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गर्मी के साथ बढ़ेगी पानी की किल्लत

Mon, 02 Apr 2018 11:05 PM IST
ballia
ballia Updated Mon, 02 Apr 2018 11:05 PM IST
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Water will decrease with heat
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गर्मी आने के साथ ही पानी की किल्लत शुरू हो गई है। इसकी प्रमुख वजह जलस्तर में गिरावट आना है। जिम्मेदार लोगों के समस्या से मुंह मोड़ने के कारण इस बार भी स्थिति विकट हो सकती है। जिले में एक ब्लाक को क्रिटिकल जोन में माना गया है। इस इलाके के जलस्तर को बचाने के लिए भूमि संरक्षण विभाग की ओर से कवायद शुरू कर दी गई है और अन्य योजनाओं के संचालन के लिए 10 करोड़ 57 लाख का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। इसके अलावा भू-गर्म विभाग की ओर से रसड़ा क्षेत्र में दो बड़े जलागम क्षेत्र (वाटरशेड) बनाने की संस्तुति की गई है।
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गर्मी आते ही जिले के कई इलाकों में भूगर्भ जलस्तर गिरने लगा है। इसके चलते कई इलाकों में हैंडपंपों से पानी कम आने लगा है और कहीं-कहीं नलकूप भी पानी छोड़ने लगे हैं। पिछले सालों से गिरते जलस्तर को देखते हुए इसे बचाने की कवायद शुरू हो चुकी है।
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भूगर्भ विभाग की ओर से समय-समय पर भू जलस्तर को मापने का काम किया जाता है। जिले में कुल 17 ब्लाक हैं। भूगर्भ विभाग के जिले में औसत जलस्तर प्री मानसून न्यूनतम 7.20 मी. व अधिकतम 8.10 मी. तथा पोस्ट मानसून न्यूनतम 7.05 व अधिकतम 8.75 मापा गया है। विभाग का मानना है कि इस आंकड़े के आधार पर जिले में गर्मी के दिनों में औसत एक से डेढ़ मीटर तक जलस्तर खिसकता है। पिछले 10 सालों से लगातार जनपद के 16 ब्लाकों में एक से 10 सेमी जलस्तर प्रतिवर्ष कम हो रहा है तो रसड़ा ब्लाक में 20 से 30 सेमी प्रतिवर्ष जलस्तर कम हो रहा है। इसके आधार पर ही रसड़ा ब्लॉक क्षेत्र को भूगर्भ वृिभाग ने इसे क्रिटिकल जोन घोषित कर दिया है।
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रसड़ा क्षेत्र में भू जलस्तर बचाने के लिए भूगर्भ विभाग की ओर से कुल 203.63 वर्ग किमी में दो बड़े वाटरशेड बनाने की संस्तुति की गई है। इसके अलावा क्रिटिकल क्षेत्र रसड़ा में भूमि संरक्षण विभाग की ओर से खेत तालाब योजना के तहत 11 लाख 55 की लागत से कुल 22 तालाबों की खुदाई कराई गई है। 10 लाख 50 हजार की लागत से 15 किसानों को स्प्रिंकलर सेट वितरित करने के लिए चयनित किया गया है। भूमि संरक्षण अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2017-18 में शुरु हुई पं. दीन दयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के तहत मिले 16 लाख के सापेक्ष करीब चार लाख की लागत से मेड़बंदी व वृक्षारोपण कार्य कराया गया है ताकि भूमि संरक्षण के साथ जल संचयन भी हो सके।
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