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तुर्तीपार रेगुलेटर का फाटक खुला, फिर नदी में नहीं जा रहा पानी
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बेल्थरारोड। सरयू नदी का उफान जारी है। खतरे के निशान से 1.05 मीटर ऊपर बहने वाली नदी ने रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती बाशिंदों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ताल से जुड़े खेत-खलिहान पानी में डूब गए हैं। तुर्तीपार रेगुलेटर का फाटक खुलने के बाद भी ताल का पानी में नदी में नहीं जा रहा है। कटान तेज हो गया है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बृहस्पतिवार को अपराह्न जलस्तर 65.06 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो लाल निशान 64.01 मीटर से 1.05 मीटर अधिक है। आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। अगले 24 घंटे में जलस्तर में वृद्धि जारी रहने का पूर्वानुमान किया है। इसको लेकर तटवर्ती क्षेत्रों में खलबली है। नदी का तेवर उग्र होने से ग्रामीण क्षेत्रों में घरों तक पानी पहुंच गया है। कोईली मोहान ताल और गौरी ताल घोसा के आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चैनपुर, गुलौरा, टगुनिया के पास ठोकर बनाए गए हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त कई स्थानों पर कटान हो रहा है। कृषि योग्य भूमि का कट- कट कर नदी की जलधारा में समाहित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी और टीएस बंधे के बीच बसे गांवों का अस्तित्व बचाने के लिए ठोकर निर्माण जरूरी है। गावों में पशुओं के रखरखाव और चारे की व्यवस्था करना पशुपालकों के लिए परेशानी का सबब बनी है। बाढ़ के पानी से सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो बर्बाद हो गई है।
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केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बृहस्पतिवार को अपराह्न जलस्तर 65.06 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो लाल निशान 64.01 मीटर से 1.05 मीटर अधिक है। आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। अगले 24 घंटे में जलस्तर में वृद्धि जारी रहने का पूर्वानुमान किया है। इसको लेकर तटवर्ती क्षेत्रों में खलबली है। नदी का तेवर उग्र होने से ग्रामीण क्षेत्रों में घरों तक पानी पहुंच गया है। कोईली मोहान ताल और गौरी ताल घोसा के आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चैनपुर, गुलौरा, टगुनिया के पास ठोकर बनाए गए हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त कई स्थानों पर कटान हो रहा है। कृषि योग्य भूमि का कट- कट कर नदी की जलधारा में समाहित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी और टीएस बंधे के बीच बसे गांवों का अस्तित्व बचाने के लिए ठोकर निर्माण जरूरी है। गावों में पशुओं के रखरखाव और चारे की व्यवस्था करना पशुपालकों के लिए परेशानी का सबब बनी है। बाढ़ के पानी से सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो बर्बाद हो गई है।
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