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Balrampur News: बाढ़ से हर साल प्रभावित होते हैं 50 गांव
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बलरामपुर स्थित राप्ती नदी में भरा बाढ़ का पानी। (फाइल फोटो)
बलरामपुर। सिसई घाट के पास राप्ती नदी के किनारे बने तटबंध की ऊंचाई काफी कम है। इससे हर साल नदी में आई बाढ़ से आसपास के 50 से अधिक गांव प्रभावित होते हैं। घरों व खेतों में बाढ़ का पानी भरने से ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। बरसात से पहले यदि तटबंध की ऊंचाई न बढ़ाई गई तो इस बार भी गांवों में बाढ़ से तबाही मचेगी।
सदर तहसील में स्थित सिसई घाट के बाएं किनारे पर ऊंचे तटबंध का निर्माण नहीं कराया गया था। ग्रामीण शरद चंद्र, देव शरण, संत शरण, बड़कऊ, बबलू, करिया, दिनेश, मुन्नू, गोलू, रामबरन, नानबाबू व बसंतलाल ने बताया कि हर वर्ष राप्ती नदी की बाढ़ का पानी 50 से अधिक गांवों में भर जाता है। नाव की व्यवस्था न होने से बाढ़ के समय ग्रामीण घरों में कैद हो जाते हैं। बाढ़ आने पर दुर्गापुर, लालनगर, गुरचाही, सिसई, चक्कवा, शेरूपुर, कपसौरा, भिवरा, पंडरी, सद्दौपुर, डबकी, भैंसहवाडीह, कोड़री व समगरा सहित 50 गांवों में तबाही मचती है, 50 हजार से अधिक आबादी को संकटों का सामना करना पड़ता है।
खेतों में बाढ़ का पानी भरने से खरीफ की फसलें तबाह हो जाती है। धान, अरहर व उड़द के साथ गन्ने का भी नुकसान होता है। फसलों के नुकसान का किसानाें को मुआवजा भी नहीं मिलता है। बाढ़ प्रभावित सभी गांवों के लोगों को सिर्फ रबी की फसलों पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि बरसात से पहले राप्ती नदी के किनारे तटबंध की ऊंचाई बढ़ा दी जाए तो बाढ़ के कहर से ग्रामीणों को मुक्ति मिल सकती है। (संवाद)
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बाढ़ से हालात हो जाते हैं बेकाबू
राप्ती नदी की बाढ़ से आसपास के गांवों में हालात बेकाबू हो जाते हैं। वर्ष 2016 में बाढ़ के दौरान ग्राम बलुवा-बलुई के मजरा कोड़री निवासी विजयपाल की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उन्हें चारपाई पर लादकर अस्पताल ले गए थे।
भेजा गया प्रस्ताव
ग्रामीणों की मांग पर सिसई घाट के बाएं किनारे पर तटबंध की ऊंचाई बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से बजट मिलने के बाद तटबंध की ऊंचाई बढ़वाई जाएगी।
-संजय कुमार, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड
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सदर तहसील में स्थित सिसई घाट के बाएं किनारे पर ऊंचे तटबंध का निर्माण नहीं कराया गया था। ग्रामीण शरद चंद्र, देव शरण, संत शरण, बड़कऊ, बबलू, करिया, दिनेश, मुन्नू, गोलू, रामबरन, नानबाबू व बसंतलाल ने बताया कि हर वर्ष राप्ती नदी की बाढ़ का पानी 50 से अधिक गांवों में भर जाता है। नाव की व्यवस्था न होने से बाढ़ के समय ग्रामीण घरों में कैद हो जाते हैं। बाढ़ आने पर दुर्गापुर, लालनगर, गुरचाही, सिसई, चक्कवा, शेरूपुर, कपसौरा, भिवरा, पंडरी, सद्दौपुर, डबकी, भैंसहवाडीह, कोड़री व समगरा सहित 50 गांवों में तबाही मचती है, 50 हजार से अधिक आबादी को संकटों का सामना करना पड़ता है।
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खेतों में बाढ़ का पानी भरने से खरीफ की फसलें तबाह हो जाती है। धान, अरहर व उड़द के साथ गन्ने का भी नुकसान होता है। फसलों के नुकसान का किसानाें को मुआवजा भी नहीं मिलता है। बाढ़ प्रभावित सभी गांवों के लोगों को सिर्फ रबी की फसलों पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि बरसात से पहले राप्ती नदी के किनारे तटबंध की ऊंचाई बढ़ा दी जाए तो बाढ़ के कहर से ग्रामीणों को मुक्ति मिल सकती है। (संवाद)
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बाढ़ से हालात हो जाते हैं बेकाबू
राप्ती नदी की बाढ़ से आसपास के गांवों में हालात बेकाबू हो जाते हैं। वर्ष 2016 में बाढ़ के दौरान ग्राम बलुवा-बलुई के मजरा कोड़री निवासी विजयपाल की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उन्हें चारपाई पर लादकर अस्पताल ले गए थे।
भेजा गया प्रस्ताव
ग्रामीणों की मांग पर सिसई घाट के बाएं किनारे पर तटबंध की ऊंचाई बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से बजट मिलने के बाद तटबंध की ऊंचाई बढ़वाई जाएगी।
-संजय कुमार, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड