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नागपंचमी आज, पूजे जाएंगे नागदेवता
ballia
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:13 PM IST
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नागपंचमी का त्योहार शुक्रवार को जिलेभर में मनाया जाएगा। ऐसा माना जाता है कि नागपंचमी से ही त्योहारों की शुरुआत होती है। परंपरा के अनुुसार नागपंचमी के दिन खासकर ग्रामीण इलाकों में अखाड़े तैयार किए गए हैं जहां कुश्ती का आयोजन होगा। इसके अलावा शिवालयों में जहां पूजन-अर्चन होगी वहीं नागदेवता को दूध पिलाने तथा लावा चढ़ाने की भी परम्परा है।
नागपंचमी को लेकर जिलेभर में तैयारी तेज हो गई है। सावन महीने में पड़ने वाले इस त्योहार को लेकर युवाओं में काफी जोश होता है। बताया जाता है कि ग्रामीण इलाकों में युवाओं की ओर से जगह-जगह अखाड़े तैयार किए जाते हैं और विभिन्न पांरपरिक खेलों के साथ ही विशेषकर कुश्ती आयोजन किया जाता है। कई इलाकों में तो कुश्ती के बड़े आयोजन किए जाते हैं जिसमें दूर-दराज इलाके के पहलवान शामिल भी होते हैं। बताया जाता है कि यह अखाड़े अस्थाई तौर पर खेतों आदि में भी बनाए जाते हैं।
जिले के सिकंदरपुर, मनियर, रसड़ा, हनुमानगंज, बेल्थरारोड, सोहांव, भरौली, चितबड़ागांव के अलावा शहर के आसपास गांवों में भी नागपंचमी के दिन अखाड़े में पारंपरिक खेलों का आयोजन किया जाता है। उधर, नागपंचमी के दिन शिवालयों में पूजन-अर्चन के साथ ही नागदेवता को दूध तथा लावा चढ़ाया जाता है और घरों में मीठा पकवान बनाने की भी परंपरा है। शहर के बालेश्वर मंदिर के पास तो हर साल साक्षात नागदेवता की व्यवस्था होती है और दूध पिलाने तथा लावा चढ़ाने के लिए हजारोें की भीड़ उमड़ती है।
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नागपंचमी को लेकर जिलेभर में तैयारी तेज हो गई है। सावन महीने में पड़ने वाले इस त्योहार को लेकर युवाओं में काफी जोश होता है। बताया जाता है कि ग्रामीण इलाकों में युवाओं की ओर से जगह-जगह अखाड़े तैयार किए जाते हैं और विभिन्न पांरपरिक खेलों के साथ ही विशेषकर कुश्ती आयोजन किया जाता है। कई इलाकों में तो कुश्ती के बड़े आयोजन किए जाते हैं जिसमें दूर-दराज इलाके के पहलवान शामिल भी होते हैं। बताया जाता है कि यह अखाड़े अस्थाई तौर पर खेतों आदि में भी बनाए जाते हैं।
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जिले के सिकंदरपुर, मनियर, रसड़ा, हनुमानगंज, बेल्थरारोड, सोहांव, भरौली, चितबड़ागांव के अलावा शहर के आसपास गांवों में भी नागपंचमी के दिन अखाड़े में पारंपरिक खेलों का आयोजन किया जाता है। उधर, नागपंचमी के दिन शिवालयों में पूजन-अर्चन के साथ ही नागदेवता को दूध तथा लावा चढ़ाया जाता है और घरों में मीठा पकवान बनाने की भी परंपरा है। शहर के बालेश्वर मंदिर के पास तो हर साल साक्षात नागदेवता की व्यवस्था होती है और दूध पिलाने तथा लावा चढ़ाने के लिए हजारोें की भीड़ उमड़ती है।
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