नगरा। क्षेत्र के मलप हरसेनपुर गांव में श्रीराम जानकी मंदिर की पहली वर्षगाठ पर मंदिर समिति द्वारा आयोजित दीपयज्ञ में शनिवार को सायंकाल श्रद्धालुओं ने 11 हजार दीपक जलाए। एक साथ जले दीपकों के प्रकाश से मंदिर परिसर जगमगा उठा। इसके बाद वृंदावन के कथावाचक अरुण महाराज ने संगीतमय राम कथा प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। विशाल भंडारे में कई गांवों के श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। श्रीराम जन्म का प्रसंग सुनाते हुए अरुण महाराज ने कहा कि माता पार्वती के कहने पर भगवान शिव ने श्रीराम कथा सुनाई। भगवान शिव द्वारा सुनाई गई कथा ही श्रीराम चरित मानस कहलाती है। कहा कि जब-जब पृथ्वी पर पाप बढ़ता है, तब-तब किसी न किसी रूप में भगवान अवतार लेते हैं। कहा कि उस समय भी धरती पर असुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ता ही जा रहा था। देवताओं ने भगवान श्रीराम के अवतार के लिए राजा दशरथ के रघुवंश कुल को श्रेष्ठ माना। चौथापन में पहुंचे राजा दशरथ को अपने कुल को आगे बढ़ाने की चिंता होने लगी। वे गुरु वशिष्ठ के निर्देश पर श्रृंगी ऋषि को बुलाकर पुत्रेष्टि यज्ञ कराए। जिस स्थान पर यह यज्ञ हुआ, वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला में स्थित है। मखोड़ा नामक गांव में आज भी यज्ञशाला उसी तरह है। यज्ञ के अंत में यज्ञ भगवान खीर लेकर प्रकट हुए और राजा दशरथ को खीर देते हुए उसे तीनों रानियो में बांटने को कहा। खीर का प्रसाद तीनों रानियों में बांट दिया गया, उसके नौ माह बाद भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। भगवान राम सहित चारो भाईयों का जन्म होते ही अयोध्या में खुशियां छा गई। इस मौके पर व्यवस्थापक अजय मिश्र, बृजभूषण सिंह, शिक्षक विनय प्रताप सिंह, अनिल सिंह, अभिनंदन मिश्र, विश्राम कुशवाहा, वीर बहादुर सिंह, शशिधर सिंह, हरिओम मिश्रा, मृत्युंजय गिरी आदि रहे।
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