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कहीं शौचालय पर ताला तो कहीं कबाड़ घर बना डाला
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बलिया। स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय विहीन परिवारों को शौचालय बनवाने के लिए धन दिए गए। इसी के अनुसार गांवों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) भी घोषित किया गया लेकिन हकीकत यह है कि तमाम गांवों में शौचालय अधूरे हैं। जहां शौचालय बने भी हैं तो ज्यादातर का इस्तेेमाल नहीं हो रहा है। शौचालय के नाम पर धन की बंदरबांट भी खूब की गई। हालत यह है कि कहीं शौचालयों पर ताला बंद है तो कहीं कबाड़ घर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
जिले में सभी गांवों को ओडीएफ करने के लिए 1843 राजस्व गांवों में कुल तीन लाख 18 हजार 552 शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने 30 नवंबर 2018 को आनन-फानन में सभी गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया लेकिन धरातल पर शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका था। जनवरी 2019 में विभाग की ओर से घोषित गांवों का सत्यापन जब मंडलीय टीम ने किया तो कहीं शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हुआ था तो कहीं स्कूलों में बने शौचालय ध्वस्त मिले। इतना ही नहीं, कई गांवों में सड़कों पर शौच मिला। इसके आधार पर मंडलीय टीम ने घोषित 1843 गांवों के सापेक्ष 1094 गांवों के घोषित ओडीएफ को अमान्य कर दिया। उधर, 8318 शौचालयों का निर्माण अभी भी धनाभाव के कारण अटका हुआ है।
सात साल पहले डकार गया धन, शौचालय आज भी अधूरा
बैरिया। विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत तालिबपुर में वर्ष 2013-14 में शौचालय निर्माण के लिए शासन से मिले 1.25 लाख रुपये निकाल लिया गया और निर्माण के नाम पर सिर्फ पांच से छह फुट दीवार खड़ा करके सारा धन डकार लिया गया। शिकायत के बाद तत्कालीन एडीओ पंचायत उमेश सिंह ने धन गबन होने की रिपोर्ट भी भेजी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह तो सिर्फ बानगी है व्यतिगत शौचालयों में भी जमकर खेल हुआ है। जैसे तैसे कागजों पर शौचालयों का निर्माण कराकर ओडीएफ घोषित कर दिया गया है।
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सामुदायिक शौचालयों के संचालन पर 3.12 का भुगतान, अधिकांश पर है ताला
नरही। स्वच्छ भारत अभियान के तहत निजी शौचालय से लेकर ग्राम सभाओं में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण तेजी से कराया गया है। लेकिन यह अभियान भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।
विकास खंड सोहांव के 56 गांवों के सापेक्ष 45 गांवों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया है। हालांकि तीन गांव नसीरपुर, लक्ष्मणपुर और महरेई में शौचालय अभी भी निर्माणाधीन हैं। जिन शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है उनके रखरखाव और साफ सफाई के लिए स्वयं सहायता समूहों को हस्तांतरित कर दिया गया है और उनकी रखरखाव के लिए 6000 प्रति माह का भुगतान भी हो रहा है। इसके अलावा इन शौचालयों की साफ-सफाई के लिए प्रति सामुदायिक शौचालय 3000 रुपये प्रतिमाह का भी भुगतान किया जा रहा है। लेकिन हैरानी है कि इन सभी शौचालयों में किसी का भी ताला नहीं खुला है और रखरखाव का पैसा समूह के खाते में भुगतान हो रहा है। विकास खंड सोहांव में शौचालय रखरखाव के नाम पर समूह को अब तक 6.12 लाख का भुगतान किया जा चुका है।सोहांव खंड विकास अधिकारी राम आशीष ने बताया कि इन समूहों के खाते में पैसा भेजने का उद्देश्य है कि शौचालय का रखरखाव और संचालन हो सके, परंतु अगर स्वयं सहायता समूह यह कार्य नहीं कर रहे हैं तो यह घोर लापरवाही का मामला है। इस मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
ओडीएफ प्लस के तहत शौचालयों का निर्माण गांवों में चल रहा है। जहां कहीं भी गड़बड़ी की शिकायत मिलती है जांच कर कार्रवाई भी की जाती है। करीब तीन साल पहले बेस लाइन सर्वे के आधार पर ओडीएफ किया गया था। - इसरार अहमद, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन, बलिया
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जिले में सभी गांवों को ओडीएफ करने के लिए 1843 राजस्व गांवों में कुल तीन लाख 18 हजार 552 शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने 30 नवंबर 2018 को आनन-फानन में सभी गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया लेकिन धरातल पर शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका था। जनवरी 2019 में विभाग की ओर से घोषित गांवों का सत्यापन जब मंडलीय टीम ने किया तो कहीं शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हुआ था तो कहीं स्कूलों में बने शौचालय ध्वस्त मिले। इतना ही नहीं, कई गांवों में सड़कों पर शौच मिला। इसके आधार पर मंडलीय टीम ने घोषित 1843 गांवों के सापेक्ष 1094 गांवों के घोषित ओडीएफ को अमान्य कर दिया। उधर, 8318 शौचालयों का निर्माण अभी भी धनाभाव के कारण अटका हुआ है।
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सात साल पहले डकार गया धन, शौचालय आज भी अधूरा
बैरिया। विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत तालिबपुर में वर्ष 2013-14 में शौचालय निर्माण के लिए शासन से मिले 1.25 लाख रुपये निकाल लिया गया और निर्माण के नाम पर सिर्फ पांच से छह फुट दीवार खड़ा करके सारा धन डकार लिया गया। शिकायत के बाद तत्कालीन एडीओ पंचायत उमेश सिंह ने धन गबन होने की रिपोर्ट भी भेजी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह तो सिर्फ बानगी है व्यतिगत शौचालयों में भी जमकर खेल हुआ है। जैसे तैसे कागजों पर शौचालयों का निर्माण कराकर ओडीएफ घोषित कर दिया गया है।
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सामुदायिक शौचालयों के संचालन पर 3.12 का भुगतान, अधिकांश पर है ताला
नरही। स्वच्छ भारत अभियान के तहत निजी शौचालय से लेकर ग्राम सभाओं में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण तेजी से कराया गया है। लेकिन यह अभियान भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।
विकास खंड सोहांव के 56 गांवों के सापेक्ष 45 गांवों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया है। हालांकि तीन गांव नसीरपुर, लक्ष्मणपुर और महरेई में शौचालय अभी भी निर्माणाधीन हैं। जिन शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है उनके रखरखाव और साफ सफाई के लिए स्वयं सहायता समूहों को हस्तांतरित कर दिया गया है और उनकी रखरखाव के लिए 6000 प्रति माह का भुगतान भी हो रहा है। इसके अलावा इन शौचालयों की साफ-सफाई के लिए प्रति सामुदायिक शौचालय 3000 रुपये प्रतिमाह का भी भुगतान किया जा रहा है। लेकिन हैरानी है कि इन सभी शौचालयों में किसी का भी ताला नहीं खुला है और रखरखाव का पैसा समूह के खाते में भुगतान हो रहा है। विकास खंड सोहांव में शौचालय रखरखाव के नाम पर समूह को अब तक 6.12 लाख का भुगतान किया जा चुका है।सोहांव खंड विकास अधिकारी राम आशीष ने बताया कि इन समूहों के खाते में पैसा भेजने का उद्देश्य है कि शौचालय का रखरखाव और संचालन हो सके, परंतु अगर स्वयं सहायता समूह यह कार्य नहीं कर रहे हैं तो यह घोर लापरवाही का मामला है। इस मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
ओडीएफ प्लस के तहत शौचालयों का निर्माण गांवों में चल रहा है। जहां कहीं भी गड़बड़ी की शिकायत मिलती है जांच कर कार्रवाई भी की जाती है। करीब तीन साल पहले बेस लाइन सर्वे के आधार पर ओडीएफ किया गया था। - इसरार अहमद, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन, बलिया