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117600 हेक्टेयर में होगी धान की खेती

Sun, 22 May 2022 09:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 22 May 2022 09:42 PM IST
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Paddy will be cultivated in 117600 hectares
बलिया। रबी फसलों की कटाई व मड़ाई का कार्य लगभग समाप्त हो चुका है। इसके साथ ही अब किसान खरीफ के खेती में भी जुटेंगे। इसको देखते हुए किसानों के साथ ही कृषि विभाग ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले में इस साल 117600 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होगी, जबकि पिछले साल 117556 हेेक्टेयर में धान की खेती हुई थी। इसके लिए सात किस्म के धान के 894.9 क्विंटल बीज का आवंटन शासन ने किया है जो जिले में पहुंचना शुरू हो चुका है। इस पर 50 फीसदी अनुदान दिए जाएंगे। इसमें मोटा और महीन प्रजाति के कई किस्म के बीज शामिल हैं।
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खरीफ में खासकर धान की फसल के लिए नर्सरी तैयार करनी होती है जो 21 से 30 दिनों में तैयार होती है और इसके बाद किसान नर्सरी से बीजड़े निकाल धान की रोपाई करते हैं। जिले के कई इलाकों में रोहिणी नक्षत्र में ही नर्सरी डालने का काम शुरू हो जाता है जो मई माह के अंतिम सप्ताह से आरंभ होता है। इसको देखते हुए कृषि विभाग ने भी तैयारी तेज कर दी हैं। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि महीन व मोटा किस्म के आधार व प्रमाणित बीज की मांग की गई जो पहुंचने लगे हैं। इसमें इसमें सीओ 51 महीन धान की आधार बीज है जिसकी पैदावार 60 कुंतल प्रति हेक्टेयर है। इस धान का 200 क्विंटल बीज जिले में आएगा। इसके अलावा साभा सब 1- 379 क्विंटल, बीपीटी 5204- 100 क्विंटल, सीआट्स 4-30 क्विंटल, एनडीआर 2065- 86 क्विंटल व सीआट्स 1- 99.9 क्विंटल बीज जल्द उपलब्ध होंगे। यह बीज किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि किसानों को पूरा मूल्य देना होगा और अनुदान की राशि उनके खाते में वापस की जाएगी।
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बिना उपचारित बीज का नहीं करें प्रयोग
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई के लिए 800-1000 वर्ग मीटर नर्सरी क्षेत्र की आवश्यकता होती है। नर्सरी से पहले बीज को अंकुरित कराना भी जरूरी है। इसलिए नर्सरी डालने से पहले स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत, ट्रेट्रासाईक्लीन हाईड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत की 4 ग्राम मात्रा 100 लीटर पानी में मिला कर बीज को घोल मे रात भर भीगो दें। दूसरे दिन बीज को छानकर उपचारित बीज को गीले बोरे में लपेटकर ठंडे कमरे में रखें। बोरे पर पानी का छींटा देते रहें। 36-48 घंटे बाद बोरे को खोलें। बीज अंकुरित होकर नर्सरी डालने के लिए तैयार हो जाते हैं।
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जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार ने बताया कि जिले के कई हिस्से में रोहिणी नक्षत्र में किसान धान की नर्सरी लगाने का कार्य करते हैं। इसको देखते हुए विभाग की ओर से धान के बीज मंगाने की प्रक्रिया शुरु है। ढैंचा का बीज भी उपलब्ध है। किसान इसकी बोआई कर धान की रोपाई के पूर्व इसकी जोताई कर सकते हैं। इससे खेतों में नाइट्रोजन, कार्बन व ह्यूमस (जीवांश) में वृद्धि होगी 20 फीसदी तक यूरिया की बचत हो सकेगी।
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