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Ballia News: एक करोड़ से बना स्पर गंगा में बहा, पक्के घाट पर भी खतरा
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लालगंज क्षेत्र के शिवपुर घाट पर गंगा नदी के कटान में विलीन हुआ स्पर। जागरुक पाठक
लालगंज । गंगा के कटान से शिवपुर कपूर दीयर पंचायत को बचाने के लिए बनाए गए 10 में से एक स्पर शनिवार की रात नदी में समा गया। वहीं, अर्धनिर्मित पक्के घाट पर भी कटान का खतरा है। ग्रामीणों ने निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के लिए बनाए गए स्पर खुद ही गंगा की धारा में बहते जा रहे हैं। अगस्त में बरसात शुरू होते ही स्पर संख्या तीन क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका आधा हिस्सा नदी में समा गया था।
अब स्पर संख्या एक भी कटान की भेंट चढ़ गया। ग्रामीणों के मुताबिक, बाढ़ विभाग की ओर से करीब 10 करोड़ रुपये से 10 स्पर बनाए गए थे। इसके अलावा 300 मीटर तक पार्कोवाइन विधि से कटान रोकने के लिए पिलर खड़े किए गए थे। आरोप है कि दस में से दो स्पर पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, जबकि शेष की स्थिति भी चिंताजनक है।
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काश्तकार निर्मल यादव ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के लिए पहले किसानों के खेतों से मिट्टी निकाली गई, लेकिन उन्हें मुआवजा तक नहीं दिया गया। इसके बाद भी मानकों के अनुरूप काम नहीं कराया गया।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी इस पूरे मामले की जांच कराएं तो कथित अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। स्पर संख्या एक के कटान की भेंट चढ़ने से अर्धनिर्मित पक्के घाट को भी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों को आशंका है कि कटान जारी रहा तो घाट का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
ग्रामीण अजीत तिवारी और अविनाश तिवारी ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और खर्च की गई धनराशि की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
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ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के लिए बनाए गए स्पर खुद ही गंगा की धारा में बहते जा रहे हैं। अगस्त में बरसात शुरू होते ही स्पर संख्या तीन क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका आधा हिस्सा नदी में समा गया था।
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अब स्पर संख्या एक भी कटान की भेंट चढ़ गया। ग्रामीणों के मुताबिक, बाढ़ विभाग की ओर से करीब 10 करोड़ रुपये से 10 स्पर बनाए गए थे। इसके अलावा 300 मीटर तक पार्कोवाइन विधि से कटान रोकने के लिए पिलर खड़े किए गए थे। आरोप है कि दस में से दो स्पर पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, जबकि शेष की स्थिति भी चिंताजनक है।
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काश्तकार निर्मल यादव ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के लिए पहले किसानों के खेतों से मिट्टी निकाली गई, लेकिन उन्हें मुआवजा तक नहीं दिया गया। इसके बाद भी मानकों के अनुरूप काम नहीं कराया गया।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी इस पूरे मामले की जांच कराएं तो कथित अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। स्पर संख्या एक के कटान की भेंट चढ़ने से अर्धनिर्मित पक्के घाट को भी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों को आशंका है कि कटान जारी रहा तो घाट का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
ग्रामीण अजीत तिवारी और अविनाश तिवारी ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और खर्च की गई धनराशि की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।