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Balrampur News: नेपाल सीमा पर जल्द बनेगा ‘स्वागत द्वार’, बदलेगी पहचान
Fri, 17 Apr 2026 11:12 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 17 Apr 2026 11:12 PM IST
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फोटो-8-बलरामपुर के जरवा में बनाया जा रहा प्रवेश द्वार ।-संवाद
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जरवा। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित जरवा-कोइलाबास में बन रहा भव्य प्रवेश द्वार अब क्षेत्र की नई पहचान बनने की ओर बढ़ रहा है। निर्माण कार्य लगभग आधा पूरा हो चुका है। तेजी से चल रहे इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद यह सीमा क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण केंद्र बनेगा।
द्वार के दस स्तंभों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। अब पांच लिंटर डालने का कार्य शुरू हो गया है। यह प्रवेश द्वार पांच खंडों में तैयार किया जाएगा, जिसमें बीच का हिस्सा सबसे ऊंचा और दोनों ओर क्रमशः नीचे की ओर ढलान लिए रहेगा। यह परियोजना वर्ष 2021 में प्रस्तावित हुई थी, लेकिन वन विभाग की आपत्ति और सीमा सुरक्षा बल की चौकी हटाने को लेकर मामला लंबे समय तक अटका रहा। मार्च 2025 में संबंधित विभागों की सहमति बनने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया गया। पहले इस परियोजना की लागत 1.13 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। बाद में संशोधित प्रस्ताव के तहत लागत बढ़ाकर 1 करोड़ 23 लाख 6 हजार रुपये कर दी गई। दूसरी किस्त के रूप में 87 लाख 86 हजार रुपये मिलने के बाद निर्माण कार्य में तेजी लाई गई।
सोलर तिरंगा लाइट से जगमगाएगा द्वार
प्रवेश द्वार को आधुनिक स्वरूप देने के लिए उस पर सोलर आधारित तिरंगा लाइट लगाई जाएगी, जिससे रात में भी यह दूर से आकर्षण का केंद्र दिखाई देगा। साथ ही पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे सीमा क्षेत्र और आसपास के जंगल की निगरानी हो सकेगी। लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता कुमार शैलेंद्र के अनुसार निर्माण कार्य की लगातार निगरानी की जा रही है और इसे जुलाई माह तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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पर्यटन और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
द्वार के आसपास रंगीन इंटरलॉकिंग, फूल-पौधों की सजावट और पैदल यात्रियों के लिए विशेष मार्ग बनाया जाएगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और सीमावर्ती लोगों के कारोबार को भी नया सहारा मिलेगा। क्षेत्र के हीरालाल यादव ने बताया कि इससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
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द्वार के दस स्तंभों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। अब पांच लिंटर डालने का कार्य शुरू हो गया है। यह प्रवेश द्वार पांच खंडों में तैयार किया जाएगा, जिसमें बीच का हिस्सा सबसे ऊंचा और दोनों ओर क्रमशः नीचे की ओर ढलान लिए रहेगा। यह परियोजना वर्ष 2021 में प्रस्तावित हुई थी, लेकिन वन विभाग की आपत्ति और सीमा सुरक्षा बल की चौकी हटाने को लेकर मामला लंबे समय तक अटका रहा। मार्च 2025 में संबंधित विभागों की सहमति बनने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया गया। पहले इस परियोजना की लागत 1.13 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। बाद में संशोधित प्रस्ताव के तहत लागत बढ़ाकर 1 करोड़ 23 लाख 6 हजार रुपये कर दी गई। दूसरी किस्त के रूप में 87 लाख 86 हजार रुपये मिलने के बाद निर्माण कार्य में तेजी लाई गई।
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सोलर तिरंगा लाइट से जगमगाएगा द्वार
प्रवेश द्वार को आधुनिक स्वरूप देने के लिए उस पर सोलर आधारित तिरंगा लाइट लगाई जाएगी, जिससे रात में भी यह दूर से आकर्षण का केंद्र दिखाई देगा। साथ ही पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे सीमा क्षेत्र और आसपास के जंगल की निगरानी हो सकेगी। लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता कुमार शैलेंद्र के अनुसार निर्माण कार्य की लगातार निगरानी की जा रही है और इसे जुलाई माह तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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पर्यटन और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
द्वार के आसपास रंगीन इंटरलॉकिंग, फूल-पौधों की सजावट और पैदल यात्रियों के लिए विशेष मार्ग बनाया जाएगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और सीमावर्ती लोगों के कारोबार को भी नया सहारा मिलेगा। क्षेत्र के हीरालाल यादव ने बताया कि इससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।