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रंगमंच से जुड़े लोगों को साल गया ऋषि और इरफान का जाना

Thu, 30 Apr 2020 08:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2020 08:54 PM IST
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Rishi and Irfan go to the people associated with theater
बलिया। जिले के रंगकर्मी और साहित्यकार अभिनेता इऱफान खान की मौत की खबर से ऊबर नहीं पाये थे कि अगली सुबह यानि बृहस्पतिवार को अभिनेता ऋषि कपूर के जाने की मनहूस खबर ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। नतीजतन उनका दिल बैठ गया, आंखें नम हो गई और रुंधे गले से उन्होंने अपने चहेते कलाकारों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कहा कि ये वो सितारे थे, जिनके होने से दुनिया कुछ अधिक रौशन थी। अब तो बस उनकी भूमिकाएं ही याद बनकर रह जायेगी। मेरा नाम जोकर से फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाले ऋषि कपूर अस्सी और नब्बे के दशक में हिन्दुस्तान के युवाओं के दिलों में बस गये और आज भी उसी तरह बरकरार हैं। सदाबहार चार्मिगिं और चाकलेटी प्यारे अभिनेता के जाने का ़गम बरसों तक सालेगा । ऋषि कपूर को 1974 में बाबी फिल्म में शानदार अभिनय और रंगमंच से फिल्मी दुनिया में अभिनेता इरफान खान ने अपने दमदार अभिनय से दमदार अभिनेता के रुप में स्थापित किया। इसके अलावा स्वयं को एक सामान्य आदमी के रुप में प्रस्तुत किया। इऱफान को पान सिंह तोमर फिल्म में शानदार अभिनय ने उन्हें एक अलग पहचान दी। कहा कि इऱफान सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि अभिनय का चलता फिरता स्कूल थे। आज दोनों अभिनेता कला जगत को सूना कर चले गये।
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समूचा रंग जगत, सिनेमा और कला जगत इरफान खान और ऋषि कपूर के आकस्मिक निधन से स्तब्ध है। यह घटना रंगमंच से जुड़े लोगों के लिए किस वज्रपात से कम नहीं। इनके जाने से जो खालीपन आया है, उसका भर पाना बहुत मुश्किल होगा। ऐसे अभिनेता युगों में पैदा होते हैं। बलिया के रंगकर्मियों की ओर से दोनों महान कलाकारों को विन्रम श्रद्धांजलि ।
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आशीष त्रिवेदी
रंगकर्मी
कपूर खानदान का लाडला ऋषि कपूर उर्फ चिंटू 67 वर्ष की अवस्था में निधन और बुधवार को इरफान खान के जाने का दोहरा गम कला के पुजारियों को सदमे दे गया है। ये दोनों कलाकार बहुत याद आयेंगे, इनका मुस्कुराना, रोमांटिक अंदाज, सरपट बोलने की कला सदैव रोमांचित करेगी। विनम्र श्रद्धांजलि।
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डॉ. नवचंद्र तिवारी
रंगमंच से जुड़े साहित्यकार
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कभी-कभी ऐसा होता है कि आप कुछ लिखना चाहें लिख नहीं पाते हैं कलम रुक जाती है बोलना चाहें बोल नहीं पाते हैं जुबान साथ नहीं देती है। बस अंदर एक टीस उठती है, घुटन होता है एक दर्द उमड़ता है। अभिनेता इरफान खा औश्र ऋषि कपूर के असमायिक निधन से कुछ ऐसी ही स्थिती उत्पन्न हुई है।

पं. राज कुमाुर मिश्रा
संगीत प्रशिक्षक
बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता ऋषि कपूर और इरफान खान के जाने से ऐसा लग रहा है मानों पूरी फिल्मी दुनिया ही रिक्त हो गयी है। कपूर साहब के अभिनय का अंदाज व रोमांटिक मूड का असर युवाओं पर विशेष था। उनकी याद सदैव हम लोगों को रोमांचित करती रहेगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।
सुनिता पाठक
गायिका
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