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वेटलैंड के रूप में विकसित होगा सुरहाताल

Sat, 25 Sep 2021 10:38 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 10:38 PM IST
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Surhatal will be developed as a wetland
बलिया। जनपद में एक्शन प्लान के तहत सुरहाताल को वेटलैंड के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए दो दिन पहले सुरहाताल के पानी की सैंपलिंग कराई गई है। प्रारंभिक जांच में पानी अच्छा पाया गया है। अब आगे की जांच प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से शुरू की गई है। सैकड़ों एकड़ में फैले सुरहाताल को यदि वेटलैंड के रूप में विकसित किया जाता है तो यहां वाटर रिजर्व वायर, वाटर रिचार्ज और वाटर स्पोर्ट्स जैसे कार्य हो सकते हैं।
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सुरहाताल प्रदेश के सबसे बड़े ताल में एक है, जो 24.9 वर्ग किलोमीटर में फैला है। बरसात के दिनों में इसका जल अधिग्रहण क्षेत्र में विस्तार हो जाने से क्षेत्रफल बढ़कर 34.32 वर्ग किमी या कभी-कभी 42.32 वर्ग किमी तक भी हो जाता है। गर्मी में जल अधिग्रहण क्षेत्र कम हो जाने से इसका क्षेत्रफल 21 वर्ग किमी रह जाता है। यह ताल लगभग 4.5 किमी की लंबाई और 3.7 किमी की चौड़ाई में है। सुरहाताल कटहल नाले के साथ गंगा से जुड़ा हुआ है। प्राकृतिक रूप से गंगा नदी में बाढ़ आने पर गंगा नदी का पानी सुरहाताल में जाकर गिरता है और बाढ़ का पानी उतर जाने पर पुन: सुरहाताल का पानी गंगा नदी में गिरता है। सुरहाताल में मैरीटार पंप कैनाल स्थापित है। गर्मियों में भी यहां का पानी समृद्ध रहता है।
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जैव विविधता का है भंडार, सैलानी पक्षियों का लगता है जमावड़ा
बलिया। सुरहाताल जैव विविधता का भंडार है। ताल में जलीय जीवों एवं वनस्पतियों की भरमार है। उत्तम किस्म की मछलियों की उपलब्धता भी ताल की विशेषता है। सर्दियों का प्रारंभ से भी साइबेरियन पक्षी यहां आना प्रारंभ कर देते हैं। पूरे सर्दी में यहीं रहकर प्रजनन क्रिया संपन्न करते हैं। गर्मी शुरू होते ही स्वदेश वापस हो जाते हैं। इन पक्षियों का अनैतिक तरीके से शिकार भी किया जाता है और मंहगे दानों पर बेचा जाता है। इससे इनका आना अब पहले की अपेक्षा काफी कम हो रहा है। ताल में लाल एवं सफेद कमल बहुतायत मात्रा में मिलते हैं। ताल के किनारे विशेष प्रकार के धान की खेती भी होती है। इसे बोरो धान कहा जाता है।
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पर्यटन का केंद्र बन सकता है सुरहाताल
बलिया। सुरहाताल की सुंदरता को देखते हुए यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर ने भी प्रयास किया था। पक्षी विहार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। सुरहाताल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर यहां नौकायन आदि की सुविधा दी जा सकती है। स्थानीय लोगों की ओर से इसका प्रयोग पिकनिप स्पॉट के रूप में करते हैं।

सुरहाताल के वेटलैंड के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक्शन प्लान के तहत यहां के पानी की जांच की गई है। पानी की गुणवत्ता अच्छी है। अभी कई और जांच करनी है। इसके बाद सर्वे और डीपीआर बनाने का कार्य शुरू किया जा सकता है। - कालिका सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, वाराणसी
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