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गुरुजी आंदोलन पर बच्चों को पढ़ा रहा चपरासी

Sun, 17 Sep 2017 10:07 PM IST
ballia
ballia Updated Sun, 17 Sep 2017 10:07 PM IST
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Peasants reading Guruji movement on children
Education
यह महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि हकीकत है। जिन नौनिहालों को पढ़ाने की जिम्मेदारी समयोजित शिक्षक (वर्तमान में फिर से शिक्षामित्र) पर थी, वह जिम्मेदारी शिक्षा क्षेत्र गड़वार के प्राथमिक विद्यालय कोटवां के चपरासी निभा रहे हैं। जी हां इस विद्यालय में पढ़ने वाले 114 बच्चों को स्कूल के परिचारक रेशम पांडेय शिक्षित कर रहे हैं। ये न सिर्फ सराहनीय काम है, बल्कि उनके लिए भी सबक है जो अयोग्य होने के बावजूद नौनिहालों की जिंदगी संवारने के बजाय खुदको शिक्षक बनाने की जद्दोजहद में लगे हैं। उन्हें अपनी मांग के आगे फर्क नहीं पड़ता कि114 बच्चों का भविष्य अधर में लटका है।
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प्राथमिक विद्यालय कोटवां में 114 बच्चों का नामांकन है। जब से शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द हुआ है, तब से वे अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए है। कुछ दिन पूर्व प्रदेश सरकार द्वारा 10 हजार रुपये मानदेय देने के ऐलान के बावजूद अभी भी अधिकतर विद्यालयों में शिक्षामित्र पढ़ाने नहीं जा रहे हैं।
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इसी में से एक विद्यालय है प्राथमिक विद्यालय कोटवां, यहां शिक्षामित्र नहीं आने के कारण विद्यालय के चपरासी रेशम पांडेय रोजाना 114 नौनिहालों की जिंदगी संवार रहे हैं। बच्चों को ककहरा से लेकर गिनती और अंग्रेजी सब कुछ सिखा रहे हैं। जो अपने आप में सराहनीय काम तो है ही, साथ ही शिक्षामित्रों के लिए प्रेरणास्रोत भी है। वहीं बच्‍चे भी उत्साहपूर्व पढ़ाई को अंजाम दे रहे हैं।
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ज्ञात हो कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोटवां के प्रधानाध्यापक परमात्मानंद उपाध्याय को इसी विद्यालय का अतिरिक्त चार्ज मिला हुआ है। जिनके अनुसार शिक्षामित्र के न आने के कारण एक योग्य चपरासी के हाथों ही फिलहाल बच्चों का भविष्य संवारा जा रहा है। मेरे विद्यालय में भी 75 बच्चों को सिर्फ एक ही शिक्षक पढ़ा रहे हैं।

बीएसए संतोष कुमार का कहना है कि शिक्षामित्रों के हड़ताल के चलते स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है, इसके लिए शिक्षकों को निर्देशित कर दिया गया है।
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