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डेढ़ लाख लोगों को मिलेगी चक्कर काटने से निजात
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बलरामपुर के चोरघटा घाट पुल के बगल बने मिट्टी की पुलिया से आवागमन करते लोग।
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। तीन पड़ोसी जिलों को जोड़ने वाले कुआनों नदी के पुल का निर्माण कार्य सात साल बाद शुरू हो गया है। इस पुल का निर्माण 98 लाख रुपये की लागत से होगा। पुल का संचालन होने पर तीन जिलों के लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी। तीनों जिलों के डेढ़ लाख लोगों को चक्कर काटने से निजात मिल जाएगी।
बलरामपुर, गोंडा व सिद्धार्थनगर जिले को जोड़ने वाले कुआनों नदी के चोरघटा घाट पर पुल का निर्माण सात साल बाद फिर से शुरू हो गया है। पुल का निर्माण कराने के लिए शासन ने कार्यदायी संस्था को 98 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की है। इस पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2014 में शुरू किया गया था लेकिन बजट न मिलने से कार्यदायी संस्था पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं करा सकी थी।
निर्माण न होने से स्थानीय लोगों ने लकड़ी का जुगाड़ वाले पुल को तैयार किया। इसी लकड़ी के पुल से तीन जिलों के पैदल, साइकिल व दो पहिया के लोगों को आना जाना पड़ रहा था। चार पहिया वाहन वालों को 15 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है।
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क्षेत्रवासी वीरेंद्र सिंह, शिवराम मिश्र, हसन मोहम्मद व अंसार अहमद आदि ने खुशी जताते हुए कहा कि पुल का संचालन शुरू होने के बाद तीन जिलों के लोगों को सुरक्षित यात्रा करने का लाभ मिलेगा। समय की बचत होगी। बरसात के दिनों में नाव से नदी पार करने के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा।
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बलरामपुर, गोंडा व सिद्धार्थनगर जिले को जोड़ने वाले कुआनों नदी के चोरघटा घाट पर पुल का निर्माण सात साल बाद फिर से शुरू हो गया है। पुल का निर्माण कराने के लिए शासन ने कार्यदायी संस्था को 98 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की है। इस पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2014 में शुरू किया गया था लेकिन बजट न मिलने से कार्यदायी संस्था पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं करा सकी थी।
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निर्माण न होने से स्थानीय लोगों ने लकड़ी का जुगाड़ वाले पुल को तैयार किया। इसी लकड़ी के पुल से तीन जिलों के पैदल, साइकिल व दो पहिया के लोगों को आना जाना पड़ रहा था। चार पहिया वाहन वालों को 15 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है।
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क्षेत्रवासी वीरेंद्र सिंह, शिवराम मिश्र, हसन मोहम्मद व अंसार अहमद आदि ने खुशी जताते हुए कहा कि पुल का संचालन शुरू होने के बाद तीन जिलों के लोगों को सुरक्षित यात्रा करने का लाभ मिलेगा। समय की बचत होगी। बरसात के दिनों में नाव से नदी पार करने के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा।