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मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव, घर से आ रहा खाना
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तुलसीपुर(बलरामपुर)। स्थानीय ब्लॉक के उप स्वास्थ्य केंद्र रमवापुर में सबसे ज्यादा प्रसव कराने का रिकार्ड बना हुआ है। उपकेंद्र पर प्रतिमाह 70 से 90 प्रसव कराए जाते हैं। बावजूद इसके उपस्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा है।
यहां बिजली जाने के बाद रात में मोमबत्ती के सहारे प्रसव कराया जाता है। प्रसूताओं को अस्पताल से भोजन भी नहीं दिया जाता। अस्पताल में मरीज व तीमारदारों को शुद्धपेयजल के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
तुलसीपुर ब्लॉक के ग्राम रमवापुर में उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। इस उप स्वास्थ्य केंद्र पर सबसे ज्यादा प्रसव कराने का रिकॉर्ड है। अक्तूबर माह में यहां 81 बच्चों का जन्म कराया गया तो नवंबर माह में 50 बच्चों का जन्म कराया जा चुका है।
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केंद्र के स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संविदा पर तैनात एएनएम के जिम्मे है। उप स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे तीमारदार सियाराम, राधेश्याम, रमेश व राजकरण आदि ने बताया कि केंद्र पर न तो जनरेटर लगा है न ही इन्वर्टर की व्यवस्था की गई है।
रात के समय बिजली चले जाने पर मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव कराया जाता है। प्रसव कराने के बाद स्वास्थ्य केंद्र पर व्यवस्था न होने के चलते उन्हें घर भेज दिया जाता है। गर्भवती महिलाओं को उप स्वास्थ्य केंद्र पर भोजन भी नहीं मिलता है।
बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। मेडिकल कचरा अस्पताल परिसर में इधर उधर पड़ा रहता है। जिससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना रहता है। अस्पताल में जरूरी दवाएं न मिलने के कारण मरीज बाहर से दवा खरीदने के लिए विवश होते हैं।
मरीज व तीमारदारों को शुद्ध पेयजल के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। इस संबंध में सीएचसी तुलसीपुर के अधीक्षक सुमंत सिंह चौहान ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाओं के लिए जो बजट मिलता है वह एएनएम और ग्राम प्रधान के खाते में भेज दिया जाता है।
उप स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था की जिम्मेदारी उन्हीं की है। प्रधान प्रतिनिधि तिलकराम ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले किसी भी बजट की जानकारी हमें नहीं है।
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यहां बिजली जाने के बाद रात में मोमबत्ती के सहारे प्रसव कराया जाता है। प्रसूताओं को अस्पताल से भोजन भी नहीं दिया जाता। अस्पताल में मरीज व तीमारदारों को शुद्धपेयजल के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
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तुलसीपुर ब्लॉक के ग्राम रमवापुर में उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। इस उप स्वास्थ्य केंद्र पर सबसे ज्यादा प्रसव कराने का रिकॉर्ड है। अक्तूबर माह में यहां 81 बच्चों का जन्म कराया गया तो नवंबर माह में 50 बच्चों का जन्म कराया जा चुका है।
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केंद्र के स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संविदा पर तैनात एएनएम के जिम्मे है। उप स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे तीमारदार सियाराम, राधेश्याम, रमेश व राजकरण आदि ने बताया कि केंद्र पर न तो जनरेटर लगा है न ही इन्वर्टर की व्यवस्था की गई है।
रात के समय बिजली चले जाने पर मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव कराया जाता है। प्रसव कराने के बाद स्वास्थ्य केंद्र पर व्यवस्था न होने के चलते उन्हें घर भेज दिया जाता है। गर्भवती महिलाओं को उप स्वास्थ्य केंद्र पर भोजन भी नहीं मिलता है।
बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। मेडिकल कचरा अस्पताल परिसर में इधर उधर पड़ा रहता है। जिससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना रहता है। अस्पताल में जरूरी दवाएं न मिलने के कारण मरीज बाहर से दवा खरीदने के लिए विवश होते हैं।
मरीज व तीमारदारों को शुद्ध पेयजल के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। इस संबंध में सीएचसी तुलसीपुर के अधीक्षक सुमंत सिंह चौहान ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाओं के लिए जो बजट मिलता है वह एएनएम और ग्राम प्रधान के खाते में भेज दिया जाता है।
उप स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था की जिम्मेदारी उन्हीं की है। प्रधान प्रतिनिधि तिलकराम ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले किसी भी बजट की जानकारी हमें नहीं है।