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हर ओर तिलवा-गुड़ की महक
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Tue, 13 Jan 2015 11:08 PM IST
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सामाजिक समरसता का पर्व मकर संक्रांति जिले में इस बार 15 जनवरी को पूरे दिन मनाया जाएगा। कालचक्रों की गणना के मुताबिक 14 जनवरी की रात से मकर संक्रांति का पर्व शुरू हो रहा है।
इसके मद्देनजर बाजारों में भी चूड़ा, तिलकुट और लाई की दूकानों पर खरीदारों की भीड़ देखी गई। बाजार खरीदारों से अटा रहा।
ज्योतिषाचार्य पंडित अभय शंकर द्विवेदी बताते हैं कि मकर राशि में सूर्य 14 जनवरी बुधवार की रात में एक बजकर 20 मिनट के बाद प्रवेश करेंगे।
इसलिए मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी गुरुवार को माना जाएगा। स्नान, दान के साथ खिचड़ी का पर्व पूरे जिले में विभिन्न परंपराओं और मान्यताओं के साथ मनाया जाएगा। इसी पर्व के साथ खरमाश भी समाप्त हो जाएगा। इसके बाद शुभ मुहूर्त शुरू हो जाने से वैवाहिक और मांगलिक कार्यक्रम हो सकेंगे।
मकर संक्रांति के दिन गंगा सागर, इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम तथा काशी और भृगु नगरी में स्नान की विशेष महत्ता है। इस दिन स्नान के बाद श्रद्धालु तिल, गुड़ से बना तिलवा, चावल, कंबल, जूता, वस्त्र सहित गाय आदि का दान अपने सामर्थ्य के मुताबिक करते हैं।
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हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। इससे छह माह तक देवताओं का दिन माना जाता है। यह सामाजिक समरसता का पर्व है। इसीलिए इस पर्व के दिन खाने तथा दानपुण्य वाले पदार्थों में विभिन्नता होती है।
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इसके मद्देनजर बाजारों में भी चूड़ा, तिलकुट और लाई की दूकानों पर खरीदारों की भीड़ देखी गई। बाजार खरीदारों से अटा रहा।
ज्योतिषाचार्य पंडित अभय शंकर द्विवेदी बताते हैं कि मकर राशि में सूर्य 14 जनवरी बुधवार की रात में एक बजकर 20 मिनट के बाद प्रवेश करेंगे।
इसलिए मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी गुरुवार को माना जाएगा। स्नान, दान के साथ खिचड़ी का पर्व पूरे जिले में विभिन्न परंपराओं और मान्यताओं के साथ मनाया जाएगा। इसी पर्व के साथ खरमाश भी समाप्त हो जाएगा। इसके बाद शुभ मुहूर्त शुरू हो जाने से वैवाहिक और मांगलिक कार्यक्रम हो सकेंगे।
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मकर संक्रांति के दिन गंगा सागर, इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम तथा काशी और भृगु नगरी में स्नान की विशेष महत्ता है। इस दिन स्नान के बाद श्रद्धालु तिल, गुड़ से बना तिलवा, चावल, कंबल, जूता, वस्त्र सहित गाय आदि का दान अपने सामर्थ्य के मुताबिक करते हैं।
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हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। इससे छह माह तक देवताओं का दिन माना जाता है। यह सामाजिक समरसता का पर्व है। इसीलिए इस पर्व के दिन खाने तथा दानपुण्य वाले पदार्थों में विभिन्नता होती है।