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Ballia News: साल भर बाद शुरू हुआ काम, बारिश में फिर से बंद
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मझौवां। गंगा के तटवर्ती इलाकों में सालभर से अधर में लटका कटानरोधी कार्य अंततः प्रारंभ हुआ तो बारिश के कारण तीन दिनों से बाधित है।
तटवर्ती इलाकों के सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की, उपाध्याय टोला सहित अन्य गांवों के हजारों लोग इसे लेकर चिंतित हैं। हुकुम छपरा में राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के सुरक्षा के लिए 5 करोड़ 5 लाख रुपये से एक स्पर का निर्माण चल रहा है, जो 50 फीसदी भी पूरा नहीं हो सका है। रामगढ़ में एनएच-31 के बचाव हेतु 27.500 से 27.950 के बीच 8 करोड़ 30 लाख 59 हजार की लागत से चार कटर का निर्माण कार्य चल रहा है। वह बारिश की वजह से अधूरी पड़ी है। चारों डैंपनर (कटर) के बीच गैप में परक्यूपाइन विधि के अनुसार नदी के किनारे त्रिभुज के आकार में पिलर जैसे-तैसे खड़ाकर के छोड़ दिया गया है।
बाढ़ विभाग 60 प्रतिशत कार्य पूरा करने का दावा कर रहा है। कटानरोधी कार्य पूरा नहीं हुआ तो आधा दर्जन गांव के साथ ही कई सरकारी सम्पत्ति भी गंगा के टारगेट पर आएगी। जिसमें अमर नाथ मिश्र पीजी कॉलेज दूबे छपरा, पीएन इण्टर दुबेछपरा, बालिका विद्यालय दूबे छपरा, प्राथमिक विद्यालय दूबे छपरा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उदई छपरा, ओवर हैंड टैंक उदई छपरा गंगा नदी से महज 100 मीटर की दूरी पर हैं। बालिका इण्टर कालेज दूबे छपरा की दूरी करीब 30 मीटर और चार प्राथमिक विद्यालयों में से एक विद्यालय 50 मीटर की दूरी पर हैं।
हर बार ध्वस्त हुआ कटानरोधी कार्य : अब तक कटानरोधी कार्य में शायद ही ऐसा कोई होगा जो आपदा के वक्त धराशायी या क्षतिग्रस्त नहीं हुआ हो। जांच पड़ताल की बात भी बहुत हुई लेकिन आज तक कभी भी कोई टेक्निकल जांच नहीं हुई।
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हर बार जिम्मेदार अपने किए गए कार्य पर पर्दा डालने में सफल रहे। चहेते फर्म से हल्का लो-रेटिंग टेंडर डलवाकर कार्य का आवंटन कर दिया जाता है जिसमें प्रक्रिया पर किसी प्रकार की उंगली न उठ सके।
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तटवर्ती इलाकों के सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की, उपाध्याय टोला सहित अन्य गांवों के हजारों लोग इसे लेकर चिंतित हैं। हुकुम छपरा में राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के सुरक्षा के लिए 5 करोड़ 5 लाख रुपये से एक स्पर का निर्माण चल रहा है, जो 50 फीसदी भी पूरा नहीं हो सका है। रामगढ़ में एनएच-31 के बचाव हेतु 27.500 से 27.950 के बीच 8 करोड़ 30 लाख 59 हजार की लागत से चार कटर का निर्माण कार्य चल रहा है। वह बारिश की वजह से अधूरी पड़ी है। चारों डैंपनर (कटर) के बीच गैप में परक्यूपाइन विधि के अनुसार नदी के किनारे त्रिभुज के आकार में पिलर जैसे-तैसे खड़ाकर के छोड़ दिया गया है।
बाढ़ विभाग 60 प्रतिशत कार्य पूरा करने का दावा कर रहा है। कटानरोधी कार्य पूरा नहीं हुआ तो आधा दर्जन गांव के साथ ही कई सरकारी सम्पत्ति भी गंगा के टारगेट पर आएगी। जिसमें अमर नाथ मिश्र पीजी कॉलेज दूबे छपरा, पीएन इण्टर दुबेछपरा, बालिका विद्यालय दूबे छपरा, प्राथमिक विद्यालय दूबे छपरा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उदई छपरा, ओवर हैंड टैंक उदई छपरा गंगा नदी से महज 100 मीटर की दूरी पर हैं। बालिका इण्टर कालेज दूबे छपरा की दूरी करीब 30 मीटर और चार प्राथमिक विद्यालयों में से एक विद्यालय 50 मीटर की दूरी पर हैं।
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हर बार ध्वस्त हुआ कटानरोधी कार्य : अब तक कटानरोधी कार्य में शायद ही ऐसा कोई होगा जो आपदा के वक्त धराशायी या क्षतिग्रस्त नहीं हुआ हो। जांच पड़ताल की बात भी बहुत हुई लेकिन आज तक कभी भी कोई टेक्निकल जांच नहीं हुई।
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हर बार जिम्मेदार अपने किए गए कार्य पर पर्दा डालने में सफल रहे। चहेते फर्म से हल्का लो-रेटिंग टेंडर डलवाकर कार्य का आवंटन कर दिया जाता है जिसमें प्रक्रिया पर किसी प्रकार की उंगली न उठ सके।