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पुलिस व्यवस्था नहीं मिलने से रुका दो गांवों के कोटे की दुकान का चयन
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बैरिया। पुलिस विभाग की ओर से सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने में असमर्थता जताने पर दो गांवों के कोटे की दुकानों के चयन को होने वाली खुली बैठक स्थगित कर दी गई। एक बार फिर नई तिथि निर्धारित कर दुकानों का चयन किया जाएगा।
बैरिया विकास खंड के ग्राम पंचायत गंगापुर में उमेश यादव के कोटे की दुकान कुछ समय पूर्व अनियमितता के कारण विभाग ने निरस्त कर दिया था। नई दुकान चयन का आदेश उपजिलाधिकारी बैरिया आत्रेय मिश्र ने जारी किया था। खुली बैठक के लिए 17 नवंबर की तिथि निर्धारित की गई थी।
वहीं, ग्राम पंचायत जगदेवा की सुशीला यादव पत्नी भगवान यादव के कोटे की दुकान भी निरस्त है। वहां भी 17 नवंबर को खुली बैठक करके नई दुकान का चयन किया जाना था लेकिन पुलिस विभाग ने नगर निकाय के चुनाव और कानून व्यवस्था कायम रखने में व्यस्तता को बताते हुए तय तिथि पर पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने में असमर्थता जताते हुए नई तिथि निर्धारित करने का आग्रह उप जिलाधिकारी से किया था। पुलिस प्रशासन दुकानों के चयन को लेकिन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। क्योंकि दो वर्ष पूर्व दुर्जनपुर गांव में कोटे की दुकान के चयन को लेकर बैठक में ही गोली चली थी और एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। एसएचओ धर्मवीर सिंह ने बताया कि जब तक पर्याप्त संख्या में फोर्स और हमारे बड़े अधिकारी मौजूद नहीं रहेंगे। तब तक कोटे की दुकानों का चयन कराना खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि इन दोनों गांव में गोलबंदी है। उप जिलाधिकारी आत्रेय मिश्र ने बताया कि अब नई तिथि नगर पंचायत चुनाव के बाद निर्धारित की जाएगी।
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बैरिया विकास खंड के ग्राम पंचायत गंगापुर में उमेश यादव के कोटे की दुकान कुछ समय पूर्व अनियमितता के कारण विभाग ने निरस्त कर दिया था। नई दुकान चयन का आदेश उपजिलाधिकारी बैरिया आत्रेय मिश्र ने जारी किया था। खुली बैठक के लिए 17 नवंबर की तिथि निर्धारित की गई थी।
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वहीं, ग्राम पंचायत जगदेवा की सुशीला यादव पत्नी भगवान यादव के कोटे की दुकान भी निरस्त है। वहां भी 17 नवंबर को खुली बैठक करके नई दुकान का चयन किया जाना था लेकिन पुलिस विभाग ने नगर निकाय के चुनाव और कानून व्यवस्था कायम रखने में व्यस्तता को बताते हुए तय तिथि पर पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने में असमर्थता जताते हुए नई तिथि निर्धारित करने का आग्रह उप जिलाधिकारी से किया था। पुलिस प्रशासन दुकानों के चयन को लेकिन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। क्योंकि दो वर्ष पूर्व दुर्जनपुर गांव में कोटे की दुकान के चयन को लेकर बैठक में ही गोली चली थी और एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। एसएचओ धर्मवीर सिंह ने बताया कि जब तक पर्याप्त संख्या में फोर्स और हमारे बड़े अधिकारी मौजूद नहीं रहेंगे। तब तक कोटे की दुकानों का चयन कराना खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि इन दोनों गांव में गोलबंदी है। उप जिलाधिकारी आत्रेय मिश्र ने बताया कि अब नई तिथि नगर पंचायत चुनाव के बाद निर्धारित की जाएगी।
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