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Ballia News: चकिया के शंकरजी सिंह को मिला श्रीधर पाठक पुरस्कार
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बलिया। जनपद के चकिया गांव निवासी साहित्यकार शंकरजी सिंह को उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य संस्थान लखनऊ की ओर से वर्ष 2021 का श्रीधर पाठक पुरस्कार उनकी कृति ‘राम धरा पर पुन: पधारो’ के लिए प्रदान किया गया। यह अध्यात्मपरक कविताओं का संकलन हैं।
शंकरजी सिंह हिंदी के जाने-माने साहित्यकार, ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता डॉ. केदारनाथ सिंह के गांव चकिया के रहने वाले हैं। चकिया निवासी नागेंद्रनाथ सिंह व सावित्री देवी के पुत्र शंकरजी सिंह की शुरुआती पढ़ाई गांव पर हुई है। प्रयागराज से उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद वह परिवहन विभाग में एआरटीओ के पद पर तैनात हैं।
हिंदी संस्थान के निदेशक आरपी सिंह ने उन्हें संस्थान की ओर से 75 हजार रुपये, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। एआरटीओ शंकरजी सिंह ने बताया कि यह उनकी छठी पुस्तक हैं।
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लघुकथा संग्रह प्रश्नवाचक चिह्न, काव्य संग्रह रिश्तों का रेखा गणित, स्मृतियों का दंश, तन को झुलसाती बरसातें, पक्षी चले नीड़ की ओर आदि प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा, काव्य संग्रह मेरी मां, गजल संग्रह यहां कहां तनहाई है, निबंध संग्रह सृजन के बिंब, कहानी संग्रह सांझ का मिहिर आदि प्रकाशित होने वाले
हैं। उनको राज्य कर्मचारी संस्थान लखनऊ की ओर से 2019 का हरिवंश राय बच्चन पुरस्कार उनकी कृति स्मृतियों के दंश पर प्राप्त हुआ था। इसमें एक लाख रुपये अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार उन्होंने अपनी स्व. माता सावित्री देवी को समर्पित किया है।
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शंकरजी सिंह हिंदी के जाने-माने साहित्यकार, ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता डॉ. केदारनाथ सिंह के गांव चकिया के रहने वाले हैं। चकिया निवासी नागेंद्रनाथ सिंह व सावित्री देवी के पुत्र शंकरजी सिंह की शुरुआती पढ़ाई गांव पर हुई है। प्रयागराज से उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद वह परिवहन विभाग में एआरटीओ के पद पर तैनात हैं।
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हिंदी संस्थान के निदेशक आरपी सिंह ने उन्हें संस्थान की ओर से 75 हजार रुपये, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। एआरटीओ शंकरजी सिंह ने बताया कि यह उनकी छठी पुस्तक हैं।
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लघुकथा संग्रह प्रश्नवाचक चिह्न, काव्य संग्रह रिश्तों का रेखा गणित, स्मृतियों का दंश, तन को झुलसाती बरसातें, पक्षी चले नीड़ की ओर आदि प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा, काव्य संग्रह मेरी मां, गजल संग्रह यहां कहां तनहाई है, निबंध संग्रह सृजन के बिंब, कहानी संग्रह सांझ का मिहिर आदि प्रकाशित होने वाले
हैं। उनको राज्य कर्मचारी संस्थान लखनऊ की ओर से 2019 का हरिवंश राय बच्चन पुरस्कार उनकी कृति स्मृतियों के दंश पर प्राप्त हुआ था। इसमें एक लाख रुपये अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार उन्होंने अपनी स्व. माता सावित्री देवी को समर्पित किया है।