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Ballia News: बालरोग विशेषज्ञ नहीं, बलिया और मऊ जाते हैं लोग
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चौकियामोड़। जिला मुख्यालय से 60 किमी दूर सीएचसी सीयर में एक दशक से शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इससे क्षेत्र के करीब 35 हजार लोग बच्चों का इलाज कराने के लिए भटकते हैं। लोगों को बेहतर इलाज के लिए 60 किमी दूरी जिला अस्पताल या मऊ जिले के सरकारी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज आते हैं। इसमें 100 से ज्यादा बच्चे होते हैं। जिले के अलावे पड़ोस के मऊ जिले के बेलौली, रामपुर, निधियाव, कमल सागर, कंधरापुर, अहिरूपुर, गजियापुर, लौवासाथ एवं देवरिया जिले के भागलपुर, पिंडी, लार रोड तक के मरीज आते हैं। क्षेत्र का मुख्य जच्चा बच्चा केंद्र होने के नाते यहां बच्चों के टीकाकरण व इलाज के लिए भी काफी भीड़ होती है। प्रसव के बाद नवजात शिशुओं की हालत खराब होने पर कोई चिकित्सक नहीं मिलता है। जिला अस्पताल की दूरी ज्यादा होने के कारण बलिया आने की जगह परिजन कस्बे में निजी अस्पताल व क्लिनिक में जाते हैं। पिछले वर्ष कस्बे में संचालित दो अस्पतालों के एसएनसीयू वार्ड में नवजात बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें सील किया था, लेकिन बाद में फिर संचालन होने लगा।
सलेमपुर के सांसद रमाशंकर राजभर के अलावा क्षेत्रीय विधायक हंसु राम सीएचसी पर इलाज की व्यवस्था को लेकर सदन के माध्यम से शासन को अवगत करा चुके है। उसके बावजूद अब तक कोई सुधार नहीं हुआ।
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सीएचसी पर दो महिला व दो पुरुष एवं संविदा चिकित्सकों की तैनाती है। शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ की मांग की गई है। आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा देने का प्रयास किया जाता है। - डॉ. राकेश कुमार सिंह, सीएचसी अधीक्षक, सीयर।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज आते हैं। इसमें 100 से ज्यादा बच्चे होते हैं। जिले के अलावे पड़ोस के मऊ जिले के बेलौली, रामपुर, निधियाव, कमल सागर, कंधरापुर, अहिरूपुर, गजियापुर, लौवासाथ एवं देवरिया जिले के भागलपुर, पिंडी, लार रोड तक के मरीज आते हैं। क्षेत्र का मुख्य जच्चा बच्चा केंद्र होने के नाते यहां बच्चों के टीकाकरण व इलाज के लिए भी काफी भीड़ होती है। प्रसव के बाद नवजात शिशुओं की हालत खराब होने पर कोई चिकित्सक नहीं मिलता है। जिला अस्पताल की दूरी ज्यादा होने के कारण बलिया आने की जगह परिजन कस्बे में निजी अस्पताल व क्लिनिक में जाते हैं। पिछले वर्ष कस्बे में संचालित दो अस्पतालों के एसएनसीयू वार्ड में नवजात बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें सील किया था, लेकिन बाद में फिर संचालन होने लगा।
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सलेमपुर के सांसद रमाशंकर राजभर के अलावा क्षेत्रीय विधायक हंसु राम सीएचसी पर इलाज की व्यवस्था को लेकर सदन के माध्यम से शासन को अवगत करा चुके है। उसके बावजूद अब तक कोई सुधार नहीं हुआ।
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सीएचसी पर दो महिला व दो पुरुष एवं संविदा चिकित्सकों की तैनाती है। शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ की मांग की गई है। आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा देने का प्रयास किया जाता है। - डॉ. राकेश कुमार सिंह, सीएचसी अधीक्षक, सीयर।