{"_id":"6807d940b5f140c3910472c5","slug":"social-medias-interference-increases-but-books-importance-remains-intact-ballia-news-c-190-1-svns1007-138115-2025-04-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ballia News: सोशल मीडिया का बढ़ा दखल पर पुस्तकों का महत्व बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ballia News: सोशल मीडिया का बढ़ा दखल पर पुस्तकों का महत्व बरकरार
विज्ञापन
बलिया। वर्तमान परिवेश में मानव जीवन में सोशल मीडिया का दखल बढ़ गया है। इसके बावजूद पुस्तकों की महत्ता कम नहीं हुई है क्योंकि पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र होती है। व्यक्ति बचपन से लेकर जीवन के अंत तक पुस्तकें पढ़ता है। जीवन स्तर को उच्चता प्रदान में पुस्तकों की अहम भूमिका है। इतना ही नहीं, समाज का दर्पण भी पुस्तकों को ही कहा जाता है। विषम परिस्थितियों में सही मार्गदर्शन पुस्तकें ही करती हैं। इंटरमीडिएट यूपी बोर्ड के अंग्रेजी विषय के पोएट्री में लेसन छह में द स्कॉलर के कवि रॉबर्ट साउदी ने पुस्तकों के महत्व को बताया है।
शिक्षक और साहित्यकार डॉ. नवचंद्र तिवारी ने कहा कि गे ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार विश्व के महान कवि व नाटककार विलियम शेक्सपियर सहित कई हस्तियों का जन्म व निधन इसी दिन हुआ था। यूनेस्को द्वारा 23 अप्रैल 1995 को विश्व पुस्तक दिवस व कॉपीराइट दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। 23 अप्रैल 2021 में इसे संपूर्ण विश्व में उत्सव के रूप में मनाया गया। विकिपीडिया, गूगल, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि संचार के तंत्र के सापेक्ष पुस्तकें सस्ती व सहजता से उपलब्ध होती हैं। इसे पढ़कर हमें इनकी विरासत, ज्ञान, संस्कृति व मनोरंजन की जो अनुभूति होती है, वह अन्य किसी माध्यम से नहीं होती है। यही कारण है कि सोशल मीडिया के बढ़ते दखल के बावजूद पुस्तकों की प्रासंगिकता है और रहेगी।
पुस्तकालयों को संवारने की जरूरत
शिक्षक डॉ. नवचंद्र तिवारी कहते है कि शहरों में स्थापित पुस्तकालयों को वर्तमान में संवारने की जरूरत है ताकि आमजन को सहजता से पुस्तकें उपलब्ध हो सकें और लोग अपने विचारों को तर्कसंगत बना सकें।
विज्ञापन
घर में बनाएं पुस्तकालय
आम जीवन में सोशल मीडिया के बढ़ते दखल ने जीवन शैली को संकीर्ण कर दिया है। बावजूद इसके पुस्तकों की महत्ता कम नहीं हुई है। पुस्तक प्रेमी ज्ञानवर्धक पुस्तकों को खरीद कर अपने घर के कमरे या अलमारी को संक्षिप्त पुस्तकालय का रूप दे सकते हैं।
विज्ञापन
शिक्षक और साहित्यकार डॉ. नवचंद्र तिवारी ने कहा कि गे ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार विश्व के महान कवि व नाटककार विलियम शेक्सपियर सहित कई हस्तियों का जन्म व निधन इसी दिन हुआ था। यूनेस्को द्वारा 23 अप्रैल 1995 को विश्व पुस्तक दिवस व कॉपीराइट दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। 23 अप्रैल 2021 में इसे संपूर्ण विश्व में उत्सव के रूप में मनाया गया। विकिपीडिया, गूगल, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि संचार के तंत्र के सापेक्ष पुस्तकें सस्ती व सहजता से उपलब्ध होती हैं। इसे पढ़कर हमें इनकी विरासत, ज्ञान, संस्कृति व मनोरंजन की जो अनुभूति होती है, वह अन्य किसी माध्यम से नहीं होती है। यही कारण है कि सोशल मीडिया के बढ़ते दखल के बावजूद पुस्तकों की प्रासंगिकता है और रहेगी।
विज्ञापन
पुस्तकालयों को संवारने की जरूरत
शिक्षक डॉ. नवचंद्र तिवारी कहते है कि शहरों में स्थापित पुस्तकालयों को वर्तमान में संवारने की जरूरत है ताकि आमजन को सहजता से पुस्तकें उपलब्ध हो सकें और लोग अपने विचारों को तर्कसंगत बना सकें।
विज्ञापन
घर में बनाएं पुस्तकालय
आम जीवन में सोशल मीडिया के बढ़ते दखल ने जीवन शैली को संकीर्ण कर दिया है। बावजूद इसके पुस्तकों की महत्ता कम नहीं हुई है। पुस्तक प्रेमी ज्ञानवर्धक पुस्तकों को खरीद कर अपने घर के कमरे या अलमारी को संक्षिप्त पुस्तकालय का रूप दे सकते हैं।