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पीएम आवास नहीं बना तो मुकदमा
ballia
Updated Mon, 08 Jan 2018 11:14 PM IST
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अावास
प्रधानमंत्री आवास आवंटित होने व धनराशि प्राप्त होने के बाद भी निर्माण नहीं कराए जाने वालों पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। शासन से इसके लिए 31 जनवरी तक की समय सीमा निर्धारित कर दी गई है। शासन के निर्देश पर डीआरडीए के पीडी ने सभी बीडीओ को सोमवार को पत्र जारी किया है। जनपद में 14 हजार 441 लाभार्थियों को धनराशि जारी की गई है।
जिले में गरीब और असहाय लोगों को आवास मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत 2015-16 में लागू हुई थी। हालांकि यह योजना वर्ष 2016-17 से पूरी तरह धरातल पर उतरी। 2016-17 में 9810 आवास निर्माण के लिए एक अरब सात करोड़ 72 लाख और वर्ष 2017-18 में 4631 आवास के लिए 55 करोड़ 57 लाख 20 हजार की धनराशि जिले को प्राप्त हुई। लेकिन यह योजना आज भी अधर में ही लटकी है। दो साल बीत जाने के बाद भी जिले में एक भी प्रधानमंत्री आवास का निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
कुल 14 हजार 441 आवासों के सापेक्ष कुल 12 हजार 964 लाभार्थियों के खाते में दूसरी किश्त भेजी जा सकी है जबकि तीसरी किश्त मात्र 1471 लाभार्थियों को भेजी गई है। पीडी की मानें तो पहली किश्त 40 हजार और दूसरी किश्त 70 हजार देेने के बाद निर्माण कार्य, छत तथा प्लास्टर आदि का पूरा होने पर ही लाभार्थी का तीसरी किश्त 10 हजार का दिया जाना है।
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बताया कि आवास निर्माण में तेजी लाने का निर्देश सभी बीडीओ को दिया गया है। अब शासन के सख्त रुख के मद्देनजर अधिकारी सक्रिय हो गए हैं तथा लाभुकों को जल्द से जल्द आवास का निर्माण पूरा करने को कह रहे हैं। जनपद के कुछ ऐसे इलाके भी हैं, जहां धन आवंटन होने के बाद भी निर्माण कार्य काफी धीमी गति से शुरू कराया गया है। इसके बाद भी काफी समय से कार्य लटका हुआ है। वहीं दुबहड़ निवासी एक व्यक्ति ने एक प्रधान के देवर को मानक के विपरीत आवास व शौचालय आवंटन करने का आरोप लगाया है।
दुबहड़ गांव निवासी तेज बहादुर सिंह ने एक सप्ताह पहले जिलाधिकारी से शपथ पत्र के साथ शिकायत की कि दशरथ मिश्र के छपरा गांव की प्रधान के देवर को प्रधानमंत्री आवास व शौचालय का आवंटन किया गया है जो कि मानक के विपरीत है। आरोप लगाया कि गांव में अपात्रों को आवास आवंटित किया गया है और पात्रों को इस योजना से वंचित रखा गया है। लेकिन एक सप्ताह बाद भी इसकी जांच शुरू नहीं हो सकी है। इस बाबत प्रभारी डीएम व सीडीओ संतोष कुमार ने बताया कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि होने पर संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में गरीब और असहाय लोगों को आवास मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत 2015-16 में लागू हुई थी। हालांकि यह योजना वर्ष 2016-17 से पूरी तरह धरातल पर उतरी। 2016-17 में 9810 आवास निर्माण के लिए एक अरब सात करोड़ 72 लाख और वर्ष 2017-18 में 4631 आवास के लिए 55 करोड़ 57 लाख 20 हजार की धनराशि जिले को प्राप्त हुई। लेकिन यह योजना आज भी अधर में ही लटकी है। दो साल बीत जाने के बाद भी जिले में एक भी प्रधानमंत्री आवास का निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
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कुल 14 हजार 441 आवासों के सापेक्ष कुल 12 हजार 964 लाभार्थियों के खाते में दूसरी किश्त भेजी जा सकी है जबकि तीसरी किश्त मात्र 1471 लाभार्थियों को भेजी गई है। पीडी की मानें तो पहली किश्त 40 हजार और दूसरी किश्त 70 हजार देेने के बाद निर्माण कार्य, छत तथा प्लास्टर आदि का पूरा होने पर ही लाभार्थी का तीसरी किश्त 10 हजार का दिया जाना है।
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बताया कि आवास निर्माण में तेजी लाने का निर्देश सभी बीडीओ को दिया गया है। अब शासन के सख्त रुख के मद्देनजर अधिकारी सक्रिय हो गए हैं तथा लाभुकों को जल्द से जल्द आवास का निर्माण पूरा करने को कह रहे हैं। जनपद के कुछ ऐसे इलाके भी हैं, जहां धन आवंटन होने के बाद भी निर्माण कार्य काफी धीमी गति से शुरू कराया गया है। इसके बाद भी काफी समय से कार्य लटका हुआ है। वहीं दुबहड़ निवासी एक व्यक्ति ने एक प्रधान के देवर को मानक के विपरीत आवास व शौचालय आवंटन करने का आरोप लगाया है।
दुबहड़ गांव निवासी तेज बहादुर सिंह ने एक सप्ताह पहले जिलाधिकारी से शपथ पत्र के साथ शिकायत की कि दशरथ मिश्र के छपरा गांव की प्रधान के देवर को प्रधानमंत्री आवास व शौचालय का आवंटन किया गया है जो कि मानक के विपरीत है। आरोप लगाया कि गांव में अपात्रों को आवास आवंटित किया गया है और पात्रों को इस योजना से वंचित रखा गया है। लेकिन एक सप्ताह बाद भी इसकी जांच शुरू नहीं हो सकी है। इस बाबत प्रभारी डीएम व सीडीओ संतोष कुमार ने बताया कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि होने पर संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।