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सचिव को लोन का लालच पड़ा महंगा
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नगरा। साधन सहकारी समिति के सचिव को लोन का लालच करना मंहगा पड़ गया है। जालसाज ने धोखाधड़ी कर लोन स्वीकृत करने के नाम पर सात लाख 95 हजार रुपए ठग लिया। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात जालसाज के विरुद्ध धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच पड़ताल शुरु कर दी है।
नगरा थाना क्षेत्र के तियरा निवासी हरिंद्र सिंह साधन सहकारी समिति के सचिव हैं, इनके मोबाइल पर किसी जालसाज ने फोन कर 16 लाख रुपए लोन स्वीकृत कराने का लालच दिया। लोन की फाइल तैयार कराने के लिए 80 हजार रुपए की मांग की। जालसाज ने कहा कि पहली किस्त के रूप में पांच लाख रुपए दिए जाएंगे। उसने यह भी प्रलोभन दिया कि 1.60 लाख बीमा की धनराशि से ही लोन की रकम चुकता हो जाएगी। हरिंद्र सिंह जालसाज के झांसे में आ गए और 80 हजार रुपए जालसाज के खाते में आरटीजीएस कर दिया। इसी बीच जालसाज ने उनसे आधारकार्ड, पैनकार्ड व खाता नंबर भी मांग लिया। इसके बाद जालसाज लगातार पैसा मांगता रहा। हरिंद्र सिंह अलग-अलग तारीखों में अपने खाते बंधन बैंक, पूर्वांचल बैंक एवं करेंट एकाउंट से आरटीजीएस के द्वारा पैसा भेजते रहे। इस तरह उन्होंने 7.95 लाख रुपए जालसाज के खाते में भेेज दिया। बार-बार पैसे की डिमांड से पीड़ित का माथा ठनका। उन्हें एहसास हो गया कि वे धोखाधड़ी के शिकार हो गए हैं। इसके बाद उन्होंने पुलिस को तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दिया है।
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नगरा थाना क्षेत्र के तियरा निवासी हरिंद्र सिंह साधन सहकारी समिति के सचिव हैं, इनके मोबाइल पर किसी जालसाज ने फोन कर 16 लाख रुपए लोन स्वीकृत कराने का लालच दिया। लोन की फाइल तैयार कराने के लिए 80 हजार रुपए की मांग की। जालसाज ने कहा कि पहली किस्त के रूप में पांच लाख रुपए दिए जाएंगे। उसने यह भी प्रलोभन दिया कि 1.60 लाख बीमा की धनराशि से ही लोन की रकम चुकता हो जाएगी। हरिंद्र सिंह जालसाज के झांसे में आ गए और 80 हजार रुपए जालसाज के खाते में आरटीजीएस कर दिया। इसी बीच जालसाज ने उनसे आधारकार्ड, पैनकार्ड व खाता नंबर भी मांग लिया। इसके बाद जालसाज लगातार पैसा मांगता रहा। हरिंद्र सिंह अलग-अलग तारीखों में अपने खाते बंधन बैंक, पूर्वांचल बैंक एवं करेंट एकाउंट से आरटीजीएस के द्वारा पैसा भेजते रहे। इस तरह उन्होंने 7.95 लाख रुपए जालसाज के खाते में भेेज दिया। बार-बार पैसे की डिमांड से पीड़ित का माथा ठनका। उन्हें एहसास हो गया कि वे धोखाधड़ी के शिकार हो गए हैं। इसके बाद उन्होंने पुलिस को तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दिया है।
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