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Ballia News: गलन भरी ठंड में कांपे लोग, नहीं जले अलाव
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कड़ाके की ठंड का असर लगातार चौथे दिन भी बना रहा। पारा लुढ़कने के कारण ठंड से लोग बेहाल हैं। सब्जी की फसलें भी प्रभावित होने लगी हैं। मंगलवार को कोहरे के साथ आसमान में बादल छाए रहे। पूरे दिन धूप नहीं होने से गलनभरी ठंड से लोग परेशान रहे। ग्रामीण इलाकों में कहीं भी सरकारी अलाव नहीं दिखा। मंगलवार को अधिकतम जहां 18 डिग्री हो गया वहीं न्यूनतम एक डिग्री कम होकर सात डिग्री सेल्सियस रहा।
मौसम लगातार अपना रुप बदल रहा है। मंगलवार की सुबह हल्के कोहरे के साथ ही आसमान में बादल छाए रहे। चल रही हल्की पछुआ हवा चलने से गलनभरी ठंड लोगों को बेहाल करती रही। नगर में जगह-जगह टायर आदि जलाकर लोग शरीर को गरम करते रहे। गलनभरी ठंड से लोगों की दिनचर्या बेपटरी हो गई है। मंगलवार को तापमान में भी गिरावट दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान दूसरे दिन भी 18 डिग्री रहा जबकि न्यूनतम एक डिग्री कम होकर सात डिग्री पर पहुंच गया। पड़ रही कड़ाके की ठंड का असर रबी फसलों के साथ ही सब्जी की फसलों पर भी होने लगा है। आलू की फसल को बचाने के लिए किसान लगातार छिड़काव कर रहे हैं। उधर, ग्रामीण इलाकों में कहीं भी सरकारी अलाव की लौ देखने को नहीं मिल रही है। इसके चलते सार्वजनिक स्थानों पर लोग ठिठुरने को मजबूर हैं।
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ठंड से ठिठुर रहे गरीब, कर रहे सरकारी कंबल का इंतजार
बांसडीह। कड़ाके की ठंड के चलते स्कूलों को बंद कर दिया गया है वहीं जरूरतमंद लोग सरकारी कंबल का इंतजार कर रहे हैं। लगातार ठंड बढ़ने से आम जन मानस में परेशानी बढ़ी है। जन जीवन अस्त व्यस्त पड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार भले ही हर व्यवस्था दे रही है। परंतु सुविधाओं से वंचित लोग नजर आ रहे हैं। बांसडीह तहसील अंतर्गत गांवों की संख्या सैकड़ों हैं। जहां बढ़ती ठंड में जरूरत मंद लोग कंबल का इंतजार कर रहे हैं। तहसीलदार प्रवीण सिंह का कहना है कि गांवों की संख्या लगभग पांच सौ है। कंबल पर्याप्त नहीं हैं। एक हजार कंबल वितरण करना संभव नहीं है। कहा कि कंबल मांगा गया है और जो उपलब्ध है उसे क्षेत्रीय लेखपालों से वितरण कराया गया है।
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दया छपरा
क्षेत्र में कहीं भी प्रशासन की ओर से अलाव नहीं जलवाया गया है न कहीं कंबल वितरित किया गया है। ग्रामीण किसी तरह ठंड से बचाव की कोशिश कर रहे हैं।
बेरुआरबारी में दो सप्ताह से कड़ाके की ठंड पड़ रही है लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से ना कहीं अलाव की व्यवस्था है ना गरीबों को सरकारी कंबल ही बांटा गया है। ब्लॉक मुख्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बाजार आदि स्थानों पर अलाव की व्यवस्था नहीं होने से लोग ठिठुरते रहे।
चिलकहर में लेखपालों द्वारा कागजों में ही अलाव जला दिया गया है और कंबल वितरण भी कर दिया गया है। इलाके के सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था नहीं होने से खासकर यात्री ठिठुरते रहे।
जयप्रकाशनगर में क्षेत्र में कहीं भी सरकारी अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते राहगीरों को परेशान होना पड़ रहा है।
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मौसम लगातार अपना रुप बदल रहा है। मंगलवार की सुबह हल्के कोहरे के साथ ही आसमान में बादल छाए रहे। चल रही हल्की पछुआ हवा चलने से गलनभरी ठंड लोगों को बेहाल करती रही। नगर में जगह-जगह टायर आदि जलाकर लोग शरीर को गरम करते रहे। गलनभरी ठंड से लोगों की दिनचर्या बेपटरी हो गई है। मंगलवार को तापमान में भी गिरावट दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान दूसरे दिन भी 18 डिग्री रहा जबकि न्यूनतम एक डिग्री कम होकर सात डिग्री पर पहुंच गया। पड़ रही कड़ाके की ठंड का असर रबी फसलों के साथ ही सब्जी की फसलों पर भी होने लगा है। आलू की फसल को बचाने के लिए किसान लगातार छिड़काव कर रहे हैं। उधर, ग्रामीण इलाकों में कहीं भी सरकारी अलाव की लौ देखने को नहीं मिल रही है। इसके चलते सार्वजनिक स्थानों पर लोग ठिठुरने को मजबूर हैं।
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ठंड से ठिठुर रहे गरीब, कर रहे सरकारी कंबल का इंतजार
बांसडीह। कड़ाके की ठंड के चलते स्कूलों को बंद कर दिया गया है वहीं जरूरतमंद लोग सरकारी कंबल का इंतजार कर रहे हैं। लगातार ठंड बढ़ने से आम जन मानस में परेशानी बढ़ी है। जन जीवन अस्त व्यस्त पड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार भले ही हर व्यवस्था दे रही है। परंतु सुविधाओं से वंचित लोग नजर आ रहे हैं। बांसडीह तहसील अंतर्गत गांवों की संख्या सैकड़ों हैं। जहां बढ़ती ठंड में जरूरत मंद लोग कंबल का इंतजार कर रहे हैं। तहसीलदार प्रवीण सिंह का कहना है कि गांवों की संख्या लगभग पांच सौ है। कंबल पर्याप्त नहीं हैं। एक हजार कंबल वितरण करना संभव नहीं है। कहा कि कंबल मांगा गया है और जो उपलब्ध है उसे क्षेत्रीय लेखपालों से वितरण कराया गया है।
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दया छपरा
क्षेत्र में कहीं भी प्रशासन की ओर से अलाव नहीं जलवाया गया है न कहीं कंबल वितरित किया गया है। ग्रामीण किसी तरह ठंड से बचाव की कोशिश कर रहे हैं।
बेरुआरबारी में दो सप्ताह से कड़ाके की ठंड पड़ रही है लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से ना कहीं अलाव की व्यवस्था है ना गरीबों को सरकारी कंबल ही बांटा गया है। ब्लॉक मुख्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बाजार आदि स्थानों पर अलाव की व्यवस्था नहीं होने से लोग ठिठुरते रहे।
चिलकहर में लेखपालों द्वारा कागजों में ही अलाव जला दिया गया है और कंबल वितरण भी कर दिया गया है। इलाके के सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था नहीं होने से खासकर यात्री ठिठुरते रहे।
जयप्रकाशनगर में क्षेत्र में कहीं भी सरकारी अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते राहगीरों को परेशान होना पड़ रहा है।