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शिक्षा का बाजारीकरण नहीं उठने दे रहा स्तर

Mon, 04 May 2015 10:43 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया Updated Mon, 04 May 2015 10:43 PM IST
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Marketization level of education is not giving up
सीनियर बेसिक शिक्षक संघ जिला इकाई के तत्वावधान में शिक्षा उन्नयन गोष्ठी का आयोजन बापू भवन टाउन हाल में सोमवार को किया गया।
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 इसमें वक्ताओं ने शिक्षा के निजीकरण पर गहरी चिंता जताई। कहा कि शिक्षा पूरे देश में महंगा होने के चलते गरीबी में जीने वाले घरों के बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं। इसके लिए एक ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष सुरेशचंद्र वैशवार ने कहा कि सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षक कर्मचारियों की समस्याओं पर कभी भी प्रदेश एवं केंद्र सरकार ध्यान नहीं देती है।
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धीरे-धीरे शिक्षा को निजीकरण की तरफ ले जाया जा रहा है। देश में गरीबी के बावजूद भी लोग अपने लाडलों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने की चाहत रखते हैं।

बावजूद इसके दोहरीकरण एवं बाजारीकरण के चलते गरीब अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही भेजकर संतोष कर लेते हैं। संघ के जिलाध्यक्ष रवींद्र सिंह ने कहा कि हम अपनी सब मांगों को प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष पत्रक के माध्यम से रख चुके हैं।
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 यदि आवश्यकता पड़ी तो हम कदम से कदम मिलाकर आंदोलन करेंगे। संघ के नवनिर्वाचित प्रांतीय उपाध्यक्ष संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि शिक्षक कर्मचारियों की मांगों के लिए हमेशा कदम से कदम मिलाकर काम करेंगे।

 कहा कि पांच सूत्री मांगें हैं। कर्मचारी नेता बलवंत सिंह ने कहा कि आजादी के समय ही गोपाल कृष्ण गोखले ने छह से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त तथा अनिवार्य शिक्षा की मांग की थी। मगर आजादी के बाद भी शिक्षा को अनिवार्य नहीं किया गया।

प्रांतीय महामंत्री श्रवण कुमार सिंह ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के चलते अमीर और मध्यम वर्ग के बच्चे कान्वेंट तथा अन्य स्कूलों में अपना नामांकन कराते हैं।


जबकि गरीब के बच्चे प्राथमिक विद्यालयों में ही दाखिला ले पाते हैं, जहां संसाधनों का अभाव है। डा. अंजनी कुमार पांडेय ने कहा कि शिक्षक कर्मचारियों के बुढ़ापे की लाठी पेंशन को भी सरकार ने 2005 में खत्म कर दिया जो गलत है। इस मौके पर प्राथमिक शिक्षक संघ के सुरेंद्र सिंह, अवधेश सिंह, विष्णु राय, डा. घनश्याम चौबे, गिरजा राय आदि ने संबोधित किया। सभा में अनिल सिंह, सुभाषचंद्र, चंद्रमुखी वर्मा, अवध बिहारी सिंह, अल्का पांडेय, प्रियंबदा ओझा आदि शिक्षक कर्मचारी मौजूद रहे। अध्यक्षता त्रिलोकी सिंह तथा संचालन महामंत्री ओमप्रकाश यादव ने किया।    
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