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पूरे जिले में बीएसएनएल की इंटरनेट सेवा ध्वस्त
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बलरामपुर। भारत संचार निगम लिमिटेड की इंटरनेट ब्राडबैंड सेवा पूरी तरह से भगवान भरोसे है। विभागीय अफसर नदारद है। सेवा कहां से बाधित है कब ठीक होगी इसका जवाब किसी के पास नहीं है। उपभोक्ता अब दूसरे विकल्प की तलाश के लिए मजबूर हो रहे है। डीएम ने एसडीओ टेलीफोन्स के खिलाफ विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
विदित हो कि जिले में भारत संचार निगम लिमिटेड का सबसे पुराना व सबसे अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर है। विभाग के पास इंटरनेट सेवा के हजारों उपभोक्ता भी है। भारी संख्या में लोग इसका मोबाइल सिम भी उपयोग कर रहे है। बीते कुछ महीनों से बीएसएनएल की इंटरनेट सेवा पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। आए दिन इंटरनेट बाधित रहता है। विभागीय अफसर चुप्पी साधे हुए है। मुख्यालय स्थित बीएसएनएल ऑफिस में भी सन्नाटा पसरा रहता है।
एसडीओ/जेटीओ अपने दफ्तर में नहीं बल्कि फोन पर उपलब्ध रहते हैं। इंटरनेट सेवा से जुड़े सरकारी दफ्तर, बैंक व अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में अक्सर कामकाज ठप हो जाता है। सूत्रों की मानें तो एसडीओ/जेटीओ शरद यादव विगत दो महीने से दफ्तर ही नहीं आए हैं। उनसे सेवाओं की खराबी व उसके ठीक होने के बारे में पूछने पर वह फोन से एक ही जवाब देते हैं कि बाहर से दिक्कत है।
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जबकि हकीकत यह है कि बीएसएनएल के नगर स्थित कई टावर बंद हैं। ग्रामीण इलाकों में यह सेवा पूरी तरह से ध्वस्त है। शनिवार को जब जेटीओ शरद यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि गोंडा के मनकापुर में केबिल कटने से सेवा बाधित है। उनकी दफ्तर में गैर मौजूदगी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने फोन काट दिया और फोन बंद कर लिया।
डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कोरोना संकट काल में किसी भी जिम्मेदार अफसर को मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं है। एसडीओ टेलीफोन्स शरद यादव के दो महीने से अनुपस्थित होने की सूचना मिली है। बीएसएनएल के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर एसडीओ टेलीफोन्स के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
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विदित हो कि जिले में भारत संचार निगम लिमिटेड का सबसे पुराना व सबसे अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर है। विभाग के पास इंटरनेट सेवा के हजारों उपभोक्ता भी है। भारी संख्या में लोग इसका मोबाइल सिम भी उपयोग कर रहे है। बीते कुछ महीनों से बीएसएनएल की इंटरनेट सेवा पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। आए दिन इंटरनेट बाधित रहता है। विभागीय अफसर चुप्पी साधे हुए है। मुख्यालय स्थित बीएसएनएल ऑफिस में भी सन्नाटा पसरा रहता है।
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एसडीओ/जेटीओ अपने दफ्तर में नहीं बल्कि फोन पर उपलब्ध रहते हैं। इंटरनेट सेवा से जुड़े सरकारी दफ्तर, बैंक व अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में अक्सर कामकाज ठप हो जाता है। सूत्रों की मानें तो एसडीओ/जेटीओ शरद यादव विगत दो महीने से दफ्तर ही नहीं आए हैं। उनसे सेवाओं की खराबी व उसके ठीक होने के बारे में पूछने पर वह फोन से एक ही जवाब देते हैं कि बाहर से दिक्कत है।
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जबकि हकीकत यह है कि बीएसएनएल के नगर स्थित कई टावर बंद हैं। ग्रामीण इलाकों में यह सेवा पूरी तरह से ध्वस्त है। शनिवार को जब जेटीओ शरद यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि गोंडा के मनकापुर में केबिल कटने से सेवा बाधित है। उनकी दफ्तर में गैर मौजूदगी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने फोन काट दिया और फोन बंद कर लिया।
डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कोरोना संकट काल में किसी भी जिम्मेदार अफसर को मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं है। एसडीओ टेलीफोन्स शरद यादव के दो महीने से अनुपस्थित होने की सूचना मिली है। बीएसएनएल के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर एसडीओ टेलीफोन्स के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।