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Ballia News: अब मैरीटार में भी सुरहा के किनारे बनेगा पिकनिक स्पॉट
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बलिया। जिले में सुरहा ताल के किनारे मैरीटार में पिकनिक स्पॉट बनाने की कवायद शुरू हो गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर अधिकारियों ने मैरीटार में सुरहाताल किनारे साफ-सफाई शुरू करा दी है। जल्द ही झूले और मनोरंजन के अन्य साधनों का भी इंतजाम होगा। नावें सजकर तैयार हो गई हैं।
जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने की कवायद अब तेज हो गई है। बड़े भूभाग में फैले सुरहा ताल अब पर्यटन का बड़ा केंद्र होगा। इस ताल को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित करने का निर्देश है। एक माह पहले सुरहा ताल में बोट क्लब स्थापित किया गया। अब सुरहा ताल क्षेत्र के ही मैरीटार गांव के पास पिकनिक स्पॉट बनाने की कवायद चल रही है।
नौकायन के लिए नावें भी सजने लगी हैं। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले लगाने के लिए एजेंसी से वार्ता चल रही है। सुरहा ताल पक्षी विहार की तर्ज पर ही जिला प्रशासन की ओर से यहां भी जल्द ही एक मेला भी आयोजन किया जाएगा और इसी दिन पिकनिक स्पॉट की शुरुआत भी हो जाएगी। मैरीटार के पास सुरहाताल क्षेत्र में पूर्व से बने पिकनिक स्पॉट स्थल की साफ-सफाई शुरू हो गई है। सीढ़ियों के साथ ही अन्य टूटे-फूटे स्थलों की मरम्मत कराई जा रही है। लोगों के बैठने के लिए जगह-जगह कुर्सियां और बेंच भी लगाने का कार्य चल रहा है।
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प्रदेश के बड़े तालों में एक है सुरहा ताल
सुरहाताल प्रदेश के सबसे बड़े ताल में एक है, जो 24.9 वर्ग किलोमीटर में फैला है। बरसात के दिनों में इसका जल अधिग्रहण क्षेत्र में विस्तार हो जाने से क्षेत्रफल बढ़कर 34.32 वर्ग किमी या कभी-कभी 42.32 वर्ग किमी तक भी हो जाता है। गर्मी में जल अधिग्रहण क्षेत्र कम हो जाने से इसका क्षेत्रफल 21 वर्ग किमी रह जाता है। यह ताल लगभग 4.5 किमी की लंबाई और 3.7 किमी की चौड़ाई में है। सुरहाताल कटहल नाले के साथ गंगा से जुड़ा हुआ है। प्राकृतिक रूप से गंगा नदी में बाढ़ आने पर गंगा नदी का पानी सुरहा ताल में जाकर गिरता है और बाढ़ का पानी उतर जाने पर पुन: सुरहा ताल का पानी गंगा में गिरता है। सुरहाताल में मैरीटार पंप कैनाल स्थापित है। गर्मियों में भी यहां का पानी समृद्ध रहता है।
जैव विविधता का है भंडार, सैलानी पक्षियों का लगता है जमावड़ा
बलिया। सुरहा ताल में जैव विविधता का भंडार है। ताल में जलीय जीवों एवं वनस्पतियों की भरमार है। उत्तम किस्म की मछलियों की उपलब्धता भी ताल की विशेषता है। सर्दी शुरु होते ही साइबेरियन पक्षी यहां आना प्रारंभ कर देते हैं। पूरे सर्दी में यहीं रहकर प्रजनन क्रिया संपन्न करते हैं। गर्मी शुरू होते ही स्वदेश वापस हो जाते हैं। इन पक्षियों का अनैतिक तरीके से शिकार भी किया जाता है और महंगे दानों पर बेचा जाता है। इससे इनका आना अब पहले की अपेक्षा काफी कम हो रहा है। ताल में लाल एवं सफेद कमल बहुतायत में मिलते हैं। ताल के किनारे विशेष प्रकार के धान की खेती भी होती है। इसे बोरो धान कहा जाता है।
मैरीटार गांव के पास सुरहाताल किनारे पिकनिक स्पॉट के रुप में विकसित करने का प्रयास चल रहा है। जिलाधिकारी के निर्देश पर कार्रवाई चल रही है। आने वाले दिनों में यह अच्छा पर्यटन केंद्र बन सकेगा। - राजित राम मिश्र, डीडीओ, बलिया
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जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने की कवायद अब तेज हो गई है। बड़े भूभाग में फैले सुरहा ताल अब पर्यटन का बड़ा केंद्र होगा। इस ताल को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित करने का निर्देश है। एक माह पहले सुरहा ताल में बोट क्लब स्थापित किया गया। अब सुरहा ताल क्षेत्र के ही मैरीटार गांव के पास पिकनिक स्पॉट बनाने की कवायद चल रही है।
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नौकायन के लिए नावें भी सजने लगी हैं। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले लगाने के लिए एजेंसी से वार्ता चल रही है। सुरहा ताल पक्षी विहार की तर्ज पर ही जिला प्रशासन की ओर से यहां भी जल्द ही एक मेला भी आयोजन किया जाएगा और इसी दिन पिकनिक स्पॉट की शुरुआत भी हो जाएगी। मैरीटार के पास सुरहाताल क्षेत्र में पूर्व से बने पिकनिक स्पॉट स्थल की साफ-सफाई शुरू हो गई है। सीढ़ियों के साथ ही अन्य टूटे-फूटे स्थलों की मरम्मत कराई जा रही है। लोगों के बैठने के लिए जगह-जगह कुर्सियां और बेंच भी लगाने का कार्य चल रहा है।
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प्रदेश के बड़े तालों में एक है सुरहा ताल
सुरहाताल प्रदेश के सबसे बड़े ताल में एक है, जो 24.9 वर्ग किलोमीटर में फैला है। बरसात के दिनों में इसका जल अधिग्रहण क्षेत्र में विस्तार हो जाने से क्षेत्रफल बढ़कर 34.32 वर्ग किमी या कभी-कभी 42.32 वर्ग किमी तक भी हो जाता है। गर्मी में जल अधिग्रहण क्षेत्र कम हो जाने से इसका क्षेत्रफल 21 वर्ग किमी रह जाता है। यह ताल लगभग 4.5 किमी की लंबाई और 3.7 किमी की चौड़ाई में है। सुरहाताल कटहल नाले के साथ गंगा से जुड़ा हुआ है। प्राकृतिक रूप से गंगा नदी में बाढ़ आने पर गंगा नदी का पानी सुरहा ताल में जाकर गिरता है और बाढ़ का पानी उतर जाने पर पुन: सुरहा ताल का पानी गंगा में गिरता है। सुरहाताल में मैरीटार पंप कैनाल स्थापित है। गर्मियों में भी यहां का पानी समृद्ध रहता है।
जैव विविधता का है भंडार, सैलानी पक्षियों का लगता है जमावड़ा
बलिया। सुरहा ताल में जैव विविधता का भंडार है। ताल में जलीय जीवों एवं वनस्पतियों की भरमार है। उत्तम किस्म की मछलियों की उपलब्धता भी ताल की विशेषता है। सर्दी शुरु होते ही साइबेरियन पक्षी यहां आना प्रारंभ कर देते हैं। पूरे सर्दी में यहीं रहकर प्रजनन क्रिया संपन्न करते हैं। गर्मी शुरू होते ही स्वदेश वापस हो जाते हैं। इन पक्षियों का अनैतिक तरीके से शिकार भी किया जाता है और महंगे दानों पर बेचा जाता है। इससे इनका आना अब पहले की अपेक्षा काफी कम हो रहा है। ताल में लाल एवं सफेद कमल बहुतायत में मिलते हैं। ताल के किनारे विशेष प्रकार के धान की खेती भी होती है। इसे बोरो धान कहा जाता है।
मैरीटार गांव के पास सुरहाताल किनारे पिकनिक स्पॉट के रुप में विकसित करने का प्रयास चल रहा है। जिलाधिकारी के निर्देश पर कार्रवाई चल रही है। आने वाले दिनों में यह अच्छा पर्यटन केंद्र बन सकेगा। - राजित राम मिश्र, डीडीओ, बलिया