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दुष्कर्म के तीन आरोपियों को 20 साल की कैद
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दुष्कर्म के तीन आरोपियों को 20 साल का कारावास
बलरामपुर। एडीजे प्रथम ने सामूहिक दुष्कर्म के तीन आरोपियों को दोषी मानते हुए 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने आरोपियों को पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया।
देहात कोतवाली के एक गांव की महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग लड़की 28 दिसंबर 2013 को नित्यकर्म के लिए गई थी।
उसे अकेला पाकर चंदिका, गया प्रसाद व मिथलेश ने सामूहिक दुराचार किया। महिला ने थाने पर प्रार्थना पत्र दिया तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। महिला के प्रार्थना पत्र पर सीजेएम बलरामपुर के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुराचार का मुकदमा लिखा गया।
पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुराचार की धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एडीजे द्वितीय राजमणि ने चंदिका, गया प्रसाद व मिथलेश को सामूहिक दुराचार का दोषी मानते हुए 20-20 वर्ष के कारावास व पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
न्यायाधीश ने अर्थदंड की राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया है। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपियों को पांच-पांच माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
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बलरामपुर। एडीजे प्रथम ने सामूहिक दुष्कर्म के तीन आरोपियों को दोषी मानते हुए 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने आरोपियों को पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया।
देहात कोतवाली के एक गांव की महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग लड़की 28 दिसंबर 2013 को नित्यकर्म के लिए गई थी।
उसे अकेला पाकर चंदिका, गया प्रसाद व मिथलेश ने सामूहिक दुराचार किया। महिला ने थाने पर प्रार्थना पत्र दिया तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। महिला के प्रार्थना पत्र पर सीजेएम बलरामपुर के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुराचार का मुकदमा लिखा गया।
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पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुराचार की धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एडीजे द्वितीय राजमणि ने चंदिका, गया प्रसाद व मिथलेश को सामूहिक दुराचार का दोषी मानते हुए 20-20 वर्ष के कारावास व पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
न्यायाधीश ने अर्थदंड की राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया है। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपियों को पांच-पांच माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।