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Ballia News: ग्रामीणों का हंगामा, ईसी बैग में 24 की जगह भरी जा रहीं 15 बोरियां
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मझौंवा क्षेत्र के नौरंगा में चल रहे कटानरोधी कार्य में मानक की अनदेखी के विरोध में प्रदर्शन करत
- फोटो : सांकेतिक
मझौवां। गंगा नदी की कटान से क्षेत्र के 41 गांवों को सुरक्षित करने के लिए 44.8 करोड़ रुपये से चल रही तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं में मानकों की अनदेखी का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। नौरंगा भुआल छपरा में ग्रामीणों ने कार्यस्थल पर सोमवार को हंगामा करते हुए बाढ़ विभाग और ठेकेदारों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि कटान रोकने के लिए ईसी बैग में 24 की जगह 15 बोरियां ही भरी जा रही हैं। राजमंगल ठाकुर, संजय ठाकुर और अभिनंदन ठाकुर ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और धीमी रफ्तार पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक जाली में 50 किलो वजन की 24 बोरियां भरी जानी चाहिए, लेकिन मौके पर महज 15 बोरियां ही डाली जा रही हैं। इनमें बालू भरा रहता है।
इसी तरह जियो बैग के गैबियन में 18 बोरियों की जगह मात्र 12 बोरियां ही भरी जा रही हैं। मानकों के विपरीत बोरियों में बालू के स्थान पर मिट्टी भरी जा रही है, जो पानी में गिरते ही बह जा रही है। साथ ही चार सिलाई की जगह केवल दो सिलाई की जा रही है और मौके पर वजन मापने की कोई मशीन तक मौजूद नहीं है।
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ग्रामीणों का दावा है कि तीनों परियोजनाओं का अब तक 5 प्रतिशत कार्य भी जमीन पर नहीं दिख रहा है, जबकि बाढ़ विभाग 15 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने का दावा कर रहा है।
ग्रामीण अखिलेश ठाकुर, शशि प्रकाश ठाकुर और लकड़ी मिश्र ने आशंका जताई कि मानसून आने में महज 28 दिन शेष हैं, लेकिन विभाग अभी तक केवल मिट्टी समतल करने और खानापूर्ति में उलझा हुआ है।
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उन्होंने बताया कि प्रत्येक जाली में 50 किलो वजन की 24 बोरियां भरी जानी चाहिए, लेकिन मौके पर महज 15 बोरियां ही डाली जा रही हैं। इनमें बालू भरा रहता है।
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इसी तरह जियो बैग के गैबियन में 18 बोरियों की जगह मात्र 12 बोरियां ही भरी जा रही हैं। मानकों के विपरीत बोरियों में बालू के स्थान पर मिट्टी भरी जा रही है, जो पानी में गिरते ही बह जा रही है। साथ ही चार सिलाई की जगह केवल दो सिलाई की जा रही है और मौके पर वजन मापने की कोई मशीन तक मौजूद नहीं है।
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ग्रामीणों का दावा है कि तीनों परियोजनाओं का अब तक 5 प्रतिशत कार्य भी जमीन पर नहीं दिख रहा है, जबकि बाढ़ विभाग 15 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने का दावा कर रहा है।
ग्रामीण अखिलेश ठाकुर, शशि प्रकाश ठाकुर और लकड़ी मिश्र ने आशंका जताई कि मानसून आने में महज 28 दिन शेष हैं, लेकिन विभाग अभी तक केवल मिट्टी समतल करने और खानापूर्ति में उलझा हुआ है।