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एनएच 31 के पुनर्निमाण की जगी आस, शुरु हुई टेंडर प्रक्रिया

Tue, 14 Dec 2021 11:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Dec 2021 11:15 PM IST
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There is hope for the reconstruction of NH 31, the tender process started
बलिया। एनएच 31 के पुनर्निर्माण को लेकर एनएचएआई ने कवायद तेज कर दी है। टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और टेक्निकल टेंडर खुलने लगे हैं। इसके बाद फाइनेंशियल टेंडर खुलेगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग तीन पैकेज में कार्य शुरू कराने के प्रयास में है। पिछले सात वर्षों से एनएच 31 की दशा बेहाल है जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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एनएच 31 के पुनर्निर्माण की अब आस जगने लगी है। एनएचएआइ ने गाजीपुर से बलिया के मांझी घाट तक की 130 किमी दूरी के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सोमवार से एनएचएआई में टेक्निकल टेंडर खुलने शुरू हो गए हैं। हालांकि अभी इसके बाद फाइनेंशियल टेंडर खुलने हैं। इसके बाद चयनित एजेंसी की ओर से कार्य प्रारंभ कराया जाएगा। इस बार गाजीपुर से मांझी घाट तक की दूरी को तीन भाग में बांट कर टेंडर कराया जा रहा है ताकि कार्य जल्द हो सके। गाजीपुर से फेफना तक 68 किलोमीटर, फेफना से चिरैयामोड़ तक 45 किलोमीटर और चिरैया मोड़ से मांझी के जयप्रभा सेतु तक 16 किलोमीटर में कार्य को बांटा गया है। इससे पहले जून 2020 में गाजीपुर से मांझी तक 102 करोड़ का टेंडर हुआ जिसे जयपुर की कंपनी कृष्णा इंफ्रास्ट्रक्चर को आंवटित किया गया था। कार्य पूर्ण करने की अवधि एक साल थी। करीब एक साल बाद बैरिया से मांझी घाट तक के लिए कार्य शुरू हुआ भी, लेकिन अधूरा छोड़ दिया गया। बैरिया में करीब 20 किमी की दूूरी में मरम्मत कार्य कराया गया लेकिन वह भी मानक पर खरा नहीं उतरा। इसके बाद एनएचएआई के अधिकारियों ने एजेंसी को टर्मिनेट कर नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरु की है।
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कई जगह एनएच-31 का अस्तित्व ही नहीं
चार साल पहले यह सड़क 20 से 40 फीसद खराब थी। उस समय से ही बैरिया क्षेत्र के लोग मरम्मत की मांग को लेकर कई बार आंदोलन कर चुके हैं। कई बार एनएचएआइ के अधिकारियों ने लोगों को आश्वस्त किया कि सड़क बहुत जल्द बन जाएगी, लेकिन नतीजा शून्य पर ही टिका रहा। अब यह पूरी सड़क 80 से 100 फीसद तक खराब हो चुकी है। गड़ढ़ायुक्त सड़क पर धूल की गुबार के बीच लाखों लोग यात्रा करने को विवश हैं। हर दिन लोग दुर्घटना का शिकार भी हो रहे हैं। सागरपाली, फेफना, चितबड़ागांव, नरही, भरौली आदि स्थानों पर तो सड़क का नामोनिशान नहीं है और जानलेवा गड्ढे बन चुके हैं।
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टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य का आवंटन किया जाएगा। कार्य को तीन भागों में बांटा गया है। कार्य भी जल्द शुरु कराने के लिए विभाग प्रयासरत है।
-वाईपी सिंह, तकनीकी प्रबंधक, एनएचएआई, आजमगढ़।
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