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Ballia News: शासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण पीकू वार्ड पर 4 साल से ताला
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जिला अस्पताल के नए भवन स्थित पीकू वार्ड का बंद पड़ा ताला।संवाद
बलिया। कोरोना काल की तीसरी लहर में बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में बने पीडियाट्रिक्स इंटेसिव केयर यूनिट (पीकू) वार्ड पर ताला लटका हुआ है। चार वर्ष बाद भी इसमें गंभीर बच्चों का उपचार शुरू नहीं हो सका।
डॉ. संजीव वर्मन ने कहा कि शासन से अनुमति नहीं मिलने से वार्ड का संचालन नहीं हो पा रहा है। वार्ड में करोड़ो खर्च कर लगाए गए वेंटीलेटर, बाईपैप मशीन सहित अन्य उपकरण काम के नहीं रह गए हैं। इसके सभी बेड ऑक्सीजन सुविधा से लैस हैं। दो दिन पहले सीएमओ कार्यालय के स्टेनो के नवजात भतीजे की मौत सोमवार को वेंटिलेटर के अभाव में हो गई।
जिला अस्पताल के बाल रोग ओपीडी में रोज 250 के ऊपर मरीज आते हैं। इसमें 10 से 15 बच्चों की हालत गंभीर होती है। वहीं, जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 40 प्रसव कराए जाते हैं। पांच से छह के नवजात बच्चाें को ऑक्सीजन की परेशानी होती है। इस तरह के बच्चों को पीकू वार्ड की जरूर होती है। लेकिन पीकू वार्ड को खोलने का निर्देश शासन स्तर से न होने के कारण चिकित्सक मजबूर होकर बच्चों को इलाज के लिए मऊ, वाराणसी या लखनऊ रेफर कर देते हैं।
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मौसम के बदलाव से जुकाम के कारण सीने की जकड़न व निमोनिया से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा होता है। जिले के अस्पतालों में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं होने के कारण गैर जिला रेफर करना पड़ता है। जबकि पीकू वार्ड में अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरण मौजूद हैं।
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डॉ. संजीव वर्मन ने कहा कि शासन से अनुमति नहीं मिलने से वार्ड का संचालन नहीं हो पा रहा है। वार्ड में करोड़ो खर्च कर लगाए गए वेंटीलेटर, बाईपैप मशीन सहित अन्य उपकरण काम के नहीं रह गए हैं। इसके सभी बेड ऑक्सीजन सुविधा से लैस हैं। दो दिन पहले सीएमओ कार्यालय के स्टेनो के नवजात भतीजे की मौत सोमवार को वेंटिलेटर के अभाव में हो गई।
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जिला अस्पताल के बाल रोग ओपीडी में रोज 250 के ऊपर मरीज आते हैं। इसमें 10 से 15 बच्चों की हालत गंभीर होती है। वहीं, जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 40 प्रसव कराए जाते हैं। पांच से छह के नवजात बच्चाें को ऑक्सीजन की परेशानी होती है। इस तरह के बच्चों को पीकू वार्ड की जरूर होती है। लेकिन पीकू वार्ड को खोलने का निर्देश शासन स्तर से न होने के कारण चिकित्सक मजबूर होकर बच्चों को इलाज के लिए मऊ, वाराणसी या लखनऊ रेफर कर देते हैं।
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मौसम के बदलाव से जुकाम के कारण सीने की जकड़न व निमोनिया से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा होता है। जिले के अस्पतालों में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं होने के कारण गैर जिला रेफर करना पड़ता है। जबकि पीकू वार्ड में अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरण मौजूद हैं।