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महिलाओं का दर्द सुन दिलाया भरोसा
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Wed, 03 Jun 2015 11:57 PM IST
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राज्य महिला आयोग की सदस्य डा. सुमित्रा यादव ने नगर स्थित लोक निर्माण विभाग के डाकबंगले में गुरुवार को महिलाओं की समस्याओं को सुना। इसके बाद जिला कारागार में निरुद्ध महिला कैदियों की समस्याओं को जाना। बाद में बालिका निकेतन केंद्र निधरिया पहुंचीं और संवासिनियों को दी जाने वाली व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। इस दौरान कमियों और शिकायतों पर अफसरों को निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी एके पांडेय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
डा. यादव ने डाकबंगले में महिलाओं की समस्या सुनने और प्रशासनिक लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए कहा कि अधिकारी महिलाओं की समस्या प्राथमिकता के आधार पर सुनें। महिलाओं की समस्याओं के निस्तारण में लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। इसके बाद डा. यादव जिला कारागार में गईं और महिला बंदियों से बातचीत की। महिला बंदियों की समस्याओं को सुनने के बाद निस्तारण के निर्देश दिए।
पिछले दिनों बालिका गृह निधरिया में उत्पात पर बालिकाओं से भी पूछताछ की। इस पर संवासिनियों ने अपनी पीड़ा उनके सामने रखीं। वहां की व्यवस्था को देखने के बाद संतोष जताया। उन्होंने बालिका निकेतन में रसोई घर, शयनकक्ष सहित हर व्यवस्था को खुद चेक किया। जिला प्रोबेशन एके पांडेय को निर्देशित किया कि जो बालिकाएं बालिग हो गई हैं। उन्हें यहां से भेजने की कार्यवाही शुरू कर दी जाए। नाबालिग बच्चियों को संभव हो तो उनके घर भेजवाने की व्यवस्था करें।
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डा. यादव ने डाकबंगले में महिलाओं की समस्या सुनने और प्रशासनिक लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए कहा कि अधिकारी महिलाओं की समस्या प्राथमिकता के आधार पर सुनें। महिलाओं की समस्याओं के निस्तारण में लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। इसके बाद डा. यादव जिला कारागार में गईं और महिला बंदियों से बातचीत की। महिला बंदियों की समस्याओं को सुनने के बाद निस्तारण के निर्देश दिए।
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पिछले दिनों बालिका गृह निधरिया में उत्पात पर बालिकाओं से भी पूछताछ की। इस पर संवासिनियों ने अपनी पीड़ा उनके सामने रखीं। वहां की व्यवस्था को देखने के बाद संतोष जताया। उन्होंने बालिका निकेतन में रसोई घर, शयनकक्ष सहित हर व्यवस्था को खुद चेक किया। जिला प्रोबेशन एके पांडेय को निर्देशित किया कि जो बालिकाएं बालिग हो गई हैं। उन्हें यहां से भेजने की कार्यवाही शुरू कर दी जाए। नाबालिग बच्चियों को संभव हो तो उनके घर भेजवाने की व्यवस्था करें।
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