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सोशल आडिट में लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई
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बलरामपुर। ग्राम पंचायतों में सोशल ऑडिट का कलेंडर शासन स्तर से निर्धारित किया जाता है। कलेंडर में निर्धारित अवधि से 15 दिन पहले डुग्गी-मुनादी व प्रचार-प्रसार कराकर ही सोशल ऑडिट की जाएगी।
योजनाओं के लाभार्थियों, श्रमिकों, कर्मचारियों व ग्रामीणों की मौजूदगी में सोशल आडिट कराई जाएगी। सोशल ऑडिट में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डीएम श्रुति व सीडीओ रिया केजरीवाल के सुझाव पर बुधवार को विकास भवन सभागार में सोशल ऑडिट का एक दिवसीय सेमिनार कराया गया।
सेमिनार को संबोधित करते हुए पीडी अनिल कुमार सिंह ने कहा कि शासन से जारी कलेंडर के अनुसार ग्राम पंचायत सचिवों व रोजगार सेवकों को सोशल आडिट के संबंध में 15 दिन पहले सूचना दी जाएगी।
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सूचना मिलने के बाद सभी ग्राम पंचायत सचिवों व रोजगार सेवकों को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, पेंशन व अन्य लाभार्थियों, काम करने वाले श्रमिकों, कर्मचारियों व ग्रामीणों की मौजूदगी में खर्च किए गए बजट की सोशल आडिट की जाएगी।
सभी ग्राम पंचायत सचिवों को सोशल आडिट करने वाली टीम को बजट खर्च करने का ब्यौरा हर हाल में उपलब्ध कराना होगा। वर्ष 2013 में मनरेगा में सोशल आडिट की व्यवस्था करके निदेशालय का गठन किया गया। ग्राम स्तर पर सोशल आडिट के लिए प्रत्येक ब्लॉक में 25 से 30 सदस्यों को रखा जाएगा।
सोशल आडिट में सभी अभिलेखों व कार्यों का सत्यापन, श्रमिकों से डोर-टू-डोर संपर्क, योजनाओं व कार्यों की जागरूकता, बैठक में प्रतिभाग करने वालों को बुलाना और दिन में ग्राम पंचायत के किसी वरिष्ठ व्यक्ति की अध्यक्षता में बैठक करना अनिवार्य है।
बैठक में ब्लॉक सोशल आडिट कोऑर्डीनेटर ने सुझाव व शिकायतें प्रस्तुत की जिसका निस्तारण कराया गया। डीडीओ गिरीश कुमार पाठक, डीसी मनरेगा महेंद्र देव पांडेय, डीसी एनआरएलएम सूबेदार सिंह यादव व डीपीआरओ नीलेश प्रताप सिंह ने सोशल आडिट करने वाली टीमों की समस्याओं का निराकरण कराया। एक दिवसीय सेमिनार में जिले के सभी नौ ब्लॉकों के बीडीओ, रोजगार सेवक व तकनीकी सहायक मौजूद रहे।
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योजनाओं के लाभार्थियों, श्रमिकों, कर्मचारियों व ग्रामीणों की मौजूदगी में सोशल आडिट कराई जाएगी। सोशल ऑडिट में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डीएम श्रुति व सीडीओ रिया केजरीवाल के सुझाव पर बुधवार को विकास भवन सभागार में सोशल ऑडिट का एक दिवसीय सेमिनार कराया गया।
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सेमिनार को संबोधित करते हुए पीडी अनिल कुमार सिंह ने कहा कि शासन से जारी कलेंडर के अनुसार ग्राम पंचायत सचिवों व रोजगार सेवकों को सोशल आडिट के संबंध में 15 दिन पहले सूचना दी जाएगी।
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सूचना मिलने के बाद सभी ग्राम पंचायत सचिवों व रोजगार सेवकों को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, पेंशन व अन्य लाभार्थियों, काम करने वाले श्रमिकों, कर्मचारियों व ग्रामीणों की मौजूदगी में खर्च किए गए बजट की सोशल आडिट की जाएगी।
सभी ग्राम पंचायत सचिवों को सोशल आडिट करने वाली टीम को बजट खर्च करने का ब्यौरा हर हाल में उपलब्ध कराना होगा। वर्ष 2013 में मनरेगा में सोशल आडिट की व्यवस्था करके निदेशालय का गठन किया गया। ग्राम स्तर पर सोशल आडिट के लिए प्रत्येक ब्लॉक में 25 से 30 सदस्यों को रखा जाएगा।
सोशल आडिट में सभी अभिलेखों व कार्यों का सत्यापन, श्रमिकों से डोर-टू-डोर संपर्क, योजनाओं व कार्यों की जागरूकता, बैठक में प्रतिभाग करने वालों को बुलाना और दिन में ग्राम पंचायत के किसी वरिष्ठ व्यक्ति की अध्यक्षता में बैठक करना अनिवार्य है।
बैठक में ब्लॉक सोशल आडिट कोऑर्डीनेटर ने सुझाव व शिकायतें प्रस्तुत की जिसका निस्तारण कराया गया। डीडीओ गिरीश कुमार पाठक, डीसी मनरेगा महेंद्र देव पांडेय, डीसी एनआरएलएम सूबेदार सिंह यादव व डीपीआरओ नीलेश प्रताप सिंह ने सोशल आडिट करने वाली टीमों की समस्याओं का निराकरण कराया। एक दिवसीय सेमिनार में जिले के सभी नौ ब्लॉकों के बीडीओ, रोजगार सेवक व तकनीकी सहायक मौजूद रहे।