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आठ साल से बंधे पर गुजर बसर कर रहे 25 कटान पीड़ित परिवार
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जयप्रकाशनगर वर्ष 2013 में सरयू की बाढ़ ने तबाही मचाई थी। इसमें सिताबदियारा के इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगांवा) पर इस कदर कहर बरपाया की अठगांवा से यह पंचायत पंचगावा में तब्दील हो गया। गांव के तीन पुरवे के कुल 350 परिवारों को बेघर कर दिया जो उसी समय बकुल्हा संसार टोला बांध पर शरण लिए हैं।
कुछ सक्षम कटान पीड़ित अपने पैसे से जमीन खरीदकर बस गए तो कुछ कटान पीड़ितों को सरकार ने पट्टा दिया लेकिन आज भी उसे कब्जा नहीं मिल सका। हालांकि इसमें कुछ सक्षम कटान पीड़ित अपने पैसे से जमीन खरीदकर बस गए तो कुछ कटान पीड़ितों को सरकार ने पट्टा देकर बसा दिया। करीब 25 परिवार आज भी बंधे पर गुजर बसर करने को विवश हैं। इन सभी कटान पीड़ितों को 22 अगस्त 2017 को तहसील प्रशासन द्वास पट्टा कर इन्हें उसका प्रमाण पत्र भी दे दिया गया जो आज तक उनके पास उपलब्ध है। लेकिन इन्हें तहसील प्रशासन आज तक पट्टा की गई भूमि पर कब्जा नहीं दिला सकी। आलम यह है कि अक्सर आंधी तूफान से इन कटान पीड़ितों का आशियाना क्षतिग्रस्त होता है और यह कटान पीड़ित परिवार के साथ खुले आसमान के नीचे भी रहने को विवश होते हैं। फिर किसी प्रकार उसका मरम्मत करते हैं।
सरकार हमलोगों के साथ नाइंसाफी करती चली आ रही है जिसका खामियाजा है कि हम वर्षों से बकुल्हा संसार टोला बांध पर शरण लेने को विवश हैं। कभी मड़हे में तो आंधी तूफान आने पर कभी खुले आसमान के नीचे भी रहना पड़ता है।
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- मदन चौधरी
हम लोगों पर सरयू मईया की नजर टेढ़ी हुई और अपना सब कुछ गवांकर इस बंधे पर वर्षो पूर्व से गुजर बसर कर रहे हैं। उम्मीद थी कि सरकार हमारे साथ ऐसा अन्याय नहीं करेगी लेकिन अब सब्र का बांध टूटता चला जा रहा है।
- अभिषेक कुमार
सरयू नदी ने हम लोगों को बेघर कर दिया। जिससे बहुत ही कष्टदायक जीवन बकुल्हा संसार टोला बांध पर काटते चले आ रहे थे। तहसील प्रशासन ने 2017 में पट्टे का प्रमाण पत्र दने के बाद अभी तक भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी।
- मनीष कुमार चौधरी
सरयू नदी ने पूरवे पर जो कहर बरपाया वह दिन जब याद आते हैं तो रूह कांप जाती है। लेकिन हम लोग उससे भी खराब जीवन आज बंधे पर काट रहे हैं। तमाम नेता आए और आश्वासन के बाद भी हम मौसम की मार झेलते हुए बंधे पर हैं।
- शिवनाथ पासवान
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कुछ सक्षम कटान पीड़ित अपने पैसे से जमीन खरीदकर बस गए तो कुछ कटान पीड़ितों को सरकार ने पट्टा दिया लेकिन आज भी उसे कब्जा नहीं मिल सका। हालांकि इसमें कुछ सक्षम कटान पीड़ित अपने पैसे से जमीन खरीदकर बस गए तो कुछ कटान पीड़ितों को सरकार ने पट्टा देकर बसा दिया। करीब 25 परिवार आज भी बंधे पर गुजर बसर करने को विवश हैं। इन सभी कटान पीड़ितों को 22 अगस्त 2017 को तहसील प्रशासन द्वास पट्टा कर इन्हें उसका प्रमाण पत्र भी दे दिया गया जो आज तक उनके पास उपलब्ध है। लेकिन इन्हें तहसील प्रशासन आज तक पट्टा की गई भूमि पर कब्जा नहीं दिला सकी। आलम यह है कि अक्सर आंधी तूफान से इन कटान पीड़ितों का आशियाना क्षतिग्रस्त होता है और यह कटान पीड़ित परिवार के साथ खुले आसमान के नीचे भी रहने को विवश होते हैं। फिर किसी प्रकार उसका मरम्मत करते हैं।
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सरकार हमलोगों के साथ नाइंसाफी करती चली आ रही है जिसका खामियाजा है कि हम वर्षों से बकुल्हा संसार टोला बांध पर शरण लेने को विवश हैं। कभी मड़हे में तो आंधी तूफान आने पर कभी खुले आसमान के नीचे भी रहना पड़ता है।
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- मदन चौधरी
हम लोगों पर सरयू मईया की नजर टेढ़ी हुई और अपना सब कुछ गवांकर इस बंधे पर वर्षो पूर्व से गुजर बसर कर रहे हैं। उम्मीद थी कि सरकार हमारे साथ ऐसा अन्याय नहीं करेगी लेकिन अब सब्र का बांध टूटता चला जा रहा है।
- अभिषेक कुमार
सरयू नदी ने हम लोगों को बेघर कर दिया। जिससे बहुत ही कष्टदायक जीवन बकुल्हा संसार टोला बांध पर काटते चले आ रहे थे। तहसील प्रशासन ने 2017 में पट्टे का प्रमाण पत्र दने के बाद अभी तक भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी।
- मनीष कुमार चौधरी
सरयू नदी ने पूरवे पर जो कहर बरपाया वह दिन जब याद आते हैं तो रूह कांप जाती है। लेकिन हम लोग उससे भी खराब जीवन आज बंधे पर काट रहे हैं। तमाम नेता आए और आश्वासन के बाद भी हम मौसम की मार झेलते हुए बंधे पर हैं।
- शिवनाथ पासवान