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कटान में विलीन परिषदीय विद्यालयों का नहीं होगा निर्माण
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बैरिया। गंगा व सरयू नदी के कटान में विलीन हुए एक दर्जन परिषदीय विद्यालयों का अस्तित्व बेसिक शिक्षा परिषद समाप्त कर देगा। इसकी जानकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष विनोद सिंह को जनसूचना अधिकार के तहत किए आवेदन में दिया है। जवाब में कहा गया है कि सरकार की मंशा इन विद्यालयों को दोबारा बनवाने की नहीं है।
प्राथमिक विद्यालय उदईछपरा, प्राथमिक विद्यालय श्रीनगर केहरपुर, प्राथमिक विद्यालय शाहपुर(गंगौली), उच्च प्राथमिक विद्यालय सुघरछपरा, प्राथमिक विद्यालय चौबेछपरा, उच्च प्राथमिक विद्यालय गंगापुर, प्राथमिक विद्यालय नौका टोला (सिताबदियर), प्राथमिक विद्यालय शिवपुर, प्राथमिक विद्यालय मांझा, प्राथमिक विद्यालय रामपुर पूर्वी व प्राथमिक विद्यालय गंगापुर एक दशक के भीतर ही गंगा व सरयू नदी में विलीन हो चुके हैं। तब से इन विद्यालयों को तीन किमी की परिधि में कहीं ना कहीं किसी विद्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। कटान के बाद नदियों में विलीन हुए कुछ गांवों को बसाया गया है, कुछ बसने की तैयारी में है। लेकिन नई बस्तियों में बेसिक शिक्षा विभाग परिषदीय विद्यालय खोलने में कोई रुचि नहीं दिखा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी चाहे जो भी तर्क दें कक्षा पांच तक के बच्चों के लिए तीन किमी की दूरी बहुत होती है। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की उम्र पांच साल से 10 साल के भीतर होती है जो पैदल ही स्कूल जाते-आते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा इन विद्यालयों को समाप्त करने के निर्णय को लेकर गरीब अभिभावकों के मन में आक्रोश है।
न्यायालय में लगाएंगे गुहार
कटान में विलीन 12 परिषदीय विद्यालयों का अस्तित्व समाप्त करने के निर्णय से दर्जनों शिक्षा मित्र, अनुदेशकों व रसोइयों की सेवा पर संकट हो जाएगा। जो सर्व शिक्षा अभियान के मूल उद्देश्यों के खिलाफ है। कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष विनोद सिंह ने बेसिक शिक्षा विभाग के उक्त निर्णय के खिलाफ जिलाधिकारी से पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। बताया कि अगर प्रशासनिक स्तर पर यह निर्णय नहीं हुआ तो इन विद्यालयों को बहाल करने के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई जाएगी।
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प्राथमिक विद्यालय उदईछपरा, प्राथमिक विद्यालय श्रीनगर केहरपुर, प्राथमिक विद्यालय शाहपुर(गंगौली), उच्च प्राथमिक विद्यालय सुघरछपरा, प्राथमिक विद्यालय चौबेछपरा, उच्च प्राथमिक विद्यालय गंगापुर, प्राथमिक विद्यालय नौका टोला (सिताबदियर), प्राथमिक विद्यालय शिवपुर, प्राथमिक विद्यालय मांझा, प्राथमिक विद्यालय रामपुर पूर्वी व प्राथमिक विद्यालय गंगापुर एक दशक के भीतर ही गंगा व सरयू नदी में विलीन हो चुके हैं। तब से इन विद्यालयों को तीन किमी की परिधि में कहीं ना कहीं किसी विद्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। कटान के बाद नदियों में विलीन हुए कुछ गांवों को बसाया गया है, कुछ बसने की तैयारी में है। लेकिन नई बस्तियों में बेसिक शिक्षा विभाग परिषदीय विद्यालय खोलने में कोई रुचि नहीं दिखा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी चाहे जो भी तर्क दें कक्षा पांच तक के बच्चों के लिए तीन किमी की दूरी बहुत होती है। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की उम्र पांच साल से 10 साल के भीतर होती है जो पैदल ही स्कूल जाते-आते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा इन विद्यालयों को समाप्त करने के निर्णय को लेकर गरीब अभिभावकों के मन में आक्रोश है।
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न्यायालय में लगाएंगे गुहार
कटान में विलीन 12 परिषदीय विद्यालयों का अस्तित्व समाप्त करने के निर्णय से दर्जनों शिक्षा मित्र, अनुदेशकों व रसोइयों की सेवा पर संकट हो जाएगा। जो सर्व शिक्षा अभियान के मूल उद्देश्यों के खिलाफ है। कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष विनोद सिंह ने बेसिक शिक्षा विभाग के उक्त निर्णय के खिलाफ जिलाधिकारी से पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। बताया कि अगर प्रशासनिक स्तर पर यह निर्णय नहीं हुआ तो इन विद्यालयों को बहाल करने के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई जाएगी।
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