फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   mausam hua suhana badlon ne dala dera

मौसम हुआ सुहाना, बादलों ने आसमान में डाला डेरा

Sat, 02 Jul 2016 07:19 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया Updated Sat, 02 Jul 2016 07:19 PM IST
विज्ञापन
mausam hua suhana badlon ne dala dera
चंडीगढ़ में बारिश - फोटो : amar ujala
 पिछले एक सप्ताह से पड़ रही गर्मी से लोगों को शनिवार को कुछ हद तक निजात मिली। आसमान में बादलों ने डेरा डाला, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं मौसम सुहाना होने से युवाओं ने जमकर आनंद भी लिया। 
विज्ञापन

मौसम विभाग पटना ने पहले ही पूर्वानुमान किया था कि इस साल सामान्य से ज्यादा बारिश होगी, लेकिन जून महीना पूरा बीत जाने के बाद बारिश के नामोनिशान न होने से किसान सकते में पड़ गए हैं। नर्सरी डाले हुए 25 दिन से ऊपर बीत गया है, लेकिन पानी के अभाव में अभी भी रोपनी नहीं शुरू हो पाई।
विज्ञापन

 

ऐसे में किसानों की मूसलाधार बारिश का इंतजार है। शनिवार को सुबह ही आसमान में बादल डेरा डाले रहे, जिससे मौसम सुहाना जरूर हुआ, लेकिन किसानों के लिए ये बारिश ऊंट के मुहं में जीरा समान लगा। बारिश से गर्मी से कुछ हद तक राहत मिली।  

विज्ञापन
विज्ञापन


 क्षेत्र से मानसून ने मुहं फेर लिया है। गांवों में खरीफ की फसल की बुआई की शुरूआत अभी तक नहीं हो सकी है। किसान एक बरसात की चाहत में हैं। क्षेत्र के मुन छपरा, लक्ष्मीपुर, दल छपरा, खड़ीका, छेड़ी, चौबे छपरा, कंचनपुर, पियरौटा, गायघाट, मुड़ाडीह लगायत दियारांचल तक के दर्जनों गांव के किसान अभी भी खरीफ की फसल नहीं बो पाए हैं। धान की बेहन लगाए किसानों को धान के पौध जिलाने के लिए निरंतर पानी लेना पड़ रहा है। जमीन में नमी के नहीं होने के चलते अरहर तथा मक्का की बुआई भी बाधित है। 

 


एक अच्छी बरसात नहीं होने के कारण किसान परेशान हैं। अब तक मक्का तथा अरहर की बुआई शुरू हो जानी चाहिए थी। लेकिन अवर्षण के कारण खेती किसानी ठप पड़ी हुई है। चारों तरफ सूखे खेत नजर आ रहे हैं, जहां-तहां बेहन लगाया गया है, जो किसी तरह ट्यूबवेल के पानी के बल पर जीवित हैं। यह पानी बहुत खर्चीला पड़ रहा है। 
 

 

 नगर के किसान प्रवीण ओझा दस बीघा धान की खेती के लिए करीब दस कट्ठा में बेहन लगाए हुए हैं। वे बताते हैं कि धान के बेहन को जीवित रखने के लिए चार-चार घंटे के हिसाब से अब तक आठ बार पानी लेना पड़ा है। यह नलकूप का पानी 140 रुपये प्रतिघंटा के हिसाब से मिलता है।

 

उधर, दस बीघा मक्का बोने वाले नगर के ही बड़े पांडेय ने बताया कि बिना नमी के मक्का या अरहर बोना कठिन है। एक बरसात की अति आवश्यकता है। इसके बाद ही मक्का तथा अरहर बोए जा सकते हैं। बेहन लगाए कई किसान 25 दिन पार  कर चुके हैं। इस अवधि के बाद धान की रोपाई होनी चाहिए।

 

लेकिन सूखा के चलते धान की रोपाई रूकी पड़ी है। भू-गर्भीय पानी का स्तर नीचे खिसक गया है। इसके चलते नलकूप से पानी भी कम आ रहा है। उधर इसके उलट जोते पड़े खेत बिल्कुल तप चुके हैं। किसानों का मानना है कि पानी छोड़ते ही खेत पानी को सोखेंगे। जिसके चलते धान की रोपाई काफी महंगी हो जाएगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed