे डेरा डाले बाढ़ पीड़ितों को नगर में बने बाढ़ राहत शिविर की जानकारी ही नहीं है। ये बाढ़ पीडित चार दिन से अपने मवेशियों के साथ बरामदे में ही रह रहे हैं मगर प्रशासन से अब तक किसी प्रकार की मदद तक नहीं मिली।
बरामदे में बैठे बाढ़ पीड़ित नारायण ने बताया कि मां शांति व बहन वंदना को भिउरी गांव में छोड़कर चार दिन से यहां हैं। हमारे पास खाने को कुछ नहीं है। पानी कम होने पर घरवालों का हालचाल जानने के लिए पिता आज गांव गए हैं। सुल्तानजोत निवासी भरत ने कहा कि हमें नहीं पता कि बाढ़ पीड़ितों के रुकने की व्यवस्था कहां है। सात भैंस के साथ तीन दिन से यहां हैं। जानवरों को चारा भी नसीब नहीं हो रहा।
करबला के निकट रहने वाली बिब्बी व चुन्नी ने बताया कि तीन दिन से पेट भरना मुश्किल हो गया है। हम लोग खाने के लिए राशन नहीं ला पाए थे। अब लंच पैकेट बांटने वालों का ही सहारा है। महबूब व सुबराती ने बताया कि सोमवार रात कुछ लोग खाना दे गए थे। वही खाया है। हमारे कुछ लोग अभी घर की छत पर ही फंसे हैं। एडीएम राम अभिलाष ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए बने आश्रय स्थलों पर खाने-पीने व रहने की समुचित व्यवस्था की गई है।
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बरामदे में बैठे बाढ़ पीड़ित नारायण ने बताया कि मां शांति व बहन वंदना को भिउरी गांव में छोड़कर चार दिन से यहां हैं। हमारे पास खाने को कुछ नहीं है। पानी कम होने पर घरवालों का हालचाल जानने के लिए पिता आज गांव गए हैं। सुल्तानजोत निवासी भरत ने कहा कि हमें नहीं पता कि बाढ़ पीड़ितों के रुकने की व्यवस्था कहां है। सात भैंस के साथ तीन दिन से यहां हैं। जानवरों को चारा भी नसीब नहीं हो रहा।
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करबला के निकट रहने वाली बिब्बी व चुन्नी ने बताया कि तीन दिन से पेट भरना मुश्किल हो गया है। हम लोग खाने के लिए राशन नहीं ला पाए थे। अब लंच पैकेट बांटने वालों का ही सहारा है। महबूब व सुबराती ने बताया कि सोमवार रात कुछ लोग खाना दे गए थे। वही खाया है। हमारे कुछ लोग अभी घर की छत पर ही फंसे हैं। एडीएम राम अभिलाष ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए बने आश्रय स्थलों पर खाने-पीने व रहने की समुचित व्यवस्था की गई है।
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