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थमा एंबुलेंस का चक्का, मोटरसाइकिल व ट्रैक्टर-ट्राली से अस्पताल पहुंच रहे मरीज
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बलरामपुर के जिला मेेमोरियल अस्पताल से बाइक पर बैठाकर अपनी पत्नी को घर ले जाते अजय कुमार।
- फोटो : BALRAMPUR
बलरामपुर। मांगों के प्रति सरकार की उदासीनता को लेकर एंबुलेंस कर्मियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एंबुलेंस कर्मियों ने दूसरे दिन भी चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए एंबुलेंस कर्मियों ने तुलसीपुर विधायक को ज्ञापन भी सौंपा।
एंबुलेंस कर्मियों ने मांगे पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। एंबुलेंस का चक्का जाम होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचने में काफी असुविधा झेलनी पड़ रही है। तीमारदार मरीजों को ट्रैक्टर-ट्राली व मोटरसाइकिल से अस्पताल पहुंचाने को विवश हैं।
मंगलवार को भी एंबुलेंस का चक्का जाम होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सदर ब्लाक के जुआथान निवासी अजय कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी गिरकर घायल हो गई थी। उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिला।
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उन्होंने पत्नी को मोटरसाइकिल से जिला मेेमोरियल चिकित्सालय पहुंचाया। इलाज के बाद पत्नी को बाइक से ही वापस घर ले जाना पड़ा। पीएचसी रेहरा बाजार में इलाज के लिए आई कैलाशा देवी की हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया था। एंबुलेंस उपलब्ध न होने के कारण परिजन उन्हें जिला अस्पताल नहीं पहुंचा सके।
श्रावस्ती जनपद के सर्रा गांव से बाइक पर प्रसूता को लेकर पीएचसी गुगौली कला पहुंचे अकबाल ने बताया कि एंबुलेंस न मिलने के कारण उन्हें पत्नी को बाइक पर ही लाना पड़ा।
इसी तरह हरैया ब्लाक के ग्राम भदवार निवासी आदित्य प्रसाद ने बताया कि पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर एंबुलेंस को कॉल किया गया। हड़ताल होने के कारण एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सका। एंबुलेंस न मिलने पर पत्नी को ट्रैक्टर-ट्राली से ही अस्पताल पहुंचाना पड़ा। एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल के चलते इसी तरह की समस्या जिलेभर में देखने को मिली।
बड़े परेड ग्राउंड में एंबुलेंस खड़ी करके विरोध कर रहे एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने कहा कि कोरोना काल में भी जीवन को खतरे में डालकर संक्रमित मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाले एंबुलेंस कर्मचारियों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है।
एडवांस लाइफ सपोर्ट का संचालन पहले जीवीके ईएएमआरआई के माध्यम से किया जा रहा था लेकिन सरकार ने अब इसका ठेका जिगित्सा हेल्थ लिमिटेड कंपनी को दे दिया है। नई कंपनी एंबुलेंस कर्मियों की नई भर्ती शुरु कर दी है। नई भर्ती के लिए 20 हजार रुपए का डिमांड ड्राफ्ट मांगा जा रहा है।
सेवा प्रदाता कंपनी बदलने से हम लोगों की रोजी-रोटी छिनने का खतरा बढ़ गया है। अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने ठेका प्रथा बंद किए जाने, एंबुलेंस कर्मियों की नौकरी सुरक्षित करने, 108, 102 व एएलएस के कर्मचारियों को एनएचएम में सम्मलित किए जाने, समान कार्य समान वेतन लागू किए जाने तथा कोरोनाकाल में शहीद हुए सभी एंबुलेंस कर्मियों को 50 लाख की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की।
इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ल को एंबुलेंस कर्मचारियों ने ज्ञापन भी सौंपा। विधायक ने उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। एंबुलेंस कर्मियों ने मांगे पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।
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एंबुलेंस कर्मियों ने मांगे पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। एंबुलेंस का चक्का जाम होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचने में काफी असुविधा झेलनी पड़ रही है। तीमारदार मरीजों को ट्रैक्टर-ट्राली व मोटरसाइकिल से अस्पताल पहुंचाने को विवश हैं।
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मंगलवार को भी एंबुलेंस का चक्का जाम होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सदर ब्लाक के जुआथान निवासी अजय कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी गिरकर घायल हो गई थी। उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिला।
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उन्होंने पत्नी को मोटरसाइकिल से जिला मेेमोरियल चिकित्सालय पहुंचाया। इलाज के बाद पत्नी को बाइक से ही वापस घर ले जाना पड़ा। पीएचसी रेहरा बाजार में इलाज के लिए आई कैलाशा देवी की हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया था। एंबुलेंस उपलब्ध न होने के कारण परिजन उन्हें जिला अस्पताल नहीं पहुंचा सके।
श्रावस्ती जनपद के सर्रा गांव से बाइक पर प्रसूता को लेकर पीएचसी गुगौली कला पहुंचे अकबाल ने बताया कि एंबुलेंस न मिलने के कारण उन्हें पत्नी को बाइक पर ही लाना पड़ा।
इसी तरह हरैया ब्लाक के ग्राम भदवार निवासी आदित्य प्रसाद ने बताया कि पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर एंबुलेंस को कॉल किया गया। हड़ताल होने के कारण एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सका। एंबुलेंस न मिलने पर पत्नी को ट्रैक्टर-ट्राली से ही अस्पताल पहुंचाना पड़ा। एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल के चलते इसी तरह की समस्या जिलेभर में देखने को मिली।
बड़े परेड ग्राउंड में एंबुलेंस खड़ी करके विरोध कर रहे एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने कहा कि कोरोना काल में भी जीवन को खतरे में डालकर संक्रमित मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाले एंबुलेंस कर्मचारियों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है।
एडवांस लाइफ सपोर्ट का संचालन पहले जीवीके ईएएमआरआई के माध्यम से किया जा रहा था लेकिन सरकार ने अब इसका ठेका जिगित्सा हेल्थ लिमिटेड कंपनी को दे दिया है। नई कंपनी एंबुलेंस कर्मियों की नई भर्ती शुरु कर दी है। नई भर्ती के लिए 20 हजार रुपए का डिमांड ड्राफ्ट मांगा जा रहा है।
सेवा प्रदाता कंपनी बदलने से हम लोगों की रोजी-रोटी छिनने का खतरा बढ़ गया है। अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने ठेका प्रथा बंद किए जाने, एंबुलेंस कर्मियों की नौकरी सुरक्षित करने, 108, 102 व एएलएस के कर्मचारियों को एनएचएम में सम्मलित किए जाने, समान कार्य समान वेतन लागू किए जाने तथा कोरोनाकाल में शहीद हुए सभी एंबुलेंस कर्मियों को 50 लाख की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की।
इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ल को एंबुलेंस कर्मचारियों ने ज्ञापन भी सौंपा। विधायक ने उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। एंबुलेंस कर्मियों ने मांगे पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।