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रीपोलिंग होने तक जारी रहेगा धरना
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Mon, 02 Nov 2015 12:10 AM IST
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के चौथे चरण के दौरान बूथ कैप्चरिंग, आगजनी और प्राणघातक हमले के विरोध में रविवार को दूसरे दिन फूलन सेना विधान सभा इकाई बैरिया का धरना जारी रहा।
इस दौराप धरनारत सेना के सदस्यों ने हुंकार भरी कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न होने तक धरना जारी रहेगा। जरूरत पड़ी तो आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र निषाद ने कहा कि समाजवाद के नाम पर यह उप्र सरकार सामंतवाद की सरकार चला रहे हैं और इसका ज्वलंत उदाहरण फतेहराय के टोला में बीते दिनों बीडीसी प्रत्याशी अनिरूद्ध यादव के इशारे पर आगजनी व जानलेवा हमले की घटना है।
उन्होंने कहा कि निषादों ने ही सपा सरकार की ताजपोशी की थी और आज उनकी उपेक्षा ही नहीं बल्कि उनका दमन भी किया जा रहा है। कहा कि 2017 के चुनाव में इसका जवाब निषाद समाज के लोग जरूर देंगे।
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कहा कि आंदोलन तभी खत्म होगा जब रिपोलिंग, गिरफ्तारी व मुआवजा की मांग पूरी हो जाएगी। इस मौके पर श्याम सुंदर निषाद, महादेव निषाद, रामजी निषाद, रामजीत साहनी, धनपाल निषाद,
रामजी निषाद, रामजी निषाद, शुभ नारायण निषाद, सुरेश निषाद, किशोर निषाद, स्वामीनाथ निषाद, धनंजय निषाद, राजेश निषाद, छुट्टीलाल निषाद, चंद्रिका निषाद, पतिराज निषाद आदि रहे। अध्यक्षता सुरेश निषाद ने की।
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इस दौराप धरनारत सेना के सदस्यों ने हुंकार भरी कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न होने तक धरना जारी रहेगा। जरूरत पड़ी तो आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र निषाद ने कहा कि समाजवाद के नाम पर यह उप्र सरकार सामंतवाद की सरकार चला रहे हैं और इसका ज्वलंत उदाहरण फतेहराय के टोला में बीते दिनों बीडीसी प्रत्याशी अनिरूद्ध यादव के इशारे पर आगजनी व जानलेवा हमले की घटना है।
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उन्होंने कहा कि निषादों ने ही सपा सरकार की ताजपोशी की थी और आज उनकी उपेक्षा ही नहीं बल्कि उनका दमन भी किया जा रहा है। कहा कि 2017 के चुनाव में इसका जवाब निषाद समाज के लोग जरूर देंगे।
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कहा कि आंदोलन तभी खत्म होगा जब रिपोलिंग, गिरफ्तारी व मुआवजा की मांग पूरी हो जाएगी। इस मौके पर श्याम सुंदर निषाद, महादेव निषाद, रामजी निषाद, रामजीत साहनी, धनपाल निषाद,
रामजी निषाद, रामजी निषाद, शुभ नारायण निषाद, सुरेश निषाद, किशोर निषाद, स्वामीनाथ निषाद, धनंजय निषाद, राजेश निषाद, छुट्टीलाल निषाद, चंद्रिका निषाद, पतिराज निषाद आदि रहे। अध्यक्षता सुरेश निषाद ने की।