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धान की खरीद हुई बेपटरी, टोकन व्यवस्था फ्लॉप
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बेल्थरारोड स्थित धान क्रय केंद्र पर बारिश से बचाव के लिए तिरपाल से ढककर रखा गया धान।
- फोटो : BALLIA
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बलिया। जिले में धान खरीद बेपटरी होने लगी है। कहीं क्रय केंद्र बंद होने से तो कहीं केंद्र प्रभारियों की मनमानी से किसान परेशान हैं। शासन ने अभी तीन दिन पहले ऑनलाइन टोकन सिस्टम लागू किया था। लेकिन तीन दिन बाद ही इसे फिर से बंद कर साधारण खरीद शुरू कर दी गई है। कई जगह बिचौलिए हावी हैं। उधर, बारिश को लेकर क्रय केंद्रों पर माकूल इंतजाम नहीं हैं। जबकि मंगलवार की देर शाम हल्की बारिश हुई और अभी मौसम में बदलाव कायम है। कई केंद्रों पर तिरपाल से धान को ढंक कर कोरम किया गया।
क्रय केंद्रों के संचालन को लेकर जिले में कभी माकूल इंतजाम नहीं हो पाते हैं। बीते वर्षों में भी धान व गेहूं क्रय केंद्रों का संचालन दुरुस्त नहीं होने के कारण हर बार किसानों को उपज बेचने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। अधिकारियों की ओर से निरीक्षण तो किया जाता है लेकिन कभी भी ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है। एक माह पहले जिलाधिकारी के निरीक्षण में कहीं क्रय केंद्र बंद मिले तो कहीं इंतजाम माकूल नहीं रहे। डीएम ने डिप्टी आरएमओ व केंद्र प्रभारी का वेतन भी रोक दिया। पूर्व के वर्षों में निरीक्षण के दौरान मंत्री व तत्कालीन डीएम ने कई गड़बड़ियां पकड़ी लेकिन कभी भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस वर्ष भी यही हालात हैं। जिले में एक नवंबर से धान खरीद के लिए कुल 80 क्रय केंद्र बनाए गए लेकिन पांच क्रय केंद्र बंद किए जा चुके हैं। जहां बंद है वहां के किसानों के लिए अभी तक कोई विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया है। अन्य क्रय केंद्रों भी किसानों को बहाना बनाकर लौटा दिया जा रहा है जबकि बिचौलिए से खूब खरीद की जा रही है। खासकर नगरा क्षेत्र में हर वर्ष यह खेल किया जाता है। किसान धान क्रय केंद्र खोजते फिर रहे हैं। उधर, मंगलवार की देर शाम जिले के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई और आसमान में अब भी बादल छाए हुए हैं। लेकिन विभाग की ओर इसको लेकर माकूल तैयारी कहीं नहीं दिखी। हालांकि कुछ केंद्रों पर प्लास्टिक तिरपाल से धान को ढंक कर रखा गया था। जबकि मौसम विज्ञानियों की ओर से तीन दिनों पहले ही हल्की बारिश होने की अंदेशा जताई गई थी।
ऑनलाइन टोकन व्यवस्था तीन दिनों बाद बंद, किसान ऊहापोह में
बलिया। क्रय केंद्रों पर बिचौलिए के दखल को रोकने के लिए शासन ने तीन दिनों पहले ऑनलाइन टोकन व्यवस्था को किया। शुरूआत में भी यह व्यवस्था ही लागू थी, लेकिन कम संख्या में किसानों के आने के चलते इसे बंद कर दिया गया था। अब सभी केंद्रों पर किसानों की भीड़ बढ़ गई है। कई स्थानों पर बिचौलिए किसानों से धान की खरीदने लगे थे। इस स्थिति को सरकार ने गंभीरता से लिया और किसानों के लिए टोकन व्यवस्था को पुन: लागू किया लेकिन तीन दिनों बाद ही इसमें एक बार फिर बदलाव करते हुए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया। इसको लेकर किसानों में ऊहापोह बना हुआ है और केंद्र प्रभारी भी मनमानी कर रहे हैं।
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- 27400 : मीट्रिक टन अब हुई खरीद।
-124400 : मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य।
-100018 : मीट्रिक टन पिछले साल हुई धान खरीद
-1940 : रुपये दर मोटा धान प्रति क्विंटल।
-1960 : रुपये पतला धान प्रति क्विंटल।
-74 : धान क्रय केंद्र हैं संचालित।
क्रय केंद्रों पर खरीद जारी है। जहां क्रय केंद्र बंद हैं उस क्षेत्र के किसान आसपास स्थित क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री कर सकते हैं। बारिश को देखते हुए सभी केंद्र प्रभारियों को तिरपाल का इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी केंद्र पर धान नहीं भींगा।
- अविनाश चंद्र सागरवाल, जिला विपणन अधिकारी, बलिया।
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क्रय केंद्रों के संचालन को लेकर जिले में कभी माकूल इंतजाम नहीं हो पाते हैं। बीते वर्षों में भी धान व गेहूं क्रय केंद्रों का संचालन दुरुस्त नहीं होने के कारण हर बार किसानों को उपज बेचने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। अधिकारियों की ओर से निरीक्षण तो किया जाता है लेकिन कभी भी ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है। एक माह पहले जिलाधिकारी के निरीक्षण में कहीं क्रय केंद्र बंद मिले तो कहीं इंतजाम माकूल नहीं रहे। डीएम ने डिप्टी आरएमओ व केंद्र प्रभारी का वेतन भी रोक दिया। पूर्व के वर्षों में निरीक्षण के दौरान मंत्री व तत्कालीन डीएम ने कई गड़बड़ियां पकड़ी लेकिन कभी भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस वर्ष भी यही हालात हैं। जिले में एक नवंबर से धान खरीद के लिए कुल 80 क्रय केंद्र बनाए गए लेकिन पांच क्रय केंद्र बंद किए जा चुके हैं। जहां बंद है वहां के किसानों के लिए अभी तक कोई विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया है। अन्य क्रय केंद्रों भी किसानों को बहाना बनाकर लौटा दिया जा रहा है जबकि बिचौलिए से खूब खरीद की जा रही है। खासकर नगरा क्षेत्र में हर वर्ष यह खेल किया जाता है। किसान धान क्रय केंद्र खोजते फिर रहे हैं। उधर, मंगलवार की देर शाम जिले के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई और आसमान में अब भी बादल छाए हुए हैं। लेकिन विभाग की ओर इसको लेकर माकूल तैयारी कहीं नहीं दिखी। हालांकि कुछ केंद्रों पर प्लास्टिक तिरपाल से धान को ढंक कर रखा गया था। जबकि मौसम विज्ञानियों की ओर से तीन दिनों पहले ही हल्की बारिश होने की अंदेशा जताई गई थी।
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ऑनलाइन टोकन व्यवस्था तीन दिनों बाद बंद, किसान ऊहापोह में
बलिया। क्रय केंद्रों पर बिचौलिए के दखल को रोकने के लिए शासन ने तीन दिनों पहले ऑनलाइन टोकन व्यवस्था को किया। शुरूआत में भी यह व्यवस्था ही लागू थी, लेकिन कम संख्या में किसानों के आने के चलते इसे बंद कर दिया गया था। अब सभी केंद्रों पर किसानों की भीड़ बढ़ गई है। कई स्थानों पर बिचौलिए किसानों से धान की खरीदने लगे थे। इस स्थिति को सरकार ने गंभीरता से लिया और किसानों के लिए टोकन व्यवस्था को पुन: लागू किया लेकिन तीन दिनों बाद ही इसमें एक बार फिर बदलाव करते हुए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया। इसको लेकर किसानों में ऊहापोह बना हुआ है और केंद्र प्रभारी भी मनमानी कर रहे हैं।
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- 27400 : मीट्रिक टन अब हुई खरीद।
-124400 : मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य।
-100018 : मीट्रिक टन पिछले साल हुई धान खरीद
-1940 : रुपये दर मोटा धान प्रति क्विंटल।
-1960 : रुपये पतला धान प्रति क्विंटल।
-74 : धान क्रय केंद्र हैं संचालित।
क्रय केंद्रों पर खरीद जारी है। जहां क्रय केंद्र बंद हैं उस क्षेत्र के किसान आसपास स्थित क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री कर सकते हैं। बारिश को देखते हुए सभी केंद्र प्रभारियों को तिरपाल का इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी केंद्र पर धान नहीं भींगा।
- अविनाश चंद्र सागरवाल, जिला विपणन अधिकारी, बलिया।

रेवती स्थित धान क्रय केंद्र पर बारिश से बचाने के लिए तिरपाल से ढककर रखा गया धान।- फोटो : BALLIA