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डेंगू के मरीजों पर भारी पड़ रही प्लेटलेट्स की लाचारी
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बलरामपुर। जिलेभर में डेंगू कहर बरपा रहा है मगर इसके मरीजों के लिए यहां प्लेटलेट्स की कोई व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में डेंगू के मरीजों के तीमारदार प्लेटलेट्स के लिए 42 किलोमीटर दूर गोंडा के ब्लड बैंक का चक्कर लगाने को विवश हैं। प्लेटलेट्स न होने के कारण चिकित्सक भी डेंगू के मरीजों को सीधे लखनऊ रेफर कर रहे हैं। ये स्थिति डेंगू के मरीजों को भारी पड़ रही है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में अभी तक ब्लड सेपरेटर यूनिट नहीं शुरू हो सकी है। ऐसे में खून से प्लेटलेट्स अलग नहीं निकल पाती हैं। जबकि यहां ब्लड सेपरेटर यूनिट के लिए अलग से भवन बनकर तैयार है। जिसमें लेमिनार एयरफ्लो, डाई इलेक्ट्रिक ट्यूब सीजर व प्लाज्मा एक्सप्रेसर सहित अन्य उपकरण आ गए हैं, लेकिन डीप फ्रीजर, प्लेटलेट्स सेपरेटर, आरबीसी फ्रीजर अभी तक नहीं आए हैं।
इन मशीनों के नहीं आने से इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। वहीं, ब्लड बैंक की फर्श भी धंस गई है। इससे रक्तदाताओं को भी परेशानी होती है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रवीण कुमार का कहना है कि यूनिट संचालन के लिए प्रयास किया जा रहा है।
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ब्लड बैंक में वर्तमान समय में ए निगेटिव ग्रुप का दो, बी पॉजिटिव का 31, ओ पॉजिटवि का 45, ओ निगेटिव का दो व एबी पॉजिटिव का नौ यूनिट रक्त उपलब्ध है। वहीं, ए पॉजिटिव, बी निगेटिव एवं एबी निगेटिव ग्रुप का खून नहीं है। इससे लोगों को दिक्कत हो रही है।
जिले में सिर्फ जिला मेमोरियल अस्पताल में ही एलाइजा जांच की व्यवस्था है। अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर सिर्फ किट से ही जांच होती है। ऐसे में अगर किट से हुई जांच में कोई पॉजिटिव मिलता है तो उसे दोबारा एलाइजा जांच करानी पड़ेगी। फिर इसकी पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर ही उसे डेंगू का मरीज माना जाएगा। ऐसे में मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
जिले में अब तक डेंगू के 16 मरीज मिले हैं। शुक्रवार को डेंगू का कोई नया मरीज नहीं मिला है। पॉजिटिव पाए गए डेंगू के कुछ मरीज स्वस्थ हो गए हैं। कुछ लोगों का बाहर इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रवीण कुमार का कहना है कि डेंगू के मरीजों पर नजर रखी जा रही है।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में अभी तक ब्लड सेपरेटर यूनिट नहीं शुरू हो सकी है। ऐसे में खून से प्लेटलेट्स अलग नहीं निकल पाती हैं। जबकि यहां ब्लड सेपरेटर यूनिट के लिए अलग से भवन बनकर तैयार है। जिसमें लेमिनार एयरफ्लो, डाई इलेक्ट्रिक ट्यूब सीजर व प्लाज्मा एक्सप्रेसर सहित अन्य उपकरण आ गए हैं, लेकिन डीप फ्रीजर, प्लेटलेट्स सेपरेटर, आरबीसी फ्रीजर अभी तक नहीं आए हैं।
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इन मशीनों के नहीं आने से इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। वहीं, ब्लड बैंक की फर्श भी धंस गई है। इससे रक्तदाताओं को भी परेशानी होती है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रवीण कुमार का कहना है कि यूनिट संचालन के लिए प्रयास किया जा रहा है।
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ब्लड बैंक में वर्तमान समय में ए निगेटिव ग्रुप का दो, बी पॉजिटिव का 31, ओ पॉजिटवि का 45, ओ निगेटिव का दो व एबी पॉजिटिव का नौ यूनिट रक्त उपलब्ध है। वहीं, ए पॉजिटिव, बी निगेटिव एवं एबी निगेटिव ग्रुप का खून नहीं है। इससे लोगों को दिक्कत हो रही है।
जिले में सिर्फ जिला मेमोरियल अस्पताल में ही एलाइजा जांच की व्यवस्था है। अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर सिर्फ किट से ही जांच होती है। ऐसे में अगर किट से हुई जांच में कोई पॉजिटिव मिलता है तो उसे दोबारा एलाइजा जांच करानी पड़ेगी। फिर इसकी पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर ही उसे डेंगू का मरीज माना जाएगा। ऐसे में मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
जिले में अब तक डेंगू के 16 मरीज मिले हैं। शुक्रवार को डेंगू का कोई नया मरीज नहीं मिला है। पॉजिटिव पाए गए डेंगू के कुछ मरीज स्वस्थ हो गए हैं। कुछ लोगों का बाहर इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रवीण कुमार का कहना है कि डेंगू के मरीजों पर नजर रखी जा रही है।