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निजीकरण से बिजली बकाए की वसूली बढ़ेगी

Mon, 05 Feb 2018 10:55 PM IST
ballia
ballia Updated Mon, 05 Feb 2018 10:55 PM IST
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Privatization will increase the recovery of power balance
बिजली - फोटो : SELF
पूर्वांचल के बलिया और मऊ जिले की बिजली का निजीकरण करने के लिए सरकार ने कवायद शुरु कर दी है। इसकों लेकर कर्मचारी और अधिकारी जहां सशंकित है। वहीं विभाग के आला अफसर मान रहे हैं कि निजीकरण के चलते बिजली बकाए की वसूली बढ़ेगी। हालांकि जनपद के बिजली विभाग के निजीकरण को होने में करीब एक साल लगने की बात कही जा रही है। जिले में चार खंडों के पर 260 करोड़ बिजली का बकाया चल रहा है। उधर, सेवानिवृत्त अधिकारी निजीकरण को लूट खसोट का जरिया बता रहे।
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 जिले में एक लाख 72 हजार विद्युत उपभोक्ता है। जिसमें से करीब 20 हजार से अधिक उपभोक्ताओं ने वर्ष 2017-18 में कनेक्शन लिया है। जिला मुख्यालय पर 24 घंटे तहसील मुख्यालयों पर 20 घंटे तथा ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति का फरमान सूबे की सरकार ने जारी किया है। जबकि बिजली विभाग के उदासीन रवैये के चलते नगरीय क्षेत्रों में प्रतिदिन तीन से चार घंटे अब भी कटौती की जा रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 18 के जगह पर आठ से दस घंटे ही बिजली मिलती है।
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विभागीय सूत्र बतातें है कि बिजली चोरी को ही लाइन लास कहकर विभाग के अफसर अपने कर्तव्य से विमुख हो जा रहे थे। जिसके चलते जिले में बिजली चोरी बढ़ती गई है और जिले का लाइन लास 45-50 फीसदी हो गया था। वहीं विभागीय कर्मचारियों की उदासीनता से बिजली बकाया बिलों की वसूली भी सही ढंग से नहीं हो पा रही थी। बिजली विभाग के चार खंडों में 260 करोड़ बकाया है। जिसके सापेक्ष हर माह बीस करोड़ रुपये वसूूूली का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन चारों खंडों से मात्र आठ करोड़ रुपये ही राजस्व वसूली हो पा रही थी। इसके चलते विभागीय आला अफसरों की रिपोर्ट के आधार पर जिले के बिजली विभाग का निजीकरण करने की दिशा में कवायदें तेज कर दी गई। जबकि इसे पूरा होने में करीब एक साल लगने की बात कही जा रही है। हालांकि विभाग के आला अधिकारियों का मानना है कि बिजली विभाग
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की राजस्व वसूली में इससे तेजी आएगी। शुरुआत में इसका आंकलन किया जाएगा।

अगर राजस्व वृद्घि हुई तो निजीकरण रहेगा। अन्यथा विभाग ही अपने राजस्व की वसूली कर राजस्व वृद्घि करेगा।
विभाग के सेवानिवृत्त हो चुके अवर अभियंता विद्युत विभाग के कर्मचारी नेता बीबी सिंह ने बताया कि इससे कंपनियों का फायदा अधिक और विभाग को कम होंगे। बिजली के बकाए के लिए एक कंपनी को पहले भी लगाया गया था। जिससे विभाग को काफी नुकसान उठाना पड़ा। आज तक उसकी रिकवरी नहीं हो सकी। निजीकरण का लाभ सीधे तौर पर बिचौलियों को होगा। जिन्हे कंपनी अपना प्रतिनिधि नियुक्त करेगी। उसके कर्मचारी ही लूट-खसोट करेंगे। इसके लिए रणनीति तैयार किया जा रहा है। जल्द ही हम सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे।
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