{"_id":"6aaade64061955fabe05b24e","slug":"details-of-every-household-will-now-be-recorded-on-mobile-phones-instead-of-paper-balrampur-news-c-99-1-slko1029-154868-2026-09-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: अब कागज नहीं, मोबाइल में दर्ज होगा घर-घर का ब्योरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: अब कागज नहीं, मोबाइल में दर्ज होगा घर-घर का ब्योरा
Wed, 16 Sep 2026 11:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 16 Sep 2026 11:52 PM IST
विज्ञापन
फोटो-31-बलरामपुर के कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में मौजूद अधिकारी।-स्रोत: विभाग
बलरामपुर। जनगणना 2027 में कागज और रजिस्टर के बजाय मोबाइल एप के जरिए परिवारों का ब्योरा दर्ज किया जाएगा। प्रगणक अपने निर्धारित क्षेत्र के घरों तक पहुंचेंगे और परिवार के सदस्यों से जरूरी जानकारी लेकर उसे मौके पर ही मोबाइल एप में दर्ज करेंगे। जिले में करीब 5100 प्रगणना ब्लॉक बनाए जा रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक प्रत्येक घर को एक निर्धारित क्षेत्र में शामिल कर वहां रहने वाले परिवारों का ब्योरा जुटाया जाएगा।
बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियों को लेकर जिला और चार्ज स्तर के अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने बताया कि एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक जनगणना का फील्ड वर्क कराया जाएगा। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि प्रगणक अपने क्षेत्र के किसी भी घर को न छोड़ें और जानकारी दर्ज करते समय पूरी सावधानी बरतें।
जनगणना के लिए जिले को करीब 5100 प्रगणना ब्लॉक में बांटा जाएगा। प्रत्येक प्रगणक को एक निर्धारित क्षेत्र आवंटित किया जाएगा। वह उसी क्षेत्र में घर-घर जाकर परिवार की जानकारी जुटाएगा। लोगों से आवश्यक विवरण पूछकर उसे मोबाइल एप में दर्ज किया जाएगा। डिजिटल व्यवस्था के तहत जानकारी सीधे एप में दर्ज होने से डाटा संकलन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित होगी।
विज्ञापन
घर बैठे भी दे सकेंगे परिवार की जानकारी
जनगणना में पहली बार आम लोगों को स्व-गणना का विकल्प भी मिलेगा। निर्धारित व्यवस्था के तहत नागरिक 30 दिसंबर 2026 तक खुद और परिवार के सदस्यों की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद जनगणना प्रक्रिया में इस जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। यानी ऑनलाइन माध्यम से जानकारी भरने की सुविधा पाने वाले लोग कर्मचारी के घर पहुंचने से पहले अपना विवरण दर्ज कर सकेंगे।
हर घर तक पहुंचना होगी बड़ी जिम्मेदारी
बैठक में अधिकारियों को बताया गया कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है। देश और जिले की आबादी से जुड़े आंकड़े आगे की योजनाओं और आवश्यकताओं का आधार बनते हैं। ऐसे में किसी परिवार की जानकारी छूटने या गलत दर्ज होने से आंकड़ों पर असर पड़ सकता है।
जिलाधिकारी एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कर्मचारियों को पूरी प्रक्रिया समझाएं और काम निर्धारित समय में पूरा कराएं। प्रशिक्षण में जनगणना निदेशालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के प्रतिनिधियों ने मोबाइल एप पर जानकारी दर्ज करने, स्व-गणना और प्रगणकों की जिम्मेदारियों से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी दी।
विज्ञापन
बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियों को लेकर जिला और चार्ज स्तर के अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने बताया कि एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक जनगणना का फील्ड वर्क कराया जाएगा। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि प्रगणक अपने क्षेत्र के किसी भी घर को न छोड़ें और जानकारी दर्ज करते समय पूरी सावधानी बरतें।
विज्ञापन
जनगणना के लिए जिले को करीब 5100 प्रगणना ब्लॉक में बांटा जाएगा। प्रत्येक प्रगणक को एक निर्धारित क्षेत्र आवंटित किया जाएगा। वह उसी क्षेत्र में घर-घर जाकर परिवार की जानकारी जुटाएगा। लोगों से आवश्यक विवरण पूछकर उसे मोबाइल एप में दर्ज किया जाएगा। डिजिटल व्यवस्था के तहत जानकारी सीधे एप में दर्ज होने से डाटा संकलन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित होगी।
विज्ञापन
घर बैठे भी दे सकेंगे परिवार की जानकारी
जनगणना में पहली बार आम लोगों को स्व-गणना का विकल्प भी मिलेगा। निर्धारित व्यवस्था के तहत नागरिक 30 दिसंबर 2026 तक खुद और परिवार के सदस्यों की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद जनगणना प्रक्रिया में इस जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। यानी ऑनलाइन माध्यम से जानकारी भरने की सुविधा पाने वाले लोग कर्मचारी के घर पहुंचने से पहले अपना विवरण दर्ज कर सकेंगे।
हर घर तक पहुंचना होगी बड़ी जिम्मेदारी
बैठक में अधिकारियों को बताया गया कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है। देश और जिले की आबादी से जुड़े आंकड़े आगे की योजनाओं और आवश्यकताओं का आधार बनते हैं। ऐसे में किसी परिवार की जानकारी छूटने या गलत दर्ज होने से आंकड़ों पर असर पड़ सकता है।
जिलाधिकारी एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कर्मचारियों को पूरी प्रक्रिया समझाएं और काम निर्धारित समय में पूरा कराएं। प्रशिक्षण में जनगणना निदेशालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के प्रतिनिधियों ने मोबाइल एप पर जानकारी दर्ज करने, स्व-गणना और प्रगणकों की जिम्मेदारियों से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी दी।