फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Order issued to pay 6.45 lakh, along with interest, to the plaintiff.

Ballia News: वादी को 6.45 लाख रुपये ब्याज समेत देने का दिया आदेश

Sat, 19 Sep 2026 02:01 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:01 AM IST
विज्ञापन
Order issued to pay 6.45 lakh, along with interest, to the plaintiff.
बलिया। चोरी हुई बोलेरो का बीमा दावा महज सूचना देने में हुई देरी के आधार पर खारिज करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग बलिया ने परिवादिनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 6,45,281 रुपये की बीमित धनराशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन

इसके अलावा मानसिक संताप के लिए पांच हजार और वाद व्यय के लिए पांच हजार रुपये भी देने होंगे। भुगतान दो माह के भीतर करना होगा। देरी होने पर पूरी धनराशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। मामला परिवाद संख्या सीसी 139/2013 से जुड़ा है। परिवादी की बोलेरो 26 मई 2011 की रात राजस्थान के भरतपुर जिले के पहाड़ी थाना क्षेत्र से चोरी हो गई थी। परिवादी के पति ने अगले ही दिन 27 मई को थाने में लिखित सूचना दे दी थी। हालांकि, पुलिस ने विवेचना के बाद प्राथमिकी दर्ज करने की बात कही, जिससे एफआईआर दो जून को दर्ज हो सकी।
विज्ञापन


इसके बाद बीमा कंपनी को घटना की जानकारी देने के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। कंपनी ने सूचना देने में देरी का हवाला देते हुए दावा ‘नो क्लेम’ कर खारिज कर दिया। परिवादिनी ने 12 अप्रैल 2012 को अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कंपनी ने 21 मई को फिर दावा अस्वीकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सुनवाई के दौरान आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के गुरशिन्दर सिंह बनाम श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी मामले में दिए निर्णय का हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि बीमा पॉलिसी में ‘तत्काल’ सूचना देने की शर्त का अर्थ यह नहीं है कि मामूली देरी के आधार पर उपभोक्ता को उसके वैध अधिकार से वंचित कर दिया जाए।


आयोग ने पाया कि बोलेरो बीमित अवधि में ही चोरी हुई थी और इस तथ्य को बीमा कंपनी ने भी स्वीकार किया था। इन्हीं आधारों पर आयोग ने बीमा कंपनी को बीमित धनराशि ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया। वहीं, वाहन विक्रेता (विपक्षी संख्या-2) के खिलाफ परिवाद पोषणीय नहीं पाया गया। यह फैसला आयोग अध्यक्ष रामचन्द्र और सदस्य दिनेश कुमार गुप्ता की पीठ ने सुनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed