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किसी भी कीमत पर घर पहुंचने को बेताब हैं प्रवासी
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बलरामपुर के बहादुरापुर चेक पोस्ट पर ट्रक से पहुंचे महाराष्ट्र के प्रवासी।
- फोटो : BALRAMPUR
देहात (बलरामपुर)। वाहन बस है, ट्रक है, टेंपो है या फिर कोई अन्य, प्रवासी कामगारों के लिए ये कोई खास मायने नहीं रखता। उन्हें बस किसी तरह और किसी भी कीमत पर घर पहुंचना है। ये नजारा गुरुवार को जिले की सीमा पर कुआना रेंज के पास बने बैरियर पर देखने को मिला। 3000 से 3500 रुपये प्रति व्यक्ति किराया भुगतान कर लोग ट्रकों में भूसे की तरह भरकर महाराष्ट्र से यहां पहुंच रहे हैं। चार-पांच दिन तक ये लोग भूखे-प्यासे भी रह रहे हैं। रास्ते में कहीं कुछ मिला तो खा लिया नहीं तो ऊपर वाले को याद कर लिया।
गुरुवार दोपहर बैरियर पर मुंबई से पहुंचे अरबाज खान, संजल, प्रमोद, मेराज, तबारक अली, जुबेर व सदीकुन्निशा आदि ने बताया कि वे लोग चार दिन पहले ट्रक में भरकर मुंबई से चले थे। ट्रक चालक ने किसी से तीन हजार तो किसी से साढ़े तीन हजार रुपये किराया लिया है। ट्रक में ठीक से बैठने की जगह भी नहीं बची थी। रास्ते में कहीं किसी समाजसेवी ने कुछ खिला-पिला दिया तो ठीक, नहीं तो हम लोग भूखे ही रहे।
वापसी का कारण पूछने पर इन लोगों ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वहां काम नहीं मिल रहा था। पास में जो पैसे थे वह खत्म हो रहे थे। अब घर के अलावा कहीं और ठिकाना नहीं दिख रहा था। भूखों मरने से बेहतर यही लगा कि हम लोग ट्रक में ही भरकर घर लौट आएं। बैरियर पर एसएससी ग्रुप के लंगर में इन लोगों को भोजन कर बेहद सुकून मिला।
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जब ट्रक चालक से पूछा कि मालवाहक वाहन में किसकी परमीशन से यात्रियों को भरा है तो उसने कहा कि सब लोग लेकर आ रहे थे तो इन लोगों के अनुरोध पर मैं भी यहां चला आया। मौके पर मौजूद प्रशासन के लोगों ने मुंबई से आए इन लोगों का विवरण नोट कर इन्हें स्थानीय व्यवस्था के हिसाब से नजदीकी क्वारंटीन सेंटरों पर भेज दिया। गुरुवार सुबह छह बजे से दोपहर दो बजे तक करीब 1500 प्रवासी यहां पहुंच चुके थे। वाहनों के आने का सिलसिला अनवरत जारी है।
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गुरुवार दोपहर बैरियर पर मुंबई से पहुंचे अरबाज खान, संजल, प्रमोद, मेराज, तबारक अली, जुबेर व सदीकुन्निशा आदि ने बताया कि वे लोग चार दिन पहले ट्रक में भरकर मुंबई से चले थे। ट्रक चालक ने किसी से तीन हजार तो किसी से साढ़े तीन हजार रुपये किराया लिया है। ट्रक में ठीक से बैठने की जगह भी नहीं बची थी। रास्ते में कहीं किसी समाजसेवी ने कुछ खिला-पिला दिया तो ठीक, नहीं तो हम लोग भूखे ही रहे।
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वापसी का कारण पूछने पर इन लोगों ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वहां काम नहीं मिल रहा था। पास में जो पैसे थे वह खत्म हो रहे थे। अब घर के अलावा कहीं और ठिकाना नहीं दिख रहा था। भूखों मरने से बेहतर यही लगा कि हम लोग ट्रक में ही भरकर घर लौट आएं। बैरियर पर एसएससी ग्रुप के लंगर में इन लोगों को भोजन कर बेहद सुकून मिला।
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जब ट्रक चालक से पूछा कि मालवाहक वाहन में किसकी परमीशन से यात्रियों को भरा है तो उसने कहा कि सब लोग लेकर आ रहे थे तो इन लोगों के अनुरोध पर मैं भी यहां चला आया। मौके पर मौजूद प्रशासन के लोगों ने मुंबई से आए इन लोगों का विवरण नोट कर इन्हें स्थानीय व्यवस्था के हिसाब से नजदीकी क्वारंटीन सेंटरों पर भेज दिया। गुरुवार सुबह छह बजे से दोपहर दो बजे तक करीब 1500 प्रवासी यहां पहुंच चुके थे। वाहनों के आने का सिलसिला अनवरत जारी है।