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Ballia News: एक आनुवंशिक बीमारी है थैलेसीमिया

Tue, 09 May 2023 12:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 09 May 2023 12:10 AM IST
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Thalassemia is a genetic disease
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, आमतौर पर जन्म से ही बच्चे को अपनी गिरफ्त में ले लेती है। यह दो प्रकार का होता है। माइनस और मेजर। जिन बच्चों में माइनर थैलेसीमिया होता है, वे लगभग स्वस्थ जीवन जी लेते हैं। जबकि जिन बच्चों में मेजर थैलेसीमिया होता है उन्हें लगभग हर 21 दिन बाद या महीने भर के अंदर एक बोतल खून चढ़ाना पड़ता है। उनकी एक निश्चित आयु में मौत हो जाती है। थैलेसीमिया रोग एक तरह का रक्त विकार है। इसमें बच्चे के शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन सही तरीके से नहीं हो पाता है और इन कोशिकाओं की आयु भी बहुत कम हो जाती है। बच्चों को हर 21 दिन बाद कम से कम एक यूनिट खून की जरूरत होती है। जो इन्हें चढ़ाया जाता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैक के प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डा. एके उपाध्याय ने बताया कि थैलेसीमिया की चपेट में आए बच्चों को हर माह खून चढ़ाने से आयरन की मात्रा बढ़ने से मरीज को शरीर में हड्डी रोग व हृदय रोग सहित कई समस्या खड़ी हो जाती है। जिले में करीब 14 से 18 मरीज थैलेसीमिया के है, अधिकतर मरीज वाराणसी, मऊ सहित अन्य जिला में इलाज करवाते है। डा. उपाध्याय ने बताया कि थोड़ी सावधानी अपना कर आने वाली नस्लो को इस भयवाहक बिमारी से बचा सकते हैं।
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