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Balrampur News: सीएमओ को अवमानना नोटिस, सात दिन में जवाब देने का आदेश
Thu, 10 Sep 2026 10:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 10 Sep 2026 10:59 PM IST
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बलरामपुर। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आदेश का समय से अनुपालन नहीं करने के मामले में जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अवमानना याचिका पर सीएमओ को नोटिस जारी करते हुए सात दिन में जवाब देने का निर्देश दिया। है। साथ ही 21 सितंबर को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट करने को कहा है कि कोर्ट के आदेश का जानबूझकर अनुपालन नहीं करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने 19 अगस्त 2026 को वीरेंद्र बहादुर सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी को विपक्षी बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 22 सितंबर 2025 को आदेश पारित किया था, लेकिन उसका निर्धारित समय में अनुपालन नहीं किया गया। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने हालांकि सीएमओ के लिए अनुपालन का विकल्प भी खुला रखा है। कोर्ट ने कहा है कि यदि 22 सितंबर 2025 के आदेश का पहले ही समय से अनुपालन किया जा चुका है तो अगली सुनवाई से पहले सक्षम अधिकारी के माध्यम से अनुपालन शपथपत्र दाखिल किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी।
कोर्ट ने पांच हजार रुपये देने का भी निर्देश दिया
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी को याची को 5,000 रुपये देने का निर्देश दिया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार यह राशि राज्य निधि से नहीं दी जाएगी। यह रकम याची को इसलिए दी जानी है क्योंकि कोर्ट के आदेश का समय से पालन नहीं होने के कारण उसे अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह क्षतिपूरक राशि है, दंडात्मक नहीं। यानी इसका उद्देश्य याची को हुई परेशानी की भरपाई करना है, अधिकारी को दंडित करना नहीं।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने 19 अगस्त 2026 को वीरेंद्र बहादुर सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी को विपक्षी बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 22 सितंबर 2025 को आदेश पारित किया था, लेकिन उसका निर्धारित समय में अनुपालन नहीं किया गया। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने हालांकि सीएमओ के लिए अनुपालन का विकल्प भी खुला रखा है। कोर्ट ने कहा है कि यदि 22 सितंबर 2025 के आदेश का पहले ही समय से अनुपालन किया जा चुका है तो अगली सुनवाई से पहले सक्षम अधिकारी के माध्यम से अनुपालन शपथपत्र दाखिल किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी।
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कोर्ट ने पांच हजार रुपये देने का भी निर्देश दिया
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी को याची को 5,000 रुपये देने का निर्देश दिया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार यह राशि राज्य निधि से नहीं दी जाएगी। यह रकम याची को इसलिए दी जानी है क्योंकि कोर्ट के आदेश का समय से पालन नहीं होने के कारण उसे अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह क्षतिपूरक राशि है, दंडात्मक नहीं। यानी इसका उद्देश्य याची को हुई परेशानी की भरपाई करना है, अधिकारी को दंडित करना नहीं।
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